बहराइच: सामने आई बच्चे को लील लेने की पूरी घटना, जाल फेककर ऐसा निकला अधखाया शव; गांव में दहशत
Crocodile in Bahraich: बहराइच में मगरमच्छ के द्वारा बच्चे को लील लेने की पूरी घटना का सत्य सामने आया है। इस घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है।
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बहराइच जिले के तिकुरी गांव के निकट सरयू नदी में मगरमच्छ का शिकार बने 12 वर्षीय सुनील की मौत का मंजर उसके चाचा विजय राज आज भी भूल नहीं पा रहे हैं। घटना को याद करते ही उनकी आंखें भर आती हैं। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को खेत में धान की रोपाई का काम खत्म होने के बाद सभी घर लौटने की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच सुनील हाथ-पैर धोने के लिए नदी किनारे गया। तभी झाड़ियों में छिपे मगरमच्छ ने अचानक उसे जबड़ों में दबोच लिया।
विजय राज के मुताबिक, सुनील ने घबराकर सिर्फ इतना कहा, चाचा... बचाओ। लेकिन जब तक वह दौड़कर मौके पर पहुंचते, मगरमच्छ उसे गहरे पानी में खींच ले गया। शोर सुनकर ग्रामीण भी मौके पर जुट गए, लेकिन कोई उसे बचा नहीं सका।
करीब दो घंटे बाद मगरमच्छ सुनील के शव को पानी की सतह पर लाया और उसे झटकने लगा। इसी दौरान गांव निवासी अनिल सिंह ने साहस दिखाते हुए मगरमच्छ की ओर मछली पकड़ने वाला जाल फेंका। ग्रामीणों और मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने मिलकर कड़ी मशक्कत के बाद मगरमच्छ के कब्जे से सुनील का अधखाया शव जाल की सहायता से बाहर निकाला।
विजय राज ने दर्द भरे शब्दों में कहा कि उस समय उनकी हालत ऐसी थी कि कुछ समझ नहीं आ रहा था। कई लोग घटना का वीडियो बना रहे थे, लेकिन उनकी नजर सिर्फ अपने भतीजे को बचाने पर थी। उन्होंने कहा, काश... हम कुछ सेकंड पहले पहुंच जाते, तो शायद सुनील आज हमारे बीच होता।
बहुत ताकतवर था मगरमच्छ, बड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला सुनील का शव
तिकुरी गांव निवासी अनिल सिंह, जिन्होंने साहस दिखाते हुए नदी से सुनील का शव बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई, ने बताया कि मगरमच्छ बेहद ताकतवर था। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने मछली पकड़ने वाला जाल मगरमच्छ की ओर फेंका तो वह पहले जाल में ही उलझ गया। कुछ देर तक मगरमच्छ और जाल के बीच खींचतान होती रही। आखिरकार मगरमच्छ शव छोड़कर गहरे पानी में चला गया। इसके बाद ग्रामीणों और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की मदद से जाल के सहारे सुनील के शव को धीरे-धीरे किनारे तक खींचकर बाहर निकाला गया। अनिल ने बताया कि यह बेहद भयावह और दिल दहला देने वाला मंजर था, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
माता-पिता की हो चुकी है मौत
सुनील पहले से ही अनाथ था। ग्रामीणों के अनुसार उसकी मां का सात वर्ष पहले और पिता का पांच वर्ष पहले बीमारी से निधन हो चुका था। अब परिवार में 14 वर्षीय बहन सुमन, 10 वर्षीय भाई संजय और सात वर्षीय बहन सीमा ही बचे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर इस परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है। सिर्फ चाचा का ही सहारा है। घटना के बाद गांव के लोग बच्चों की मदद के लिए आगे आने लगे हैं और चंदा भी एकत्र किया जा रहा है।
गांव में दहशत, वन विभाग ने जारी किया अलर्ट
घटना के बाद तिंकुरी और आसपास के गांवों में भय का माहौल है। किसान नदी किनारे खेतों में जाने से डर रहे हैं। वन क्षेत्राधिकारी मोहम्मद शाकिब ने बताया कि सरयू किनारे बसे गांवों में मुनादी कराकर लोगों को नदी से दूर रहने की चेतावनी दी जा रही है। मगरमच्छ को पकड़ने के लिए जाल लगाने, अतिरिक्त गश्त बढ़ाने और चेतावनी बोर्ड लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।