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लखनऊ: रंग लाई अमर उजाला की मुहिम, बेटियों को वापस मिला स्कूल; एडीएम ने वापस लिया अपना आदेश
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Wed, 10 Jun 2026 07:48 PM IST
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सार
Vidya Balika Girls High School: इस मुद्दे को अमर उजाला ने पहले दिन से प्रमुखता से उठाया था। जबकि सरकार की ओर से सहायता प्राप्त विद्यालय पर इस तरह से कोई कब्जा नहीं कर सकता है।
खोला गया स्कूल का ताला।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
अमर उजाला की मुहिम आखिरकार रंग लाई और हजरतगंज नरही स्थित विद्या बालिका गर्ल्स हाईस्कूल बुधवार की दोपहर में बेटियों को वापस मिल गया। बड़ी बात ये है कि महज छह दिनों में ही हजरतगंज थाने की उसी पुलिस को ताला खुलवाना पड़ा जिस पुलिस ने बीते 4 जून को एडीएम कोर्ट का हवाला देकर दिन दहाड़े विपक्षी पार्टी को कब्जा दे दिया था। इसके बाद अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था।
दूसरी ओर विद्यालय खुलने की खुशी में पहुंचे विद्यार्थी और शिक्षकों ने दोपहर तक गेट पर पर इंतजार किया। इस दौरान हजरतगंज पुलिस प्रबंधक संतोष रस्तोगी ने पुलिस को कई बार फोन किया तब पुलिस ने दोपहर डेढ़ बजे ताला खुलवाया। इस दौरान पुलिस कर्मियों ने अपनी फजिहत होते देख मीडिया कर्मियों को भी भगाने का प्रयास किया।
बता दें कि एडीएम पूर्वी कोर्ट के आदेश का हवाला देकर बीते चार जून को हजरतगंज पुलिस ने दोपहर में विद्यालय को खाली करवाकर कब्जा विपक्षी पार्टी को दे दिया था। इसके बाद 250 बेटियों की पढ़ाई पर संकट आ गया था। इस मुद्दे को अमर उजाला ने पहले दिन से प्रमुखता से उठाया था। जबकि सरकार की ओर से सहायता प्राप्त विद्यालय पर इस तरह से कोई कब्जा नहीं कर सकता है। उसके बाद भी एडीएम की ओर से आदेश दिया गया। आदेश से पहले एडीएम की लापरवाही ये रही कि माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पक्ष रखने के लिए भी नहीं बुलाया गया था। एकतरफा आदेश के चलते जिस तरह से विद्यालय कब्जाया गया था उसे जुड़े हर बिंदु को उठाया गया।
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मौके पर नहीं मिला पूरा सामान
विद्यालय खुला , लेकिन मौके पर पूरा सामान नहीं मिला। जबकि मैदान में पहले दिन पंखे अलमारी, विद्यालय से जुड़े दस्तावेज पड़े हुए थे। आशंका है कि विद्यालय के दस्तावेजों से छेड़छाड़ की गई है।
दबंगों ने तोड़ा फर्नीचर, बोर्ड उखाड़ा, ऑफिस तोड़ा
गेट खुलने के बाद अंदर फर्नीचर टूटा हुआ मिला है। वहीं विद्यालय का बोर्ड भी गायब है। प्रबधंक ने इस संबंध में पुलिस से जानकारी मांगी पुलिस कुछ जवाब नहीं दे सकी है। प्रधानाचार्य कक्ष भी तोड़ दिया गया है। प्रबंधक के मुताबिक विद्यालय में लाखों रुपयों का नुकसान किया गया है।
एडीएम को आना पड़ा बैकफुट पर
अमर उजाला की ओर से प्रमुखता से मुद्दे को उठाए जाने के बाद इस मामले में एडीएम पूर्वी का बीते 21 अप्रैल का अपना ही आदेश पलटना पड़ा। इसके बाद हजरतगंज पुलिस को वापस विद्यालय प्रबंधक को कब्जा दिलाए जाने का आदेश दिया गया।
एडीएम के आदेश के बाद भी दिखी पुलिस की लापरवाही
एडीएम के आदेश के बाद भी हजरतगंज पुलिस की लापरवाही दिखी। दो पहले एडीएम ने प्रबंधक को कब्जा दिलाने का आदेश हजरतगंज पुलिस को दिया था, लेकिन पुलिस बुधवार की दोपहर तक हीलाहवाली करती रही। हजरतगंज थाना प्रभारी विक्रम सिंह प्रक्रिया का ही हवाला देते रहे।
8 जून को जारी आदेश में एडीएम ने कहा
8 जून को अपर जिला अधिकारी नगर पूर्वी की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से प्रस्तुत प्रार्थनापत्र को देखने के बाद न्यायालय की ओर से वाद संख्या डी-202510460002316 धारा 36 (2) नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम के तहत पारित आदेश 21 अप्रैल 2026 स्थगित किया जाता है। एडीएम के आदेश में कहा गया कि यदि कब्जा हस्तगत करा दिया गया है तो पूर्व की भांति विद्यालय प्रबंधन को तत्काल कब्जा दिलाकर न्यायालय को पूरी रिपोर्ट दें। आदेश में ये भी कहा कि तत्काल कब्जा इसलिए दिलाया जाए ताकि छात्राओं की पढ़ाई न प्रभावित हो।
बंद नहीं हो सकता है विद्यालय
इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधिकारियों कहना है कि जिस भवन में विद्यालय चल रहा है उसी भवन पर मान्यता दी गई है। शिक्षकों को वेतन भी सरकार दे रही है। ऐसे में विद्यालय बिना निदेशक की अनुमति के नहीं बंद किया जा सकता है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश शैक्षिक संस्थायें अधिनियम 1974 कहता है कि प्रत्येक संस्था की शुरुआत होने के दिन से संस्था निदेशक के अधीन हो जाती है। उसके बाद तभी कुछ हो सकता है जबतक निदेशक की अनुमति न हो।
दूसरी ओर विद्यालय खुलने की खुशी में पहुंचे विद्यार्थी और शिक्षकों ने दोपहर तक गेट पर पर इंतजार किया। इस दौरान हजरतगंज पुलिस प्रबंधक संतोष रस्तोगी ने पुलिस को कई बार फोन किया तब पुलिस ने दोपहर डेढ़ बजे ताला खुलवाया। इस दौरान पुलिस कर्मियों ने अपनी फजिहत होते देख मीडिया कर्मियों को भी भगाने का प्रयास किया।
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बता दें कि एडीएम पूर्वी कोर्ट के आदेश का हवाला देकर बीते चार जून को हजरतगंज पुलिस ने दोपहर में विद्यालय को खाली करवाकर कब्जा विपक्षी पार्टी को दे दिया था। इसके बाद 250 बेटियों की पढ़ाई पर संकट आ गया था। इस मुद्दे को अमर उजाला ने पहले दिन से प्रमुखता से उठाया था। जबकि सरकार की ओर से सहायता प्राप्त विद्यालय पर इस तरह से कोई कब्जा नहीं कर सकता है। उसके बाद भी एडीएम की ओर से आदेश दिया गया। आदेश से पहले एडीएम की लापरवाही ये रही कि माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पक्ष रखने के लिए भी नहीं बुलाया गया था। एकतरफा आदेश के चलते जिस तरह से विद्यालय कब्जाया गया था उसे जुड़े हर बिंदु को उठाया गया।
मौके पर नहीं मिला पूरा सामान
विद्यालय खुला , लेकिन मौके पर पूरा सामान नहीं मिला। जबकि मैदान में पहले दिन पंखे अलमारी, विद्यालय से जुड़े दस्तावेज पड़े हुए थे। आशंका है कि विद्यालय के दस्तावेजों से छेड़छाड़ की गई है।
दबंगों ने तोड़ा फर्नीचर, बोर्ड उखाड़ा, ऑफिस तोड़ा
गेट खुलने के बाद अंदर फर्नीचर टूटा हुआ मिला है। वहीं विद्यालय का बोर्ड भी गायब है। प्रबधंक ने इस संबंध में पुलिस से जानकारी मांगी पुलिस कुछ जवाब नहीं दे सकी है। प्रधानाचार्य कक्ष भी तोड़ दिया गया है। प्रबंधक के मुताबिक विद्यालय में लाखों रुपयों का नुकसान किया गया है।
एडीएम को आना पड़ा बैकफुट पर
अमर उजाला की ओर से प्रमुखता से मुद्दे को उठाए जाने के बाद इस मामले में एडीएम पूर्वी का बीते 21 अप्रैल का अपना ही आदेश पलटना पड़ा। इसके बाद हजरतगंज पुलिस को वापस विद्यालय प्रबंधक को कब्जा दिलाए जाने का आदेश दिया गया।
एडीएम के आदेश के बाद भी दिखी पुलिस की लापरवाही
एडीएम के आदेश के बाद भी हजरतगंज पुलिस की लापरवाही दिखी। दो पहले एडीएम ने प्रबंधक को कब्जा दिलाने का आदेश हजरतगंज पुलिस को दिया था, लेकिन पुलिस बुधवार की दोपहर तक हीलाहवाली करती रही। हजरतगंज थाना प्रभारी विक्रम सिंह प्रक्रिया का ही हवाला देते रहे।
8 जून को जारी आदेश में एडीएम ने कहा
8 जून को अपर जिला अधिकारी नगर पूर्वी की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से प्रस्तुत प्रार्थनापत्र को देखने के बाद न्यायालय की ओर से वाद संख्या डी-202510460002316 धारा 36 (2) नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम के तहत पारित आदेश 21 अप्रैल 2026 स्थगित किया जाता है। एडीएम के आदेश में कहा गया कि यदि कब्जा हस्तगत करा दिया गया है तो पूर्व की भांति विद्यालय प्रबंधन को तत्काल कब्जा दिलाकर न्यायालय को पूरी रिपोर्ट दें। आदेश में ये भी कहा कि तत्काल कब्जा इसलिए दिलाया जाए ताकि छात्राओं की पढ़ाई न प्रभावित हो।
बंद नहीं हो सकता है विद्यालय
इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधिकारियों कहना है कि जिस भवन में विद्यालय चल रहा है उसी भवन पर मान्यता दी गई है। शिक्षकों को वेतन भी सरकार दे रही है। ऐसे में विद्यालय बिना निदेशक की अनुमति के नहीं बंद किया जा सकता है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश शैक्षिक संस्थायें अधिनियम 1974 कहता है कि प्रत्येक संस्था की शुरुआत होने के दिन से संस्था निदेशक के अधीन हो जाती है। उसके बाद तभी कुछ हो सकता है जबतक निदेशक की अनुमति न हो।