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Lucknow News: डीआरएम स्टेशन पर कर रहे थे पूछताछ, फिर भरभराकर गिरा छत का हिस्सा
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लखनऊ जंक्शन का मामला
प्रतीक्षालय विस्तार के लिए हो रही तोड़फोड़ से गिरी थी छत
200 यात्री थे मैाजूद, टल गया था हादसा, मामले की जांच शुरू
लखनऊ। लखनऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार को डीआरएम छत गिरने के मामले में पूछताछ कर रहे थे। इसी बीच छत का बचा हुआ हिस्सा भरभराकर गिर गया। हालांकि डीआरएम उस वक्त हादसे की जगह पर नहीं थे। छत गिरने के मामले की जांच पूर्वोत्तर रेलवे मुख्यालय के प्रमुख मुख्य संरक्षा अधिकारी की देखरेख में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा शुरू कर दी गई है।
पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के लखनऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर मुख्य प्रवेशद्वार के पास महिला प्रतीक्षालय है। उसके ऊपरी मंजिल पर एसी वेटिंग रूम है। महिला प्रतीक्षालय के विस्तार के लिए गत दिवस तोड़फोड़ कार्य चल रहे थे। दीवार व पिलर तोड़ने के दैारान छत ढह गई थी। हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ था। उस दैारान प्रतीक्षालयों में 200 यात्री थे, जिन्हें सकुशल निकाल लिया गया था। दुर्घटना के बाद डीआरएम गैारव अग्रवाल ने संजीदगी दिखाई। शुक्रवार सुबह आला अफसरों के साथ मैाके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया। हादसे को लेकर रेलकर्मियों, ठेकेदार व अन्य कर्मियों से पूछताछ की। वह लगातार मैाके पर डटे रहे। इतना ही नहीं वह स्टेशन पर मैाजूद थे और जांच से संबंधित कार्य कर रहे थे। इसी बीच ढही छत का बचा हुआ हिस्सा भी भरभराकर गिर गया। हालांकि उस दैारान मैाके पर कोई नहीं था, इससे हादसा टल गया। देर शाम तक डीआरएम पड़ताल करते रहे।
मुख्यालय भी हुआ एक्टिव, किया निरीक्षण
लखनऊ जंक्शन स्टेशन पर छत ढह जाने के मामले में शुक्रवार को गोरखपुर स्थित पूर्वोत्तर रेलवे मुख्यालय के अफसर भी एक्टिव हो गए। प्रमुख मुख्य संरक्षा अधिकारी की देखरेख में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ घटना को लेकर संयुक्त निरीक्षण किया। रेलकर्मियों आदि से पूछताछ की।
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बिल्डिंग इंजीनियरिंग से हुई छेड़छाड़
सूत्र बताते हैं कि लखनऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन पुराना भवन है। महिला प्रतीक्षालय का विस्तार किया जा रहा था। इसके लिए दीवार व पिलर तोड़ जा रहे थे। खास बात यह है कि तोड़फोड़ से पहले बिल्डिंग की इंजीनियरिंग को समझने का प्रयास ठेकेदार व रेलवे अधिकारियों की ओर से नहीं किया गया। चूंकि छत दीवार व पिलर पर ही टिकी थी, इसलिए भरभराकर गिर गई।
प्रतीक्षालय बंद, भटकते रहे यात्री, नहीं मिली राहत
महिला प्रतीक्षा का विस्तार हो रहा था। पहली मंजिल पर एसी वेटिंग मिलाकर तीन प्रतीक्षालय थे, जिन्हें हादसे के बाद बंद कर दिया गया। शुक्रवार को स्टेशन पर यात्री गर्मी में परेशान भटकते नजर आए। प्रतीक्षालय बंद होने से उन्हें प्लेटफॅार्मों पर बैठकर ट्रेन का इंतजार करना पड़ा। आने वाले दिनों में भी राहत की उम्मीद मिलती नहीं दिख रही है।
प्रतीक्षालय विस्तार के लिए हो रही तोड़फोड़ से गिरी थी छत
200 यात्री थे मैाजूद, टल गया था हादसा, मामले की जांच शुरू
लखनऊ। लखनऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार को डीआरएम छत गिरने के मामले में पूछताछ कर रहे थे। इसी बीच छत का बचा हुआ हिस्सा भरभराकर गिर गया। हालांकि डीआरएम उस वक्त हादसे की जगह पर नहीं थे। छत गिरने के मामले की जांच पूर्वोत्तर रेलवे मुख्यालय के प्रमुख मुख्य संरक्षा अधिकारी की देखरेख में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा शुरू कर दी गई है।
पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के लखनऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर मुख्य प्रवेशद्वार के पास महिला प्रतीक्षालय है। उसके ऊपरी मंजिल पर एसी वेटिंग रूम है। महिला प्रतीक्षालय के विस्तार के लिए गत दिवस तोड़फोड़ कार्य चल रहे थे। दीवार व पिलर तोड़ने के दैारान छत ढह गई थी। हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ था। उस दैारान प्रतीक्षालयों में 200 यात्री थे, जिन्हें सकुशल निकाल लिया गया था। दुर्घटना के बाद डीआरएम गैारव अग्रवाल ने संजीदगी दिखाई। शुक्रवार सुबह आला अफसरों के साथ मैाके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया। हादसे को लेकर रेलकर्मियों, ठेकेदार व अन्य कर्मियों से पूछताछ की। वह लगातार मैाके पर डटे रहे। इतना ही नहीं वह स्टेशन पर मैाजूद थे और जांच से संबंधित कार्य कर रहे थे। इसी बीच ढही छत का बचा हुआ हिस्सा भी भरभराकर गिर गया। हालांकि उस दैारान मैाके पर कोई नहीं था, इससे हादसा टल गया। देर शाम तक डीआरएम पड़ताल करते रहे।
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मुख्यालय भी हुआ एक्टिव, किया निरीक्षण
लखनऊ जंक्शन स्टेशन पर छत ढह जाने के मामले में शुक्रवार को गोरखपुर स्थित पूर्वोत्तर रेलवे मुख्यालय के अफसर भी एक्टिव हो गए। प्रमुख मुख्य संरक्षा अधिकारी की देखरेख में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ घटना को लेकर संयुक्त निरीक्षण किया। रेलकर्मियों आदि से पूछताछ की।
बिल्डिंग इंजीनियरिंग से हुई छेड़छाड़
सूत्र बताते हैं कि लखनऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन पुराना भवन है। महिला प्रतीक्षालय का विस्तार किया जा रहा था। इसके लिए दीवार व पिलर तोड़ जा रहे थे। खास बात यह है कि तोड़फोड़ से पहले बिल्डिंग की इंजीनियरिंग को समझने का प्रयास ठेकेदार व रेलवे अधिकारियों की ओर से नहीं किया गया। चूंकि छत दीवार व पिलर पर ही टिकी थी, इसलिए भरभराकर गिर गई।
प्रतीक्षालय बंद, भटकते रहे यात्री, नहीं मिली राहत
महिला प्रतीक्षा का विस्तार हो रहा था। पहली मंजिल पर एसी वेटिंग मिलाकर तीन प्रतीक्षालय थे, जिन्हें हादसे के बाद बंद कर दिया गया। शुक्रवार को स्टेशन पर यात्री गर्मी में परेशान भटकते नजर आए। प्रतीक्षालय बंद होने से उन्हें प्लेटफॅार्मों पर बैठकर ट्रेन का इंतजार करना पड़ा। आने वाले दिनों में भी राहत की उम्मीद मिलती नहीं दिख रही है।