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लखनऊ अग्निकांड: हैरान करने वाली सभी 15 मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, किसी की भी जान आग से झुलसने से नहीं गई

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Wed, 24 Jun 2026 07:50 AM IST
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सार

15 dead in Lucknow fire: लखनऊ में सोमवार को हुए दर्दनाक अग्निकांड में 15 लोगों की जान चली गई थी। इन सभी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई है। 
 

Lucknow fire tragedy: Postmortem report of all 15 deceased shocking, none died due to burn injuries
लखनऊ अग्निकांड। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

अलीगंज एनीमेशन सेंटर हादसे में 15 लोगों की मौत दम घुटने से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने इसका जिक्र किया है। डॉक्टरों का कहना है कि मृतकों के शरीर पर ऐसी कोई गंभीर चोट नहीं मिली है, जिससे मौत का सीधा कारण हादसे में लगी चोट माना जा सके। डॉक्टरों का कहना है मृतकों के शरीर पर गहरे घाव या बड़ी चोट के निशान नहीं दिखाई दिए हैं। इसके अलावा आग में झुलसने या शरीर के जलने जैसे स्पष्ट प्रमाण भी नहीं मिले हैं। हालांकि कई मृतकों के चेहरे और आंखों के आसपास सूजन मिली है। 



वहीं नाक के अंदर कालिख और धुएं के कण पाए गए हैं। डॉक्टरों ने बताया धुएं के कारण दम घुटने से सभी की जान गई है। डॉक्टरों ने जांच अधिकारियों को पोस्टमार्टम और मेडिकल परीक्षण के दौरान मिले इन तथ्यों की जानकारी दी है। टीम को बताया गया कि बंद जगह में आग या धुएं की स्थिति बनने पर ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैसों के प्रभाव से दम घुट सकता है। कई बार ऐसी स्थिति में व्यक्ति को बाहर निकलने का मौका भी नहीं मिल पाता है। धुंए के कारण युवक-युवतियां बेहोश भी हुए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना बताया गया है।

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धुआं, जहरीली गैसें रोक देती हैं सांस

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लखनऊ की कोचिंग सेंटर में हादसा। - फोटो : अमर उजाला।

आग लगने की घटनाओं में कई बार लपटों से ज्यादा मौत का कारण धुएं में मौजूद जहरीली गैसें बनती हैं। बंद जगह में धुआं भरने से ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। भीतर फंसे लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाता है। प्लास्टिक, फोम और सिंथेटिक सामान जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन साइनाइड जैसी जहरीली गैसें निकल सकती हैं। कार्बन मोनोऑक्साइड शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता को प्रभावित कर बेहोशी और मौत का कारण बन सकती है।

 बिना बिजली ऑडिट इमारत में लंबे समय से चल रहा था कारोबार

अलीगंज सेक्टर डी स्थित जिस चार मंजिला इमारत में सोमवार को आग लगी, उसमें वर्षों से व्यावसायिक गतिविधियां चल रही थीं। बावजूद इसके बिल्डिंग के मालिक व संबंधित प्रतिष्ठानों के संचालकों ने बिजली विभाग से ऑडिट नहीं कराया था। अग्निकांड के पीछे यह बड़ी वजह भी सामने आई है।

दमकल विभाग के मानक अनुसार व्यावसायिक इमारतों, अपार्टमेंटों में हर तीन वर्ष में बिजली विभाग से ऑडिट कराना चाहिए। इससे बिजली पर बढ़ते भार और अन्य खामियों का समय से पता चल जाता है। हालांकि, अलीगंज की इमारत के मालिक व यहां चल रहे प्रतिष्ठान के मालिकों ने चंद रुपये बचाने के लिए कभी ऑडिट ही नहीं कराया। यह लापरवाही तब बरती गई जब हैक्सार स्टूडियो में रोजाना 40 से 50 लोगों का आना-जाना लगा रहता था।

...इसलिए कराना चाहिए बिजली ऑडिट
शहर में तमाम अपार्टमेंट दशकों पुराने हैं। इनमें वायरिंग भी उसी समय की होती है। इस बीच तार पर बढ़ने वाले लोड का पता ही नहीं चल पाता। ओवरलोडिंग और उपकरणों का गलत इस्तेमाल शॉर्ट सर्किट का बड़ा कारण बनता है, जिससे आग लगती है। इस कारण हर तीन वर्ष में बिजली ऑडिट कराना चाहिए।

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ट्रॉमा में भर्ती जयंत की हालत गंभीर, लवप्रीत में सुधार

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लखनऊ कोचिंग सेंटर में आग। - फोटो : अमर उजाला।

 अलीगंज के कोचिंग सेंटर में सोमवार दोपहर अचानक लगी आग की लपटों में घिरे जयंत गुप्ता को बचने का कोई रास्ता नहीं सूझा तो वह दूसरी मंजिल से कूद पड़े। उनकी जान तो बच गई पर हाथ झुलस गए। जयंत जनरेटर पर गिरे थे, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी भी टूट गई। हालत गंभीर होने के कारण उन्हें ट्रॉमा सेंटर की आईसीयू में रखा गया है। उधर, ट्रॉमा सेंटर में भर्ती दिल्ली निवासी लवप्रीत कौर को मामूली चोटें आई हैं। डॉक्टरों के मुताबिक जल्द उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।

ऐशबाग की एलडीए कॉलोनी निवासी प्रदीप गुप्ता ने बताया कि उनका इकलौता बेटा जयंत सेंटर में एनीमेशन ट्रेनर था। हादसे के दौरान उसका मोबाइल फोन कहीं गिर गया। ट्रॉमा सेंटर पहुंचने के बाद जयंत ने मुंशीपुलिया निवासी दोस्त मयंक सिंह को हादसे की जानकारी दी। मयंक ने प्रदीप गुप्ता को फोन कर ट्रॉमा बुलाया। प्रदीप छह वर्ष पहले पीडब्ल्यूडी विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनकी पत्नी मीना कुमारी का चार वर्ष पहले निधन हो चुका है। घर में पिता-पुत्र ही हैं। प्रदीप ने बताया कि जयंत बीए की पढ़ाई भी कर रहा है। वह इसी वर्ष उसकी शादी की तैयारी कर रहे थे।

सीएमएस डॉ. प्रेमराज सिंह ने बताया कि जयंत के इलाज के लिए न्यूरो सर्जरी और हड्डी रोग विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम लगाई गई है। जांच रिपोर्ट और मरीज की स्थिति के आधार पर तय होगा कि ऑपरेशन करना होगा या दवाओं से ही सुधार आ जाएगा। इलाज पूरी तरह निशुल्क किया जा रहा है।

कोचिंग संस्थानों की जांच के लिए चार टीमें गठित

अलीगंज अग्निकांड के बाद उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी भी नींद से जागे हैं। विभाग ने मंगलवार को चार सदस्यों वाली चार जांच कमेटियां गठित की हैं। ये टीमें बुधवार से जांच शुरू कर देंगी। इस दौरान जिस कोचिंग के मानक पूरे नहीं मिलेंगे उनका पंजीकरण निरस्त किया जाएगा। इस बारे में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहीं प्रो. सुमन ने बताया कि कमेटियों को एक सप्ताह में जांच पूरी करने के लिए कहा गया है। इनमें विभिन्न महाविद्यालयों के प्रोफेसरों को शामिल किया गया है। ये टीमें उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अधिनियम, 2002 व केंद्र सरकार की ओर से जारी कोचिंग सेंटर गाइडलाइंस 2024 के मानकों को परखेंगी।

स्कूलों में भी परखी जाएगी बच्चों के लिए सुरक्षा व्यवस्था

बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग भी निजी व सरकारी विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को परखेगा। इस संबंध में संयुक्त शिक्षा माध्यमिक डॉ. प्रदीप कुमार ने मंगलवार को लखनऊ, सीतापुर, लखीमपुर, हरदोई, रायबरेली, उन्नाव के जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश जारी करके कहा है कि एक जुलाई को विद्यालय खुलने से पहले बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को परखा जाए। दूसरी ओर मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक श्याम किशोर तिवारी ने भी सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था जांचने के लिए निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि स्कूल कॉलेजों में फायर ब्रिगेड की एनओसी का नवीनीकरण नहीं पाया जाता है तो मान्यता तक निरस्त की जा सकती है।

अग्निकांड की वजह जानने के लिए जुटाए साक्ष्य

 अलीगंज सेक्टर-डी स्थित बिल्डिंग में सोमवार को हुए अग्निकांड मामले में मंगलवार की सुबह एसआईटी के पहुंचने से पहले फाॅरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए। फॉरेंसिक टीम आग लगने के कारणों की जांच कर रही है। छानबीन में प्रथमदृष्टया शॉर्ट सर्किट से आग लगने के संकेत मिले हैं।

अग्निकांड मामले की विवेचना अलीगंज थाने के अतिरिक्त निरीक्षक को सौंपी गई है। पुलिस ने सोमवार को ही चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था बबलू कुमार ने बताया कि घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य संकलित किए गए हैं। छह नामजद और अन्य अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

इनमें भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ला, एनिमेशन सेंटर के संचालक तुषांक कृष्ण जायसवाल, पेटशॉप के मालिक रामकृष्ण उपाध्याय, नेटवर्किंग का काम करने वाले सुरेश कुमार, धीरेंद्र शुक्ला, सुरेंद्र शुक्ला व अन्य शामिल हैं। इनमें चार आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई। इसके बाद मंगलवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें जेल भेज दिया। वीरेंद्र के परिवार के धीरेंद्र और सुरेंद्र की तलाश में दो टीमें गठित की गई हैं। दोनों को गिरफ्तार करने के लिए संभावित स्थानों पर दबिश दी जा रही है।

इन बिंदुओं पर चल रही है जांच

पुलिस भवन संचालन, अग्नि सुरक्षा उपायों, फायर एनओसी, बिजली कनेक्शन व अन्य अनुमतियों के बारे में जांच कर रही है। इसके लिए एलडीए, फायर ब्रिगेड, बिजली विभाग, शिक्षा विभाग, विद्युत निदेशालय समेत अन्य विभागों से तकनीकी एवं अभिलेखीय रिपोर्ट मांगी गई है। सभी आरोपियों पर उनका उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाएगा। जेसीपी का कहना है कि इस मामले में जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।

पूरी रात होता रहा पोस्टमार्टम
शवों की पहचान के बाद पुलिस ने पहले परिजनों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद शासन के निर्देश पर सोमवार रात में ही शवों के पोस्टमार्टम शुरू कर दिए गए। मंगलवार तड़के तक सभी शवों के पोस्टमार्टम का काम पूरा हो गया। इसके बाद परिजनों को शव सौंप दिए गए। मृतकों के परिवार वालों को प्रशासन की ओर से सहायता राशि देने का काम भी जारी है।

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