UP: कोडीन कफ सिरप की अवैध बिक्री में श्याम फार्मा संचालक गिरफ्तार, 19 नवबंर को दर्ज हुई थी एफआईआर
पुलिस की जांच में सामने आया कि कोडीन कफ सिरप मामले में बड़ी अनियमितता हुई हैं। सोमवार को एक और आरोपी की गिरफ्तारी हुई है। पुलिस जांच में फर्जी बिलों का भी खुलासा हुआ है।
विस्तार
कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध बिक्री मामले में पुलिस ने कार्रवाई और तेज कर दी है। पहले चरण में अशोक मेडिकल और अमन मेडिकल स्टोर के लाइसेंस निरस्त किए जा चुके हैं। इसके बाद सोमवार को पुलिस ने पुरानी बाजार स्थित श्याम फार्मा के संचालक वरुण लाठ को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस की मानें तो जांच में बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। दवा कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
मामले की एफआईआर 19 नवंबर को औषधि निरीक्षक ने दो मेडिकल स्टोर के संचालकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसके जांच अब आगे बढ़ी है। पुलिस के अनुसार श्याम फार्मा के नाम से करीब 15 हजार बोतल कोडीन सिरप की बिक्री दर्शाने वाले बिल प्रस्तुत किए गए थे, लेकिन जब संबंधित मूल बिल, स्टॉक रजिस्टर और खरीद-बिक्री के अभिलेख मांगे गए तो संचालक ठोस दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सका।
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बार-बार नोटिस के बावजूद वास्तविक कागजात नहीं दिए गए। इस पर संचालक को गिरफ्तार किया गया। प्रभारी निरीक्षक राजकुमार सिंह ने बताया कि श्याम फार्मा ने कोडीन सिरप की बिक्री से संबंधित वैध अभिलेख प्रस्तुत न किए जाने पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि जांच में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ रही है और शीघ्र ही और गिरफ्तारियां संभव हैं। बताया कि नशीली दवाओं की अवैध बिक्री पर पूर्ण अंकुश लगाने के उद्देश्य से अभियान जारी रहेगा।
एसआईटी की देखरेख में हो रहा है खरीद बिक्री का सत्यापन
कस्बे के अमन मेडिकल स्टोर और अशोक मेडिकल स्टोर की ओर से दो दर्जन से अधिक व्यक्तियों के नाम पर बिक्री बिल प्रस्तुत किए गए हैं। इन बिलों की सत्यता की जांच प्रदेश स्तर पर गठित एसआईटी के देखरेख में की जा रही है। थोक दवा विक्रेताओं से प्राप्त विवरणों में कई व्यक्तियों को भारी मात्रा में कोडीन सिरप बेचे जाने का उल्लेख है, जबकि संबंधित पक्षों से अब तक पुष्ट दस्तावेज नहीं मिल पाए हैं। पुलिस स्टॉक रजिस्टर, जीएसटी विवरण, ट्रांसपोर्ट रसीद और बैंक लेनदेन का भी मिलान कर रही है।
फर्जी बिलों का दावा, शपथ पत्र की तैयारी
जांच के दौरान मामला तब और पेचीदा हो गया जब कुछ दुकानदारों ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि उनके नाम से फर्जी बिल बनाए गए हैं। उन्होंने इतनी बड़ी मात्रा में दवा की खरीद नहीं की। कुछ व्यापारियों ने पुलिस को एफिडेविट देने की तैयारी भी जताई है। इससे अवैध नेटवर्क के संगठित होने की आशंका मजबूत हुई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार जांच अब केवल खुदरा दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि थोक आपूर्ति श्रृंखला, परिवहन माध्यम और ऑनलाइन भुगतान तक खंगाली जा रही है। कॉल डिटेल, डिजिटल पेमेंट रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर भी पड़ताल की जा रही है, ताकि अवैध सप्लाई चैन की पूरी तस्वीर सामने आ सके।
