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Lucknow News: ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाली अब खुद लगा रही कम्प्यूटर, वेबकैम, कर्मियों के सिस्टम लौटाए

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 21 Jan 2026 06:27 PM IST
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dl private employees case
ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाली अब खुद लगा रही कम्‍प्यूटर, वेबकैम, कर्मियों के सिस्टम लौटाए
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ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाली अब खुद लगा रही कम्प्यूटर, वेबकैम, कर्मियों के सिस्टम लौटाए
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अमर उजाला इम्पैक्ट
परिवहन विभाग में 25 जिलों के 120 प्राइवेटकर्मियों का मामला


माई सिटी रिपोर्टर

लखनऊ। ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े काम करने वाले प्राइवेटकर्मियों से कम्प्यूटर, वेबकैम व अन्य उपकरणों को खरीदवाने वाली निजी एजेंसी को फटकार लगी है। एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर खुद सिस्टम खरीदकर लगवा रहे हैं। जबकि अभी तक कर्मचारियों से ऐसा करवाकर बिल कंपनी के नाम बनवाने का दबाव डाला जा रहा था। जिन कर्मचारियों ने कम्प्यूटर वगैरह खरीद लिए थे, उन्हें लौटा दिए गए हैं।
मामला परिवहन विभाग से जुड़ा है, जिसकी शिकायत परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह तक पहुंच गई थी। दरअसल, परिवहन विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने, उनकी प्रिंटिंग, डिलीवरी का कामकाज निजी एजेंसियों के पास है। प्रदेशभर में तीन कंपनियों सिल्वर टच, फोकॉम नेट व रोजमार्टा को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिनके अंतर्गत 320 प्राइवेटकर्मियों से यह काम लिया जाता है। फोकॉम नेट के पास कानपुर व आगरा जोन के करीब 25 जिले हैं, जहां डीएल के कामकाज 120 प्राइवेटकर्मी देखते हैं। हाल ही में फोकॉम नेट प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कर्मचारियों ने शिकायतें दर्ज करवाईं। कहाकि फोकॉम के प्रोजेक्ट मैनेजरों तुषार गर्ग व सुभाष गिरी ने उनसे कम्प्यूटर, वेबकैम व अन्य सिस्टम खरीदवाए। फिर इसका बिल कंपनी के नाम बनवाने का दबाव डाला। मामले को लेकर अमर उजाला ने 12 जनवरी के अंक में 'कर्मचारियों से ही वसूली जा रही उनकी पगार' शीर्षक खबर प्रकाशित की गई थी। इसमें कर्मचारियों से उपकरण खरीदवाने व उनकी पगार एडवांस मांगने का मुद्दा उठाया गया था। इसमें उपकरण खरीदवाने के मामले में निजी एजेंसी को फटकार लगाई गई। प्रोजेक्ट मैनेजरों तुषार गर्ग व सुभाष गिरि बैकफुट पर आ गए हैं तथा कर्मचारियों को उनके कम्प्यूटर, वेबकैम लौटाए जा रहे हैं और कंपनी की ओर से नए कम्प्यूटर लगवाए जा रहे हैं।
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आखिर जांच से क्यों बच रहे अधिकारी
खास बात यह है कि कर्मचारियों से उनकी तनख्वाह का पैसा एडवासं मांगा जा रहा था। यह कहकर की कंपनी की ओर से यही पैसा सैलरी के रूप में दिया जाएगा। ऐसा प्रतिमाह करना होगा। सूत्र बताते हैं कि आगरा जोन में कई प्राइवेटकर्मियों ने सैलरी के 13 हजार रुपये प्रोजेक्ट मैनेजरों को भेजे भी। लेकिन परिवहन विभाग अफसर इस मामले की जांच को लेकर सुस्त पड़े हुए हैं। अपर परिवहन आयुक्त, आईटी सुनीता वर्मा से परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने पूछताछ की, लेकिन जांच को लेकर वह भी संजीदगी नहीं दिखा रही हैं।

मालिकों की शह पर हो रही वसूली
सूत्र बताते हैं कि फोकॉम नेट प्राइवेट लिमिटेड के प्रोजेक्ट मैनेजरों तुषार गर्ग व सुभाष गिरि कर्मचारियों से जो तनख्वाह का पैसा एडवांस वसूलने के लिए दबाव डाल रहे हैं, इसकी जानकारी कंपनी मालिक निलय रॉय को भी है। बावजूद इसके वह प्रोजेक्ट मैनेजरों को शह दे रहे हैं। ऐसे में नाराज प्राइवेटकर्मी मामले को लेकर परिवहन मंत्री से मिलेंगे और आपत्ति दर्ज कराएंगे।

ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाली अब खुद लगा रही कम्प्यूटर, वेबकैम, कर्मियों के सिस्टम लौटाए

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