{"_id":"6abfa98f32f25b147004bbb2","slug":"lucknow-news-lucknow-news-c-13-1-mbd1026-1947692-2026-10-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: 514 दिन लंबित विवेचना पर दंड पाने वाले दरोगा को राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: 514 दिन लंबित विवेचना पर दंड पाने वाले दरोगा को राहत
विज्ञापन
लोक सेवा अधिकरण ने दंडादेश और अपीलीय आदेश निरस्त किए, तीन माह में सभी रोके गए सेवा लाभ देने के निर्देश
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। थाना सोरांव में तैनाती के दौरान 514 दिन तक विवेचना लंबित रखने के मामले में दंडित उपनिरीक्षक विवेक कुमार यादव को उत्तर प्रदेश लोक सेवा अधिकरण ने राहत दी है। अधिकरण ने उनके खिलाफ पारित 29 अगस्त 2025 के दंडादेश और 27 दिसंबर 2025 के अपीलीय आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही रोके गए सभी परिणामी सेवा लाभ तीन माह के भीतर देने का निर्देश दिया है।
मामला थाना सोरांव, कमिश्नरेट प्रयागराज में दर्ज मुकदमा संख्या 870/2020 से जुड़ा था। इसमें धारा 419, 420, 406, 504 और 506 भादवि के तहत विवेचना उपनिरीक्षक विवेक कुमार यादव को सौंपी गई थी। प्रारंभिक जांच में विवेचना के निस्तारण में रुचि नहीं लेने, उसे 514 दिन तक लंबित रखने और पर्यवेक्षण पेशी के लिए संबंधित पत्रावली उपलब्ध नहीं कराने का दोषी पाया गया था। इसके आधार पर उनकी सेवा पुस्तिका में परिनिंदा प्रविष्टि की गई थी।
अधिकरण की सदस्य न्यायिक अनिता राज ने पाया कि दंडादेश में उपनिरीक्षक के स्पष्टीकरण में उठाए गए बिंदुओं पर कोई स्पष्ट विचार या टिप्पणी नहीं की गई। आदेश में यह भी नहीं बताया गया कि उनका स्पष्टीकरण किन आधारों पर कमजोर या अस्वीकार्य पाया गया। ऐसे में आदेश को मुखरित और सकारण नहीं माना जा सकता।
विज्ञापन
अधिकरण ने कहा कि दंडादेश में कारण दर्ज करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी आधार पर 29 अगस्त 2025 का मूल दंडादेश और उसके आधार पर पारित 27 दिसंबर 2025 का अपीलीय आदेश निरस्त कर दिया गया। अधिकारियों को प्रमाणित प्रति मिलने के तीन माह के भीतर उपनिरीक्षक के रोके गए सभी परिणामी सेवा लाभ देने का निर्देश दिया गया है।
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। थाना सोरांव में तैनाती के दौरान 514 दिन तक विवेचना लंबित रखने के मामले में दंडित उपनिरीक्षक विवेक कुमार यादव को उत्तर प्रदेश लोक सेवा अधिकरण ने राहत दी है। अधिकरण ने उनके खिलाफ पारित 29 अगस्त 2025 के दंडादेश और 27 दिसंबर 2025 के अपीलीय आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही रोके गए सभी परिणामी सेवा लाभ तीन माह के भीतर देने का निर्देश दिया है।
मामला थाना सोरांव, कमिश्नरेट प्रयागराज में दर्ज मुकदमा संख्या 870/2020 से जुड़ा था। इसमें धारा 419, 420, 406, 504 और 506 भादवि के तहत विवेचना उपनिरीक्षक विवेक कुमार यादव को सौंपी गई थी। प्रारंभिक जांच में विवेचना के निस्तारण में रुचि नहीं लेने, उसे 514 दिन तक लंबित रखने और पर्यवेक्षण पेशी के लिए संबंधित पत्रावली उपलब्ध नहीं कराने का दोषी पाया गया था। इसके आधार पर उनकी सेवा पुस्तिका में परिनिंदा प्रविष्टि की गई थी।
विज्ञापन
अधिकरण की सदस्य न्यायिक अनिता राज ने पाया कि दंडादेश में उपनिरीक्षक के स्पष्टीकरण में उठाए गए बिंदुओं पर कोई स्पष्ट विचार या टिप्पणी नहीं की गई। आदेश में यह भी नहीं बताया गया कि उनका स्पष्टीकरण किन आधारों पर कमजोर या अस्वीकार्य पाया गया। ऐसे में आदेश को मुखरित और सकारण नहीं माना जा सकता।
विज्ञापन
अधिकरण ने कहा कि दंडादेश में कारण दर्ज करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी आधार पर 29 अगस्त 2025 का मूल दंडादेश और उसके आधार पर पारित 27 दिसंबर 2025 का अपीलीय आदेश निरस्त कर दिया गया। अधिकारियों को प्रमाणित प्रति मिलने के तीन माह के भीतर उपनिरीक्षक के रोके गए सभी परिणामी सेवा लाभ देने का निर्देश दिया गया है।