{"_id":"6add171ba8094fcb1c0c8d7b","slug":"allegations-of-negligence-in-gall-bladder-operation-vein-cut-lucknow-news-c-13-lko1070-1980019-2026-10-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: पित्त की थैली के ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप, नस कटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: पित्त की थैली के ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप, नस कटी
विज्ञापन
लखनऊ। एरा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में पित्त की थैली के ऑपरेशन के दौरान लापरवाही का गंभीर आरोप लगा है। संभल निवासी महिला जरीन के परिजनों का दावा है कि पहली सर्जरी के दौरान उनकी महत्वपूर्ण नस कट गई। इसके बाद पित्त का रिसाव शुरू हो गया और तीन दिन के भीतर दोबारा ऑपरेशन करना पड़ा। इसके बावजूद महिला की हालत बिगड़ गई और उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। परिजनों ने मामले की शिकायत मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से की है।
जरीन के पति मोहम्मद जिशान के मुताबिक, पित्त की थैली में पथरी होने पर उन्होंने बीते माह एरा मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर को दिखाया था। जांच के बाद जरीन को भर्ती कर लिया गया। अस्पताल प्रबंधन ने इलाज पर 40 से 60 हजार रुपये खर्च बताया था। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने सर्जरी सफल होने की जानकारी दी लेकिन बाद में जरीन को पित्त का रिसाव होने लगा। इसके बाद तीन दिन के भीतर दोबारा सर्जरी की गई। परिजनों का आरोप है कि इससे उनकी हालत सुधरने के बजाय और बिगड़ गई।
परिजन जरीन को लेकर केजीएमयू पहुंचे। वहां जांच में पता चला कि पहली सर्जरी के दौरान ही महत्वपूर्ण रक्त वाहिनी कट गई थी। हालत गंभीर होने के कारण उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी। केजीएमयू में वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं होने पर परिजन उन्हें दूसरे निजी अस्पताल ले गए। वहां इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ। जिशान का कहना है कि कटी हुई रक्त वाहिनी की सर्जरी अभी बाकी है।
विज्ञापन
तीमारदारों के आरोप बेबुनियाद हैं। ऑपरेशन में किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई थी। नस कटने की बात गलत है। परिजन बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल खुद लेकर गए थे। -डॉ. उस्मान मूसा, एरा मेडिकल कॉलेज
शिकायत मिली है और मामले की जांच कराई जाएगी। आरोप सही पाए जाने पर संबंधित डॉक्टर की प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) को पत्र भेजा जाएगा। -डॉ. एनबी सिंह, सीएमओ
विज्ञापन
जरीन के पति मोहम्मद जिशान के मुताबिक, पित्त की थैली में पथरी होने पर उन्होंने बीते माह एरा मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर को दिखाया था। जांच के बाद जरीन को भर्ती कर लिया गया। अस्पताल प्रबंधन ने इलाज पर 40 से 60 हजार रुपये खर्च बताया था। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने सर्जरी सफल होने की जानकारी दी लेकिन बाद में जरीन को पित्त का रिसाव होने लगा। इसके बाद तीन दिन के भीतर दोबारा सर्जरी की गई। परिजनों का आरोप है कि इससे उनकी हालत सुधरने के बजाय और बिगड़ गई।
विज्ञापन
परिजन जरीन को लेकर केजीएमयू पहुंचे। वहां जांच में पता चला कि पहली सर्जरी के दौरान ही महत्वपूर्ण रक्त वाहिनी कट गई थी। हालत गंभीर होने के कारण उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी। केजीएमयू में वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं होने पर परिजन उन्हें दूसरे निजी अस्पताल ले गए। वहां इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ। जिशान का कहना है कि कटी हुई रक्त वाहिनी की सर्जरी अभी बाकी है।
विज्ञापन
तीमारदारों के आरोप बेबुनियाद हैं। ऑपरेशन में किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई थी। नस कटने की बात गलत है। परिजन बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल खुद लेकर गए थे। -डॉ. उस्मान मूसा, एरा मेडिकल कॉलेज
शिकायत मिली है और मामले की जांच कराई जाएगी। आरोप सही पाए जाने पर संबंधित डॉक्टर की प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) को पत्र भेजा जाएगा। -डॉ. एनबी सिंह, सीएमओ