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फैसला देने वाले न्यायाधीश ही देखेंगे पुनर्विचार याचिका, यह है प्रक्रिया
Sat, 30 Nov 2019 10:48 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 30 Nov 2019 10:48 AM IST
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अयोध्या विवाद पर हिंदू पक्ष की तरफ से सर्वोच्च न्यायालय में बहस करने वाले श्रीराम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति के अधिवक्ता पी.एन. मिश्र बताते हैं कि मुस्लिम पक्ष की तरफ से यदि कोई व्यक्ति पुनर्विचार याचिका देता है तो उस पर फैसला संबंधित मामले में निर्णय देने वाले न्यायाधीश ही करते हैं।
फिर अब तक मुस्लिम पक्ष के कुछ लोगों की तरफ से जिन सवालों को उठाकर पुनर्विचार याचिका दायर करने की बात कही जा रही है उन सब पर एक-एक करके पूर्ण पीठ के सामने सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की तरफ से जवाब दिया जा चुका है।
यह है प्रक्रिया
‘अमर उजाला’ से बातचीत में मिश्र पुनर्विचार याचिका की प्रक्रिया समझाते हुए बताते हैं कि ये सर्वोच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार को दी जाएगी। रजिस्ट्रार इसे संबंधित न्यायाधीशों को भेजेंगे। वे अपने कक्ष में इस पर निर्णय करेंगे। कक्ष में न तो पुनर्विचार याचिका दायर करने वाले अर्थात मुस्लिम पक्ष का कोई वकील होगा और न हिंदू पक्ष का जिसके खिलाफ यह दायर की गई है।
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चूंकि अयोध्या मामले में निर्णय देने वाले न्यायाधीशों में एक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गगोई सेवानिवृत्त हो चुके हैं। पर, शेष चार न्यायाधीश पूर्व की तरह सेवारत हैं। इनमें गगोई की जगह अब मुख्य न्यायाधीश न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस.ए. बोवड़े हैं। पुनर्विचार याचिका यदि दी जाती है तो रजिस्ट्रार उसे सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भेज देंगे। मुख्य न्यायाधीश फैसला देने वाले अन्य तीन न्यायाधीशों के साथ किसी एक वरिष्ठ न्यायाधीश को और पैनल में शामिल करेंगे। इसके बाद कक्ष में याचिका पर विचार करके तय करेंगे कि उसे निरस्त करना है या सुनवाई के लिए स्वीकार करना है।
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फिर अब तक मुस्लिम पक्ष के कुछ लोगों की तरफ से जिन सवालों को उठाकर पुनर्विचार याचिका दायर करने की बात कही जा रही है उन सब पर एक-एक करके पूर्ण पीठ के सामने सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की तरफ से जवाब दिया जा चुका है।
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यह है प्रक्रिया
‘अमर उजाला’ से बातचीत में मिश्र पुनर्विचार याचिका की प्रक्रिया समझाते हुए बताते हैं कि ये सर्वोच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार को दी जाएगी। रजिस्ट्रार इसे संबंधित न्यायाधीशों को भेजेंगे। वे अपने कक्ष में इस पर निर्णय करेंगे। कक्ष में न तो पुनर्विचार याचिका दायर करने वाले अर्थात मुस्लिम पक्ष का कोई वकील होगा और न हिंदू पक्ष का जिसके खिलाफ यह दायर की गई है।
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चूंकि अयोध्या मामले में निर्णय देने वाले न्यायाधीशों में एक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गगोई सेवानिवृत्त हो चुके हैं। पर, शेष चार न्यायाधीश पूर्व की तरह सेवारत हैं। इनमें गगोई की जगह अब मुख्य न्यायाधीश न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस.ए. बोवड़े हैं। पुनर्विचार याचिका यदि दी जाती है तो रजिस्ट्रार उसे सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भेज देंगे। मुख्य न्यायाधीश फैसला देने वाले अन्य तीन न्यायाधीशों के साथ किसी एक वरिष्ठ न्यायाधीश को और पैनल में शामिल करेंगे। इसके बाद कक्ष में याचिका पर विचार करके तय करेंगे कि उसे निरस्त करना है या सुनवाई के लिए स्वीकार करना है।
तभी स्वीकार होगी याचिका
आमतौर पर पुनर्विचार याचिका तभी स्वीकार होती हैं जब न्यायाधीशों को लगता है कि पुनर्विचार याचिका में जो तथ्य व तर्क दिया गया है मूल मामले में उस पर विचार नहीं हो पाया है। मुस्लिम पक्ष के वकीलों की तरफ से जो पुनर्विचार याचिका दायर करने के पक्ष में जो तर्क अभी तक सार्वजनिक हुए हैं उनमें लगभग सभी पर बहस हो चुकी है।
हिंदू पक्ष की तरफ से सभी का ऑन रिकार्ड जवाब दिया जा चुका है। ऐसी संभावनाएं फिलहाल नहीं दिखती कि मुस्लिम पक्ष की तरफ से कुछ ऐसी नई ठोस बात न्यायालय के सामने रखी जा सकती है जिस पर मूल मामले में न्यायालय ने सुनवाई न की हो।
हिंदू पक्ष की तरफ से सभी का ऑन रिकार्ड जवाब दिया जा चुका है। ऐसी संभावनाएं फिलहाल नहीं दिखती कि मुस्लिम पक्ष की तरफ से कुछ ऐसी नई ठोस बात न्यायालय के सामने रखी जा सकती है जिस पर मूल मामले में न्यायालय ने सुनवाई न की हो।