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Lucknow News: डीएल एजेंसियों की लूट के आगे अफसर लाचार, आश्वासन देकर टरका रहे
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डीएल एजेंसियों की लूट के आगे अफसर लाचार, आश्वासन देकर टरका रहे
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320 प्राइवेटकर्मियों से नियुक्ति के नाम पर वसूली का मामला
45 कर्मचारियों को वसूली के बाद एजेंसियों ने निकाला, टीसी ऑफिस पहुंचे पीड़ित
लखनऊ। ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाली एजेंसियों की लूट व भ्रष्टाचार के आगे परिवहन विभाग के अफसर लाचार नजर आ रहे हैं। लगातार शिकायतों के बावजूद अफसर सिर्फ आश्वासन देकर पीड़ितों को टरका रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जनता दर्शन कार्यक्रम में मिलकर पीड़ित अपनी समस्या रखेंगे।
दरअसल प्रदेशभर में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने, प्रिंट करने एवं आवेदकों को डाक से डिलीवर करने की जिम्मेदारी फोकाम, सिल्वर टच एवं रोजमार्टा एजेंसियों के पास है। इन एजेंसियों ने 320 कर्मचारियों को तैनात किया है। जो आरटीओ, एआरटीओ में आने वाले आवेदकों के ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का काम करते हैं। परिवहन विभाग के अफसरों की मिलीभगत से एजेंसी प्रतिनिधियों ने कर्मचारियों से कम्प्यूटर खरीदवाए। उनसे सैलरी का पैसा एडवांस में लिया गया। उन्हें नाैकरी देने के नाम पर मोटी रकम वसूली। गत वर्ष नवंबर से लेकर अब तक इन मामलों की तीन एजेंसियों के खिलाफ 32 शिकायतें दर्ज हुईं। इसमें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चाैधरी की शिकायत भी शामिल है। साथ ही सीतापुर, लखीमपुर, कानपुर, मैनपुरी, बहराइच, प्रयागराज सहित लगभग प्रदेशभर के जनप्रतिनिधियों ने पत्रों के मार्फत परिवहन विभाग से मामले की जांच कराने को कहा। लेकिन अफसर इन एजेंसियों के आगे लाचार सी नजर आ रही हैं। शिकायतों पर कोई कार्रवाई ही नहीं हो रही है। उधर तीनों एजेंसियों की वसूली जारी है। ऐसे में मामले को लेकर गत दिवस पीड़ित, जिनसे नियुक्ति के नाम पर तीन-तीन लाख रुपये वसूले गए, परिवहन आयुक्त कार्यालय पहुंचे, लेकिन उन्हें आश्वासन देकर टरका दिया गया। लिहाजा अब कर्मचारियों के पास मुख्यमंत्री से गुहार लगाने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचा है। पीड़ित जनता दर्शन में अपनी समस्याओं से सीएम को रूबरू कराएंगे।
सुनियोजित षड्यंत्र के तहत हुआ खेल
सूत्र बताते हैं कि प्राइवेटकर्मियों से वसूली के खेल में परिवहन विभाग के अफसर भी एजेंसियों से मिले हुए हैं। दरअसल, बीते नवंबर में एक आरटीओ की चिट्ठी के बाद ही यह खेल शुरू हुआ। पहले डेढ़ दशक से तैनात कर्मचारियों को दलाल बताया गया, फिर उन्हें नाैकरी से निकाला गया और दोबारा नाैकरी पर रखने के लिए मोटी रकम वसूली गई। ऐसे में अफसरों की मिलीभगत की भी जांच होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
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ये शिकायतें हुईं दर्ज, लेकिन पीड़ितों को मिला आश्वासन
-निजी एजेंसियों की ओर से प्राइवेटकर्मियों से नाैकरी के नाम पर तीन से चार लाख रुपये वसूले गए।
-फोकाम नेट प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व प्रतिनिधि एसएन पांडेय ने 15 कर्मियों से 45 लाख वसूले। फिर उन कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया गया।
-हाल ही में निजी एजेंसियों की ओर से 40 कर्मियों को बाहर निकाला गया, जिनसे नाैकरी के नाम पर 1.20 करोड़ रुपये वसूले गए थे।
-एजेंसियों ने कर्मचारियों से कम्प्यूटर खरीदवाए, यूपीएस मंगवाए और उसकी बिलिंग कंपनी के नाम पर करवाया।
-प्राइवेटकर्मियों से उनकी सैलरी का पैसा मांगा जा रहा है। जो वापस एजेंसी की ओर से उन्हें सैलरी के रूप में क्रेडिट किया जाएगा।
-सात महीने से कर्मचारियों को सैलरी नहीं दी गई। इसकी शिकायत भी दर्ज हुई है।
45 कर्मचारियों को वसूली के बाद एजेंसियों ने निकाला, टीसी ऑफिस पहुंचे पीड़ित
लखनऊ। ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाली एजेंसियों की लूट व भ्रष्टाचार के आगे परिवहन विभाग के अफसर लाचार नजर आ रहे हैं। लगातार शिकायतों के बावजूद अफसर सिर्फ आश्वासन देकर पीड़ितों को टरका रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जनता दर्शन कार्यक्रम में मिलकर पीड़ित अपनी समस्या रखेंगे।
दरअसल प्रदेशभर में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने, प्रिंट करने एवं आवेदकों को डाक से डिलीवर करने की जिम्मेदारी फोकाम, सिल्वर टच एवं रोजमार्टा एजेंसियों के पास है। इन एजेंसियों ने 320 कर्मचारियों को तैनात किया है। जो आरटीओ, एआरटीओ में आने वाले आवेदकों के ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का काम करते हैं। परिवहन विभाग के अफसरों की मिलीभगत से एजेंसी प्रतिनिधियों ने कर्मचारियों से कम्प्यूटर खरीदवाए। उनसे सैलरी का पैसा एडवांस में लिया गया। उन्हें नाैकरी देने के नाम पर मोटी रकम वसूली। गत वर्ष नवंबर से लेकर अब तक इन मामलों की तीन एजेंसियों के खिलाफ 32 शिकायतें दर्ज हुईं। इसमें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चाैधरी की शिकायत भी शामिल है। साथ ही सीतापुर, लखीमपुर, कानपुर, मैनपुरी, बहराइच, प्रयागराज सहित लगभग प्रदेशभर के जनप्रतिनिधियों ने पत्रों के मार्फत परिवहन विभाग से मामले की जांच कराने को कहा। लेकिन अफसर इन एजेंसियों के आगे लाचार सी नजर आ रही हैं। शिकायतों पर कोई कार्रवाई ही नहीं हो रही है। उधर तीनों एजेंसियों की वसूली जारी है। ऐसे में मामले को लेकर गत दिवस पीड़ित, जिनसे नियुक्ति के नाम पर तीन-तीन लाख रुपये वसूले गए, परिवहन आयुक्त कार्यालय पहुंचे, लेकिन उन्हें आश्वासन देकर टरका दिया गया। लिहाजा अब कर्मचारियों के पास मुख्यमंत्री से गुहार लगाने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचा है। पीड़ित जनता दर्शन में अपनी समस्याओं से सीएम को रूबरू कराएंगे।
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सुनियोजित षड्यंत्र के तहत हुआ खेल
सूत्र बताते हैं कि प्राइवेटकर्मियों से वसूली के खेल में परिवहन विभाग के अफसर भी एजेंसियों से मिले हुए हैं। दरअसल, बीते नवंबर में एक आरटीओ की चिट्ठी के बाद ही यह खेल शुरू हुआ। पहले डेढ़ दशक से तैनात कर्मचारियों को दलाल बताया गया, फिर उन्हें नाैकरी से निकाला गया और दोबारा नाैकरी पर रखने के लिए मोटी रकम वसूली गई। ऐसे में अफसरों की मिलीभगत की भी जांच होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
ये शिकायतें हुईं दर्ज, लेकिन पीड़ितों को मिला आश्वासन
-निजी एजेंसियों की ओर से प्राइवेटकर्मियों से नाैकरी के नाम पर तीन से चार लाख रुपये वसूले गए।
-फोकाम नेट प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व प्रतिनिधि एसएन पांडेय ने 15 कर्मियों से 45 लाख वसूले। फिर उन कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया गया।
-हाल ही में निजी एजेंसियों की ओर से 40 कर्मियों को बाहर निकाला गया, जिनसे नाैकरी के नाम पर 1.20 करोड़ रुपये वसूले गए थे।
-एजेंसियों ने कर्मचारियों से कम्प्यूटर खरीदवाए, यूपीएस मंगवाए और उसकी बिलिंग कंपनी के नाम पर करवाया।
-प्राइवेटकर्मियों से उनकी सैलरी का पैसा मांगा जा रहा है। जो वापस एजेंसी की ओर से उन्हें सैलरी के रूप में क्रेडिट किया जाएगा।
-सात महीने से कर्मचारियों को सैलरी नहीं दी गई। इसकी शिकायत भी दर्ज हुई है।