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Lucknow News: प्राइवेटकर्मियों पर आवेदकों से वसूली का दबाव बना रहीं डीएल एजेंसियां
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प्राइवेटकर्मियों पर आवेदकों से वसूली का दबाव बना रहीं डीएल एजेंसियां
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सीएम कार्यालय पहुंची शिकायतें, जांच होगी
कर्मियों से वसूली, उन्हें नाैकरी से निकालने का मामला
लखनऊ। ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाली एजेंसियां कर्मचारियों पर आवेदकों से वसूली का दबाव बना रही हैं। जिसकी शिकायतें सीएम कार्यालय पहुंची हैं। मामले की जांच की उम्मीद जताई जा रही है। इसमें डीएल एजेंसियों द्वारा कर्मचारियों से वसूली व उन्हें नाैकरी से निकालने के मामलों की भी जांच शामिल होगी।
फोकाम, सिल्वर टच व रोजमार्टा, इन तीन एजेंसियों को परिवहन विभाग की ओर से प्रदेशभर में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने, प्रिंट करने व आवेदकों को डिलीवर करने की जिम्मेदारी साैंपी गई है। अव्वल तो कंपनी के प्रतिनिधियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए 320 कर्मचारियों की भर्ती कर ली, जबकि 225 कर्मियों की नियुक्ति की जानी थी। कर्मचारियों से तीन से चार लाख रुपये की वसूली की गई। इसके बाद एजेंसी प्रतिनिधियों ने कर्मचारियों से सैलरी की धनराशि मांगी। जिन कर्मचारियों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, उन्हें नाैकरी से निकाला जाने लगा। 45 कर्मियों को अब तक नाैकरी से निकाल दिया गया है। इसी क्रम में अब निजी डीएल एजेंसियां प्राइवेटकर्मियों पर डीएल आवेदकों से वसूली का दबाव बना रही हैं। सीतापुर, लखीमपुर, कानपुर, मथुरा, मेरठ, बलिया, अयोध्या सहित 18 जिलों के कर्मचारियों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय से की है। कर्मचारियों का कहना है कि उनसे डीएल बनवाने वाले आवेदकों से वसूली का दबाव बनाया जा रहा है, जिसके बाद मंथली इनकम मांगी जाएगी। ऐसे में उनके सामने दुश्वारियां बढ़ती जा रही हैं। प्राइवेटकर्मियों को अभी अपनी सैलरी एजेंसियों को एडवांस में देनी पड़ रही है, इसके बाद मंथली देने से उनके लिए काम करना और भी मुश्किल हो जाएगा। इतना ही नहीं डीएल आवेदकों के सामने भी समस्याएं बढ़ जाएंगी।
सीएम कार्यालय सख्त, होगी जांच
प्राइवेटकर्मियों ने सीएम कार्यालय से शिकायतें दर्ज करवाई हैं। सीतापुर, लखीमपुर व बलिया के प्राइवेटकर्मियों ने वहां के जनप्रतिनिधियों को भी इस समस्या से अवगत कराया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि सीएम कार्यालय से मामले में जांच होगी। इतना ही नहीं डीएल एजेंसियों द्वारा प्राइवेटकर्मियों से वसूली, उन्हें नाैकरी से निकालने के मामले की भी जांच इस जांच में शामिल होगी।
कर्मियों से वसूली, उन्हें नाैकरी से निकालने का मामला
लखनऊ। ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाली एजेंसियां कर्मचारियों पर आवेदकों से वसूली का दबाव बना रही हैं। जिसकी शिकायतें सीएम कार्यालय पहुंची हैं। मामले की जांच की उम्मीद जताई जा रही है। इसमें डीएल एजेंसियों द्वारा कर्मचारियों से वसूली व उन्हें नाैकरी से निकालने के मामलों की भी जांच शामिल होगी।
फोकाम, सिल्वर टच व रोजमार्टा, इन तीन एजेंसियों को परिवहन विभाग की ओर से प्रदेशभर में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने, प्रिंट करने व आवेदकों को डिलीवर करने की जिम्मेदारी साैंपी गई है। अव्वल तो कंपनी के प्रतिनिधियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए 320 कर्मचारियों की भर्ती कर ली, जबकि 225 कर्मियों की नियुक्ति की जानी थी। कर्मचारियों से तीन से चार लाख रुपये की वसूली की गई। इसके बाद एजेंसी प्रतिनिधियों ने कर्मचारियों से सैलरी की धनराशि मांगी। जिन कर्मचारियों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, उन्हें नाैकरी से निकाला जाने लगा। 45 कर्मियों को अब तक नाैकरी से निकाल दिया गया है। इसी क्रम में अब निजी डीएल एजेंसियां प्राइवेटकर्मियों पर डीएल आवेदकों से वसूली का दबाव बना रही हैं। सीतापुर, लखीमपुर, कानपुर, मथुरा, मेरठ, बलिया, अयोध्या सहित 18 जिलों के कर्मचारियों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय से की है। कर्मचारियों का कहना है कि उनसे डीएल बनवाने वाले आवेदकों से वसूली का दबाव बनाया जा रहा है, जिसके बाद मंथली इनकम मांगी जाएगी। ऐसे में उनके सामने दुश्वारियां बढ़ती जा रही हैं। प्राइवेटकर्मियों को अभी अपनी सैलरी एजेंसियों को एडवांस में देनी पड़ रही है, इसके बाद मंथली देने से उनके लिए काम करना और भी मुश्किल हो जाएगा। इतना ही नहीं डीएल आवेदकों के सामने भी समस्याएं बढ़ जाएंगी।
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सीएम कार्यालय सख्त, होगी जांच
प्राइवेटकर्मियों ने सीएम कार्यालय से शिकायतें दर्ज करवाई हैं। सीतापुर, लखीमपुर व बलिया के प्राइवेटकर्मियों ने वहां के जनप्रतिनिधियों को भी इस समस्या से अवगत कराया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि सीएम कार्यालय से मामले में जांच होगी। इतना ही नहीं डीएल एजेंसियों द्वारा प्राइवेटकर्मियों से वसूली, उन्हें नाैकरी से निकालने के मामले की भी जांच इस जांच में शामिल होगी।
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