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राम मंदिर चंदा गबन: इन तीन तिकड़ी की खींचतान भी बनी विवादों की वजह, व्यवस्थाओं में कथित गुटबाजी पर उठ रहे सवाल

नितिन मिश्र, अमर उजाला अयोध्या Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 16 Jun 2026 08:32 PM IST
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सार

Ram Temple donation embezzlement:ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, वरिष्ठ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और ट्रस्ट से जुड़े गोपाल राव के प्रभाव वाले अलग-अलग समूह मंदिर की विभिन्न व्यवस्थाओं में सक्रिय थे।

Ram Temple donation embezzlement: The tussle between these three groups has also sparked controversy
राम मंदिर चंदा विवाद। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

राम मंदिर में चढ़ावा और दानराशि से जुड़े विवादों के बीच अब मंदिर प्रबंधन के भीतर कथित गुटबाजी की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से ट्रस्ट और मंदिर प्रबंधन से जुड़े तीन प्रभावशाली चेहरों के इर्द-गिर्द अलग-अलग समूह सक्रिय रहे, जिनकी आपसी खींचतान ने कई बार व्यवस्थाओं को प्रभावित किया।



सूत्र बताते हैं कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, वरिष्ठ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और ट्रस्ट से जुड़े गोपाल राव के प्रभाव वाले अलग-अलग समूह मंदिर की विभिन्न व्यवस्थाओं में सक्रिय थे। इन समूहों से जुड़े कर्मचारियों और कार्यकर्ताओं का कई बार अलग-अलग मुद्दों पर आमना-सामना भी होता रहा। आरोप है कि विभिन्न विभागों और व्यवस्थाओं में अपने-अपने लोगों की तैनाती को लेकर भी अंदरखाने प्रतिस्पर्धा बनी रहती थी।
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जानकारों का कहना है कि कर्मचारियों के बीच खेमेबंदी इस स्तर तक पहुंच गई थी कि एक-दूसरे की कार्यशैली और कमियों को उजागर करने की होड़ लगी रहती थी। कई बार आंतरिक शिकायतें भी इसी खींचतान का हिस्सा बनकर सामने आईं। सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में चर्चा में चल रहे मामले के पीछे भी अंदरूनी टकराव और वर्चस्व की लड़ाई को एक प्रमुख वजह माना जा रहा है।
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मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि राम मंदिर जैसी आस्था की सर्वोच्च संस्था में यदि व्यवस्थाओं पर प्रभाव को लेकर अलग-अलग शक्ति केंद्र बन जाएं तो इसका असर संगठनात्मक समन्वय पर पड़ना स्वाभाविक है। यही कारण है कि अब जांच के साथ-साथ मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली और आंतरिक व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।

हालांकि, इन आरोपों और चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ट्रस्ट की ओर से भी इस कथित गुटबाजी को लेकर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिर भी अयोध्या के संतों, आंदोलन से जुड़े पुराने कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि अंदरूनी खेमेबंदी ने मंदिर की व्यवस्था को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया।

रामलला के सोने के मुकुट भी हो चुके हैं गायब, सावन मेले से पहले मचा था हड़कंप

राम मंदिर की दान पेटियों में कथित गड़बड़ी और चढ़ावा चोरी प्रकरण के बीच अब दो वर्ष पुराना एक और मामला चर्चाओं में आ गया है। सूत्रों के अनुसार, सावन के झूला मेले में भगवान राम और उनके तीनों भाइयों भरत, लक्ष्मण व शत्रुघ्न को पहनाए जाने वाले सोने के मुकुट अचानक गायब हो गए थे, जिससे मंदिर प्रशासन और पुजारियों में हड़कंप मच गया था।

परंपरा के अनुसार झूलन उत्सव के दौरान चारों भाइयों का विशेष श्रृंगार कर उन्हें सोने के मुकुट पहनाए जाते हैं और झूले पर विराजमान कर भक्तों को दर्शन कराए जाते हैं। बताया जाता है कि सावन मेले की तैयारियों के दौरान जब पुजारियों ने मुकुट मांगे तो वे उपलब्ध नहीं थे। इसके बाद उनकी तलाश शुरू हुई, लेकिन कई महीनों तक उनका कोई पता नहीं चल सका।

सूत्रों की मानें तो लगातार दबाव और खोजबीन के बाद ये मुकुट मंदिर परिसर में ही ट्रस्ट से जुड़े एक पदाधिकारी की अलमारी से बरामद हुए थे। चर्चा यह भी रही कि ये मुकुट गाजियाबाद के एक श्रद्धालु द्वारा अपनी मां के जेवर बेचकर बनवाए गए थे और रामलला को भेंट किए गए थे।

मामले की जानकारी सामने आने के बाद मंदिर व्यवस्था पर सवाल उठे थे। सूत्रों के अनुसार बाद में इस प्रकरण से जुड़े एक कर्मचारी को तत्कालीन कार्रवाई के तहत हटाया भी गया था। हालांकि इस संबंध में कभी कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।

अब जबकि दानराशि और चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं की जांच चल रही है, ऐसे में मुकुट गायब होने का यह पुराना मामला भी एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। ।

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