सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Lucknow: No decision on PIL to study the structure found in Gyanvapi, order to be listed on July 4

लखनऊ : ज्ञानवापी में मिले ढांचे के अध्ययन की पीआईएल पर नहीं आया फैसला, चार जुलाई को सूचीबद्ध करने का आदेश

संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 14 Jun 2022 12:14 AM IST
विज्ञापन
सार

याचियों ने कोर्ट से आग्रह किया कि  ऐसे में संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिया जाए कि ढांचे का अध्ययन करने को सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के वर्तमान या सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में आयोग या समिति गठित की जाए और इसकी रिपोर्ट के मुताबिक कारवाई की जाए।

Lucknow: No decision on PIL to study the structure found in Gyanvapi, order to be listed on July 4
लखनऊ हाईकोर्ट
विज्ञापन

विस्तार

वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर में मिले ढांचे में शिवलिंग होने या फिर इसके फव्वारा होने के दावों का पता लगाने को इसके इसका अध्ययन के लिए आयोग/समिति बनाने की गुजारिश वाली जनहित याचिका पर सोमवार को फैसला नही सुनाया जा सका। कोर्ट ने मामले को  इसकी सुनवाई करने वाली खंडपीठ के समक्ष चार जुलाई को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। यह केस सोमवार को निर्णय सुनाने के लिए न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ के समक्ष लगा था।

Trending Videos


फैसला सुनाए जाने के पहले याचियों के अधिवक्ता अशोक पांडेय ने कोर्ट से आग्रह किया कि इस मामले की सुनवाई करने वाली दो न्यायाधीशों की खंडपीठ द्वारा फैसला सुनाया जाना चाहिए। जिससे केस में सुप्रीम कोर्ट में अपील के लिए इजाजत दिए जाने के मुद्दे पर भी उसी समय सुनवाई हो सके। इस पर कोर्ट ने याचिका को उसी खंडपीठ के समक्ष के समक्ष 4 जुलाई को सूचीबद्ध करने को कहा है, जिसने 10 जून के इसकी सुनवाई की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


दरअसल, बीते शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने याचिका पर सुनवाई के बाद याचिका की ग्राह्यता के मुद्दे पर आदेश सुरक्षित कर लिया था। कोर्ट ने फैसला सुनाने को 13 जून की तिथि नियत की थी। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की ग्रीष्मावकाशकालीन खंडपीठ ने यह आदेश वाराणसी व लखनऊ के 7 याचियों की जनहित याचिका पर दिया था। सोमवार को यह खंडपीठ उप्लब्ध नहीं थी।

यह है मामला
याचियों का कहना था कि हिंदू दावा कर रहे हैं कि वहां शिवलिंग मिला है जबकि मुसलमानों का दावा है कि यह एक फव्वारा है। याचियों ने कोर्ट से आग्रह किया कि  ऐसे में संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिया जाए कि ढांचे का अध्ययन करने को सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के वर्तमान या सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में आयोग या समिति गठित की जाए और इसकी रिपोर्ट के मुताबिक कारवाई की जाए। अर्थात अगर शिवलिंग हो तो भक्तों को विधि विधान से पूजा अर्चना की अनुमति दी जाए और अगर यह फव्वारा हो तो इसे सुचारु किया जाए। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही पेश हुए थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed