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दीक्षांत समारोह : रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने किया 'वाइट कोट सिंड्रोम' का जिक्र, बोले- व्यवहार में भी हो हीलिंग
Mon, 13 Jul 2026 01:29 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Mon, 13 Jul 2026 01:29 PM IST
सार
केजीएमयू के दीक्षांत समारोह में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने डॉक्टरों को संबोधित किया और उनसे इलाज में योग और मेडिटेशन को भी शामिल करने की अपील की।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
- फोटो : ANI
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विस्तार
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को केजीएमयू लखनऊ के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में डॉक्टरों से कहा कि आपके द्वारा दी गई दवा के साथ ही आपके व्यवहार में भी हीलिंग होनी चाहिए। कई बार मरीज डॉक्टर को देखकर घबरा जाते हैं। इसे वाइट कोट सिंड्रोम कहते हैं।
उन्होंने दार्शनिक वाल्टेयर के कथन का जिक्र करते हुए कहा कि जीवन की रक्षा करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि जीवन की रचना करना। आपको ये भी ध्यान रखना है कि आपकी चिकित्सा केवल पेशेंट केयर ही न रह जाए ये केयरिंग फार पेशेंट भी रहे।
उन्होंने कहा कि केजीएमयू ने ऐसे दिग्गजों को देश को दिया है जो खुद में इंस्टीट्यूशन है। इस संस्थान से जुड़े लोगों ने सेवा, समर्पण का उदाहरण दिया है। डॉ. अवतार सिंह, डॉ. बलराम भार्गव और डॉ. नरेश त्रेहन जैसे डॉक्टर दिए हैं।
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रक्षामंत्री ने रामचरित मानस के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि राज वैद्य सुषेन ने ये नहीं देखा कि लक्ष्मण जी किस पक्ष के हैं। उन्होंने उनको चिकित्सा सेवा दी। डॉ. सर विलियम हॉकिन्स ने कहा था कि मरीज की बातें बहुत ध्यान से सुनिए इसमें उसका इलाज भी है। उन्होंने डॉक्टरों से इलाज में ध्यान और मेडिटेशन को भी शामिल करने की अपील की।
मरीज को भगवान मानकर इलाज करें
समारोह को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि हमारा प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य सेवा को बढ़ाना चाहिए। मुझे गर्व है कि केजीएमयू ने दुनिया में सर्वोच्च स्थान में पहुंचने में सफलता प्राप्त की है। हमने ये व्यवस्था लागू करवाई कि मरीज का पर्चा बाद में बने पहले उसका इलाज शुरू हो जाए।
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उन्होंने दार्शनिक वाल्टेयर के कथन का जिक्र करते हुए कहा कि जीवन की रक्षा करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि जीवन की रचना करना। आपको ये भी ध्यान रखना है कि आपकी चिकित्सा केवल पेशेंट केयर ही न रह जाए ये केयरिंग फार पेशेंट भी रहे।
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उन्होंने कहा कि केजीएमयू ने ऐसे दिग्गजों को देश को दिया है जो खुद में इंस्टीट्यूशन है। इस संस्थान से जुड़े लोगों ने सेवा, समर्पण का उदाहरण दिया है। डॉ. अवतार सिंह, डॉ. बलराम भार्गव और डॉ. नरेश त्रेहन जैसे डॉक्टर दिए हैं।
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रक्षामंत्री ने रामचरित मानस के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि राज वैद्य सुषेन ने ये नहीं देखा कि लक्ष्मण जी किस पक्ष के हैं। उन्होंने उनको चिकित्सा सेवा दी। डॉ. सर विलियम हॉकिन्स ने कहा था कि मरीज की बातें बहुत ध्यान से सुनिए इसमें उसका इलाज भी है। उन्होंने डॉक्टरों से इलाज में ध्यान और मेडिटेशन को भी शामिल करने की अपील की।
मरीज को भगवान मानकर इलाज करें
समारोह को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि हमारा प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य सेवा को बढ़ाना चाहिए। मुझे गर्व है कि केजीएमयू ने दुनिया में सर्वोच्च स्थान में पहुंचने में सफलता प्राप्त की है। हमने ये व्यवस्था लागू करवाई कि मरीज का पर्चा बाद में बने पहले उसका इलाज शुरू हो जाए।