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अयोध्या में मस्जिद के लिए ट्रस्ट जरूरी, तभी नहीं खड़ा होगा कोई नया विवाद: रिजवी
Sat, 30 Nov 2019 10:01 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 30 Nov 2019 10:01 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : amar ujala
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ऑल इंडिया माइनारिटीज फोरम फॉर डेमोक्र्तेसी के अध्यक्ष और पूर्व कार्यवाहक मुख्यमंत्री डॉ. अम्मार रिजवी ने अयोध्या मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने से असहमति व्यक्त करने वाले संगठनों व व्यक्तियों का स्वागत किया है।
कहा कि जिन लोगों ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को स्वीकार करने की बात कही है और इसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने के विरोधी है वे सभी बधाई के पात्र हैं।
उन्होंने फिर दोहराया कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार, अयोध्या में बनने वाली मस्जिद के निर्माण व देखरेख के लिए भी ट्रस्ट गठित होना चाहिए।
डॉ. रिजवी ने शुक्रवार को यहां जारी बयान में कहा कि उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण कारणों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर मस्जिद के लिए ट्रस्ट बनाने की मांग की है। अयोध्या में किसी नए विवाद की संभावनाओं को खत्म करने के लिए यह जरूरी है।
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कहा कि जिन लोगों ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को स्वीकार करने की बात कही है और इसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने के विरोधी है वे सभी बधाई के पात्र हैं।
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उन्होंने फिर दोहराया कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार, अयोध्या में बनने वाली मस्जिद के निर्माण व देखरेख के लिए भी ट्रस्ट गठित होना चाहिए।
डॉ. रिजवी ने शुक्रवार को यहां जारी बयान में कहा कि उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण कारणों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर मस्जिद के लिए ट्रस्ट बनाने की मांग की है। अयोध्या में किसी नए विवाद की संभावनाओं को खत्म करने के लिए यह जरूरी है।
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उन्होंने कहा कि मस्जिद के लिए दी जाने वाली भूमि पर मस्जिद के अलावा एक विश्वविद्यालय और एक मेडिकल कॉलेज भी बनाया जाना चाहिए। जिससे इस भूमि का इस्तेमाल लोगों के कल्याण के लिए हो सके। इनका भी संचालन मस्जिद के लिए बने ट्रस्ट से ही होना चाहिए।
उन्होंने तर्क दिया कि किसी निजी संस्था या व्यक्ति के जरिये बनने वाली मस्जिद को लेकर फिर ‘मेरी-तेरी’ का विवाद खड़ा हो सकता है जबकि ट्रस्ट के जरिये बनने वाली मस्जिद संपूर्ण मुस्लिम समाज की होगी।
उन्होंने तर्क दिया कि किसी निजी संस्था या व्यक्ति के जरिये बनने वाली मस्जिद को लेकर फिर ‘मेरी-तेरी’ का विवाद खड़ा हो सकता है जबकि ट्रस्ट के जरिये बनने वाली मस्जिद संपूर्ण मुस्लिम समाज की होगी।