{"_id":"69c02376f7ec9ab1db039166","slug":"high-court-s-major-decision-ad-hoc-service-should-also-be-counted-in-employee-promotion-promotion-should-be-2026-03-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: कर्मचारी के प्रमोशन में तदर्थ सेवा भी गिनी जाएं, नियुक्ति तिथि के आधार पर हो पदोन्नति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: कर्मचारी के प्रमोशन में तदर्थ सेवा भी गिनी जाएं, नियुक्ति तिथि के आधार पर हो पदोन्नति
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Sun, 22 Mar 2026 10:44 PM IST
विज्ञापन
सार
Lucknow High Court decision: इस मामले में सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि चूंकि याचियों की सेवाएं उस समय तक नियमित नहीं हुई थीं, इसलिए उन्हें पिछली तिथि से पदोन्नति नहीं दी जा सकती।
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ।
विज्ञापन
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सेवा मामले में दिए एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया विधि सम्मत रही हो और कर्मचारी लगातार सेवा में रहा हो, तो उसकी तदर्थ सेवा को भी पदोन्नति के लिए गिना जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी कर्मचारी से कनिष्ठ कर्मचारी को पदोन्नति मिल चुकी है, तो उसे भी उसी तिथि से पदोन्नति का अधिकार है, भले ही उसकी सेवा का नियमितीकरण बाद में हुआ हो।
Trending Videos
न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने यह फैसला राज्य सरकार की दो विशेष अपीलों को खारिज करके दिया।इस मामले में मूल याची अनिल कुमार और शैलेंद्र सिंह, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। दोनों वर्ष 1986 में जूनियर इंजीनियर के पद पर तदर्थ नियुक्त हुए थे और बाद में उनकी सेवाएं नियमित की गईं।
विज्ञापन
विज्ञापन
मामले में विवाद तब उत्पन्न हुआ जब इनके बाद नियुक्ति पाए कर्मचारियों को सहायक अभियंता पद पर 18 जनवरी 1995 से पदोन्नति दे दी गई, जबकि याचियों को इस लाभ से वंचित रखा गया। पहले, एकल पीठ ने याचियों के पक्ष में फैसला सुनाया था जिसे राज्य सरकार ने विशेष अपील के माध्यम से चुनौती दी।
सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि चूंकि याचियों की सेवाएं उस समय तक नियमित नहीं हुई थीं, इसलिए उन्हें पिछली तिथि से पदोन्नति नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट ने सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि तदर्थ सेवाकाल को भी पदोन्नति के लिए गिना जाएगा।