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Lucknow News: ट्रेनों के संचालन को और सुरक्षित बनाने को खर्च होंगे 268.96 करोड़
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ट्रेनों के संचालन को और सुरक्षित बनाने को खर्च होंगे 268.96 करोड़
उत्तर रेलवे 29 स्टेशनों पर होगा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का काम
ट्रेनों की गति में आएगा सुधार
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। आवागमन को और सुरक्षित व गति में सुधार को लेकर रेल मंत्रालय उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में आने वाले 29 स्टेशनों पर कवच प्रणाली के तहत इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का काम कराएगा। जिस पर 268.96 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। जिन स्टेशनों पर यह काम होगा उनमें लखनऊ, बाराबंकी, आलमनगर, कानपुर ब्रिज, उन्नाव, ऊंचाहार, सुल्तानपुर, जाफराबाद व वाराणसी आदि शामिल हैं।
उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली का मुख्य उद्देश्य रेल को विकसित स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली 'कवच' से और अधिक सुदृढ़ बनाना है। इससे ट्रेनों की गति में सुधार आएगा। यह आधुनिक प्रणाली मैन्युअल हस्तक्षेप को कम करेगी। जिससे ट्रेनों का संचालन सुरक्षित और अधिक सटीक हो सकेगा। यह स्टेशनों पर ट्रेनों के सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस तकनीक के आने से ट्रेनों की गति सीमा में सुधार होगा और मानवीय त्रुटियों की संभावना लगभग शून्य हो जाएगी। यह निवेश भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण के दीर्घकालिक लक्ष्य का हिस्सा है, जिससे यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनुभव प्राप्त हो सके।
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उत्तर रेलवे 29 स्टेशनों पर होगा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का काम
ट्रेनों की गति में आएगा सुधार
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। आवागमन को और सुरक्षित व गति में सुधार को लेकर रेल मंत्रालय उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में आने वाले 29 स्टेशनों पर कवच प्रणाली के तहत इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का काम कराएगा। जिस पर 268.96 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। जिन स्टेशनों पर यह काम होगा उनमें लखनऊ, बाराबंकी, आलमनगर, कानपुर ब्रिज, उन्नाव, ऊंचाहार, सुल्तानपुर, जाफराबाद व वाराणसी आदि शामिल हैं।
उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली का मुख्य उद्देश्य रेल को विकसित स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली 'कवच' से और अधिक सुदृढ़ बनाना है। इससे ट्रेनों की गति में सुधार आएगा। यह आधुनिक प्रणाली मैन्युअल हस्तक्षेप को कम करेगी। जिससे ट्रेनों का संचालन सुरक्षित और अधिक सटीक हो सकेगा। यह स्टेशनों पर ट्रेनों के सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस तकनीक के आने से ट्रेनों की गति सीमा में सुधार होगा और मानवीय त्रुटियों की संभावना लगभग शून्य हो जाएगी। यह निवेश भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण के दीर्घकालिक लक्ष्य का हिस्सा है, जिससे यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनुभव प्राप्त हो सके।
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