यूपी कैबिनेट: एक गाय पर 50 हजार रुपये का अनुदान; चार लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण पर सहमति; 22 प्रस्ताव मंजूर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए एक गाय पर 50 हजार रुपये अनुदान का प्रावधान है। पशु बीमा में सरकार 85 प्रतिशत खर्च उठाएगी।
विस्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में पशुधन क्षेत्र को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने से जुड़े प्रस्ताव पर विशेष जोर दिया गया।
कैबिनेट में बताया गया कि उत्तर प्रदेश दूध उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है। इसके अलावा अंडा, ऊन और मत्स्य पालन के क्षेत्र में भी प्रदेश की स्थिति मजबूत है। हालांकि, इन क्षेत्रों में मूल्य संवर्धन, डिजिटल प्रबंधन और संगठित बाजार व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत है।
पशुपालन से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
सरकार का उद्देश्य पशुपालन को किसानों की आय बढ़ाने का प्रमुख माध्यम बनाना है। इसके लिए स्टेट लैब स्टार्ट मिशन के गठन का प्रस्ताव रखा गया है। मिशन के तहत रोजगार सृजन, उद्यमिता विकास, पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने और पशु उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाएगा।
योजना में उन्नत नस्ल के पशुओं को बढ़ावा देने और गाय की नस्ल सुधारने का भी प्रावधान है। दूध उत्पादन बढ़ाकर प्रति गाय प्रतिदिन 10 लीटर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही मुर्गी और बकरी पालन को प्रोत्साहित करने के लिए भी सहायता देने की बात कही गई है।
पशु बीमा में सरकार देगी 85 फीसदी राशि
प्रस्ताव के अनुसार, पशुपालकों को आर्थिक सहायता देने के साथ पशुओं का बीमा भी कराया जाएगा। बीमा की कुल लागत का 85 फीसदी हिस्सा सरकार और 15 फीसदी हिस्सा किसान वहन करेंगे। योजना के तहत एक गाय पर 50 हजार रुपये का अनुदान देने का प्रावधान बताया गया है। सरकार का उद्देश्य पशुपालन क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, बेहतर नस्ल और बाजार व्यवस्था के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
#WATCH लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट मीटिंग की। https://t.co/qvdAf92YUH
— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 27, 2026
यूपी में कंपनियों के मर्जर और डी-मर्जर पर स्टांप ड्यूटी का प्रावधान
उत्तर प्रदेश में कंपनियों के विलय (मर्जर) और विभाजन (डी-मर्जर) की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए स्टांप ड्यूटी से जुड़ा प्रस्ताव तैयार किया गया है। स्टांप मंत्री रविंद्र जायसवाल ने बताया कि अभी तक प्रदेश में कंपनियों के मर्जर और डी-मर्जर के लिए स्टांप ड्यूटी का स्पष्ट प्रावधान नहीं था। इसके कारण उद्यमियों को प्रक्रिया के दौरान भ्रम और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
मंत्री के मुताबिक, प्रस्ताव के तहत कंपनी के मर्जर या डी-मर्जर में शेयर वैल्यू पर 0.50 फीसदी स्टांप ड्यूटी लगाने का प्रावधान किया गया है। यदि संबंधित मामले में संपत्ति शामिल है, तो उस पर दो फीसदी स्टांप ड्यूटी का प्रस्ताव है। कंपनी का पंजीकरण कराने और कंपनी रजिस्ट्रार (आरओसी) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शेयर वैल्यू के आधार पर स्टांप ड्यूटी देनी होगी।
सर्किल रेट के आधार पर ड्यूटी की समस्या होगी दूर
रविंद्र जायसवाल ने कहा कि स्पष्ट नियम नहीं होने के कारण कई मामलों में सर्किल रेट के बराबर स्टांप ड्यूटी की मांग की जाती थी। इससे कंपनियों के विलय के दौरान उद्यमियों के सामने मुश्किलें आती थीं। प्रस्ताव लागू होने से दो कंपनियों के मिलकर एक कंपनी बनने जैसी प्रक्रियाओं में स्पष्टता आने की उम्मीद है।
मंत्री ने बताया कि गुजरात और महाराष्ट्र में इस तरह का प्रावधान है। उत्तर प्रदेश में भी इसे लागू करने की दिशा में कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि स्टांप ड्यूटी का विषय समवर्ती सूची से जुड़ा होने के कारण प्रस्ताव को केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इसे प्रदेश में लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
यात्रियों और नाविकों को मिलेगा बीमा कवर
उत्तर प्रदेश में जल परिवहन को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए नावों और पानी के जहाजों के पंजीकरण की व्यवस्था की जाएगी। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि अब तक मोटर से चलने वाले जहाजों और नावों के संचालन को लेकर स्पष्ट नियमावली नहीं थी। नई व्यवस्था के तहत यांत्रिक और गैर-यांत्रिक दोनों तरह की नावों का पंजीकरण किया जाएगा।
बनेगी इनलैंड वाटर अथॉरिटी
मंत्री के मुताबिक, जल परिवहन के संचालन और निगरानी के लिए इनलैंड वाटर अथॉरिटी बनाई जाएगी। इसके अध्यक्ष परिवहन मंत्री होंगे। उन्होंने बताया कि इंजन से चलने वाले बड़े जहाज यांत्रिक श्रेणी में आएंगे, जबकि गांवों में इस्तेमाल होने वाली मोटर चालित छोटी नावों के लिए अलग श्रेणी निर्धारित की जाएगी।
नावों का वर्गीकरण यात्रियों की क्षमता के आधार पर भी किया जाएगा। इसमें 10 यात्रियों वाली मोटर नाव, पांच से 10 यात्रियों वाली नाव और पांच तक यात्रियों की क्षमता वाली नाव जैसी श्रेणियां शामिल होंगी। गैर-यात्री नावों के पंजीकरण के लिए 50 रुपये शुल्क प्रस्तावित है।
यात्रियों और नाविकों का होगा बीमा
दयाशंकर सिंह ने कहा कि जल परिवहन से जुड़े छोटे और असंगठित क्षेत्र को भी नियमों के दायरे में लाया जाएगा। नावों और नाविकों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, क्योंकि फिलहाल गैर-यांत्रिक नावों से जुड़ा व्यवस्थित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। नई व्यवस्था में यात्रियों और नाविकों के बीमा का भी प्रावधान होगा।
नावों के पंजीकरण और निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को दी जाएगी। इसमें सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) प्रशासन, तहसील स्तर के अधिकारी और आरआई की भूमिका होगी।
11 नदियों पर जल परिवहन की योजना
प्रदेश की गंगा और यमुना समेत 11 नदियों पर जल परिवहन को लेकर काम किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य नदियों के माध्यम से परिवहन की संभावनाओं को विकसित करना और नाव संचालन को अधिक सुरक्षित तथा व्यवस्थित बनाना है।
48 हजार से अधिक शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को मिलेगी कैशलेस चिकित्सा सुविधा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसके तहत अशासकीय सहायता प्राप्त, वित्तविहीन और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही सैनिक स्कूल मैनपुरी के विस्तार के लिए ग्रामीण क्षेत्र में निःशुल्क जमीन देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।
48,062 कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के 23,989, वित्तविहीन विद्यालयों के 22,541 और अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों के करीब 110 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा। इस योजना से कुल 48,062 कर्मचारी लाभान्वित होंगे।
सरकार प्रत्येक कर्मचारी के बीमा प्रीमियम के लिए 3,000 रुपये देगी। इस पर कुल 14.41 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को पांच लाख रुपये तक के इलाज की कैशलेस सुविधा मिलेगी।
बेसिक शिक्षा के 1.22 लाख से अधिक कर्मचारियों को लाभ
बेसिक शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों को भी इसी तरह की चिकित्सा सुविधा देने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न श्रेणियों के कुल 1,22,305 कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। इनमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, लिपिक, वित्तविहीन संस्थानों के कर्मचारी और जिला परियोजना से जुड़े कर्मी शामिल हैं।
सैनिक स्कूल मैनपुरी का होगा विस्तार
कैबिनेट ने सैनिक स्कूल मैनपुरी को ग्रामीण क्षेत्र में निःशुल्क जमीन उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। यह स्कूल 22 जुलाई 2019 से संचालित है। जमीन मिलने से स्कूल के विस्तार का रास्ता साफ होगा।
चार लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण पर सहमति, 17,542 करोड़ रुपये होंगे खर्च
उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में सहकारिता, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई), ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) और एक्सप्रेसवे निर्माण से जुड़े प्रस्तावों पर अहम फैसले लिए गए। इनमें चार लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए सहमति और झांसी-ललितपुर में भंडारण क्षमता बढ़ाने की योजना शामिल है।
सहकारिता विभाग के प्रस्ताव के तहत झांसी और ललितपुर में 6.5 लाख मीट्रिक टन की अतिरिक्त भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी। इसके लिए 5.47 हेक्टेयर जमीन पर निर्माण किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य क्षेत्र में भंडारण की सुविधा बढ़ाना है।
ग्रेटर नोएडा में 654 करोड़ का निवेश
एफडीआई से जुड़े प्रस्ताव में एंपावर्ड कमेटी की संस्तुति को मंजूरी दी गई। इसके तहत ग्रेटर नोएडा में एकागो हॉस्पिटेलिटी की ओर से 654 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव शामिल है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) नीति के तहत चार कंपनियों को लेटर ऑफ कंफर्ट जारी करने पर सहमति दी गई। इनमें हैवेल्स के नोएडा में 889 करोड़ रुपये, अमेरियोराइड इंडिया एलएलपी के 112 करोड़ रुपये, मेटलाइफ ग्लोबल के 84 करोड़ रुपये और एलजी सॉफ्ट के 634 करोड़ रुपये के प्रस्ताव शामिल हैं।
चार लिंक एक्सप्रेसवे तीन साल में बनाने की योजना
यूपीडा के प्रस्ताव के तहत चार लिंक एक्सप्रेसवे को इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड पर बनाने के लिए सहमति दी गई। इनमें फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के पैकेज-1 और पैकेज-2 की कुल लंबाई करीब 90 किलोमीटर होगी।
इसके अलावा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले लिंक एक्सप्रेसवे, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के पैकेज-1 और पैकेज-2 की कुल 106 किलोमीटर लंबाई तथा 74 किलोमीटर लंबे जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण की योजना है।
इन परियोजनाओं को तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। चारों परियोजनाओं पर कुल 17,542 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। निर्माण करने वाली कंपनियों को पांच साल तक एक्सप्रेसवे के रखरखाव की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
यूपी में 1,709 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित होंगे चार ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर
कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश और तकनीकी सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) नीति-2024 के अंतर्गत चार औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी किए जाने के प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान कर दी है। इन चारों इकाइयों के माध्यम से प्रदेश में कुल 1,709.84 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा।
स्वीकृत प्रस्तावों में हैवेल्स इंडिया लिमिटेड, अमेरिप्राइज इंडिया एलएलपी, मेटलाइफ ग्लोबल ऑपरेशन्स सपोर्ट सेंटर प्राइवेट लिमिटेड और एलजी सॉफ्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इन परियोजनाओं के गौतम बुद्ध नगर में स्थापित होने से प्रदेश के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) इकोसिस्टम को मजबूती मिलने तथा उच्च कौशल आधारित व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार की उम्मीद है।
चार कंपनियों के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी
हैवेल्स इंडिया लिमिटेड द्वारा 879 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। यह परियोजना गौतम बुद्ध नगर में नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) के अंतर्गत प्रस्तावित है। कंपनी को केस-टू-केस आधार पर प्रोत्साहन दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
अमेरिप्राइज इंडिया एलएलपी की ओर से 112.84 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। यह परियोजना गौतम बुद्ध नगर में निजी भूमि पर स्थित एम्बेसी ऑक्सीजन बिजनेस पार्क में प्रस्तावित है। कंपनी को नीति के अनुसार प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान है।
मेटलाइफ ग्लोबल ऑपरेशन्स सपोर्ट सेंटर प्राइवेट लिमिटेड ने 84 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। इसकी प्रस्तावित इकाई भी गौतम बुद्ध नगर स्थित एम्बेसी ऑक्सीजन बिजनेस पार्क में निजी भूमि पर स्थापित की जानी है। कंपनी को जीसीसी नीति के अनुसार प्रोत्साहन दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है।
वहीं, एलजी सॉफ्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 634 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। यह परियोजना गौतम बुद्ध नगर में नोएडा प्राधिकरण के अंतर्गत प्रस्तावित है। इसके लिए केस-टू-केस आधार पर प्रोत्साहन दिए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई है।
जीसीसी नीति से वैश्विक निवेश को प्रोत्साहन
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से 7 मई, 2025 को उत्तर प्रदेश वैश्विक क्षमता केंद्र नीति-2024 अधिसूचित की थी। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 7 जनवरी, 2026 को जीसीसी क्रियान्वयन नियमावली-2025 भी जारी की गई।
इसी क्रम में मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय प्राधिकृत समिति की 10 जुलाई, 2026 को हुई बैठक में चारों औद्योगिक इकाइयों के प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया। अब कैबिनेट की मंजूरी से इन इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
जीसीसी ऐसे केंद्र होते हैं, जहां बहुराष्ट्रीय और बड़ी कंपनियां तकनीकी विकास, अनुसंधान, वित्तीय सेवाओं, डिजिटल परिचालन, इंजीनियरिंग और अन्य वैश्विक कारोबारी कार्यों का संचालन करती हैं। इन केंद्रों के विस्तार से प्रदेश में निवेश के नए अवसर पैदा होने, कुशल युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं बढ़ने और उत्तर प्रदेश की वैश्विक कारोबारी सेवाओं के क्षेत्र में पहचान मजबूत होने की उम्मीद है।
ग्रेटर नोएडा में बनेगा देश का अत्याधुनिक प्रगति रोबोटिक्स पार्क
उत्तर प्रदेश को आधुनिक तकनीक, औद्योगिक नवाचार और रोबोटिक्स विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में ग्रेटर नोएडा में ‘प्लेटफॉर्म फॉर रोबोटिक्स एंड एआई ग्रोथ थ्रू टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन’ (PRAGATI) रोबोटिक्स पार्क की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। लगभग 69.52 एकड़ भूमि पर विकसित होने वाला यह पार्क रोबोटिक्स कंपनियों, तकनीकी स्टार्टअप, अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों को एकीकृत सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य प्रदेश में स्वदेशी रोबोटिक्स विनिर्माण को प्रोत्साहित करना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीकों के विकास को गति देना और रोबोटिक्स क्षेत्र में निवेश एवं अनुसंधान के लिए अनुकूल इकोसिस्टम तैयार करना है। परियोजना के पूर्ण विस्तार पर एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने और प्रदेश की अर्थव्यवस्था में लगभग 2,000 करोड़ रुपये का वार्षिक सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) होने का अनुमान है।
पीपीपी मॉडल पर विकसित होगा पार्क का पहला जोन
प्रगति रोबोटिक्स पार्क को दो जोन में विकसित किया जाएगा। जोन-1 के लिए आठ एकड़ भूमि निर्धारित की गई है, जिसका विकास और संचालन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर गठित विशेष प्रयोजन कंपनी (एसपीवी) के माध्यम से किया जाएगा।
इसमें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की इक्विटी हिस्सेदारी 26 प्रतिशत और चयनित औद्योगिक साझीदार की हिस्सेदारी 74 प्रतिशत होगी। जोन-2 के लिए 61.52 एकड़ भूमि आरक्षित की जाएगी। इस क्षेत्र में निजी उद्यमों द्वारा निवेश कर औद्योगिक इकाइयों और संबंधित गतिविधियों का विकास किया जाएगा। इस जोन के विकास के लिए राज्य सरकार पर कोई पूंजीगत दायित्व नहीं होगा।
सरकार और प्राधिकरण करेंगे वित्तीय सहयोग
जोन-1 के विकास के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा 21.1 करोड़ रुपये का इक्विटी अंशदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार की ओर से 30 वर्षों के लिए 126.2 करोड़ रुपये का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। आठ एकड़ भूमि के लीज प्रीमियम के संबंध में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार राज्य सरकार के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के माध्यम से प्राधिकरण को प्रतिपूर्ति की जाएगी। वहीं, जोन-2 में भूमि आवंटन विकास शुल्क से प्राप्त राजस्व का पांच प्रतिशत सेवा शुल्क एसपीवी को देय होगा, जिस पर लागू जीएसटी भी देय होगा।
औद्योगिक साझीदार का चयन गुणवत्ता-आधारित चयन प्रक्रिया (क्यूबीएस) के माध्यम से किया जाएगा। इसके बाद एसपीवी का पंजीकरण, भूमि आवंटन, पट्टा विलेख का निष्पादन और निर्माण संबंधी कार्यवाही पूरी की जाएगी। एसपीवी के पंजीकरण से 36 महीने के भीतर जोन-1 का वाणिज्यिक संचालन शुरू करने का लक्ष्य है। आवश्यकता पड़ने पर यह अवधि अधिकतम 48 महीने तक हो सकेगी। परियोजना की प्रगति की निगरानी समिति द्वारा समीक्षा की जाएगी।
एक ही परिसर में मिलेंगी रोबोटिक्स और एआई की अत्याधुनिक सुविधाएं
प्रगति रोबोटिक्स पार्क की विशेषता यह होगी कि यहां रोबोटिक्स परीक्षण एवं प्रमाणन केंद्र, रैपिड प्रोटोटाइपिंग, एआई कंप्यूट अवसंरचना, मोशन कैप्चर और डेटा प्रयोगशालाओं जैसी साझा सुविधाएं एक ही एकीकृत परिसर में उपलब्ध कराई जाएंगी।
स्टार्टअप और उद्यमियों को किफायती दरों पर अत्याधुनिक परीक्षण, प्रोटोटाइप तैयार करने और जीपीयू आधारित कंप्यूटिंग सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। इससे नए उत्पादों के विकास, तकनीकी प्रयोगों और नवाचार आधारित उद्यमों को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, रोबोटिक्स उत्पादों के वैश्विक मानकों के अनुरूप परीक्षण एवं सीई/यूएल प्रमाणन संबंधी क्षमताओं को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।
स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा, आयात पर निर्भरता घटाने की पहल
रोबोटिक्स और एआई आधुनिक उद्योगों, विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं, लॉजिस्टिक्स और अन्य क्षेत्रों में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में प्रदेश में रोबोटिक्स पार्क की स्थापना से स्वदेशी तकनीक और विनिर्माण क्षमता विकसित करने के अवसर बढ़ेंगे। इससे आयात पर निर्भरता कम करने तथा घरेलू कंपनियों को वैश्विक बाजार के अनुरूप उत्पाद विकसित करने में मदद मिल सकती है। परियोजना के माध्यम से प्रदेश के युवाओं और कुशल तकनीकी कार्यबल को रोबोटिक्स, एआई, प्रोटोटाइपिंग, परीक्षण और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में कौशल विकास के अवसर उपलब्ध होंगे।
पार्क से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों, स्टार्टअप और संबंधित मूल्य श्रृंखला के विस्तार के साथ लगभग एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। पूर्ण संचालन पर लगभग 2,000 करोड़ रुपये के वार्षिक सकल मूल्यवर्धन की संभावना के साथ प्रगति रोबोटिक्स पार्क उत्तर प्रदेश में तकनीक आधारित औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण और नवाचार को गति देने वाली महत्वपूर्ण परियोजना बन सकता है।
104.28 करोड़ से बनेगा यूपी का साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन्स सेंटर
उत्तर प्रदेश के डिजिटल बुनियादी ढांचे को साइबर हमलों से सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन्स सेंटर (UP-CSOC) की स्थापना आईआईटी कानपुर के साइबर सिक्योरिटी इनोवेशन हब C3iHub के माध्यम से कराए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस परियोजना पर जीएसटी सहित कुल 104.28 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी।
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि इस केंद्र के माध्यम से प्रदेश के स्टेट डेटा सेंटर, उत्तर प्रदेश स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (UPSWAN), सरकारी एप्लिकेशन और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल परिसंपत्तियों की 24 घंटे निगरानी की जाएगी। साइबर सुरक्षा से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि, हमले या डेटा सेंधमारी की स्थिति में त्वरित कार्रवाई और प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने में यह केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आईआईटी कानपुर के C3iHub को मिलेगी जिम्मेदारी
UP-CSOC की स्थापना के लिए आईआईटी कानपुर के साइबर सिक्योरिटी इनोवेशन हब C3iHub को कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में नामित किया जाना प्रस्तावित है। एजेंसी द्वारा केंद्र की स्थापना के साथ तीन वर्षों तक संचालन, निगरानी, साइबर सुरक्षा संबंधी घटनाओं पर प्रतिक्रिया, रखरखाव और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस व्यवस्था से प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों के डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा को एकीकृत और व्यवस्थित स्वरूप देने में मदद मिलेगी। साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं की निगरानी और उनका विश्लेषण केंद्रीय स्तर पर किया जा सकेगा, जिससे समय रहते खतरे की पहचान और आवश्यक कार्रवाई संभव होगी।
आधुनिक तकनीक से होगी साइबर खतरों की पहचान
UP-CSOC में नेक्स्ट जनरेशन फायरवॉल (एनजीएफडब्ल्यू), सिक्योरिटी इन्फॉर्मेशन एंड इवेंट मैनेजमेंट (एसआईईएम), सिक्योरिटी ऑर्केस्ट्रेशन, ऑटोमेशन एंड रिस्पॉन्स (एसओएआर), यूजर एंड एंटिटी बिहेवियर एनालिटिक्स (यूईबीए), नेटवर्क डिटेक्शन एंड रिस्पॉन्स (एनडीआर), वेब एप्लिकेशन फायरवॉल (डब्ल्यूएएफ), एपीआई सिक्योरिटी, एंटी-डीडीओस, एडवांस्ड पर्सिस्टेंट थ्रेट (एपीटी) और डीएनएस सिक्योरिटी जैसी आधुनिक तकनीकें स्थापित की जाएंगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल), थ्रेट इंटेलिजेंस और एडवांस्ड एनालिटिक्स के उपयोग से संभावित साइबर हमलों की समयपूर्व पहचान करने और उनके प्रभाव को कम करने में सहायता मिलेगी। इससे रैनसमवेयर, डेटा चोरी, अनधिकृत पहुंच और अन्य साइबर खतरों के विरुद्ध सरकारी डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा मजबूत होगी।
24 घंटे तैनात रहेंगे साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ
केंद्र के संचालन के लिए साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की तैनाती की जाएगी, जो चौबीसों घंटे खतरे की निगरानी, साइबर घटनाओं पर प्रतिक्रिया और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएंगे। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (सीआईएसओ) और नोडल अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा।
परियोजना के अंतर्गत वल्नरेबिलिटी असेसमेंट, थ्रेट हंटिंग, साइबर ड्रिल, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की व्यवस्था भी की जाएगी। इससे सरकारी विभागों की साइबर सुरक्षा संबंधी तैयारियों को बेहतर बनाने और संभावित खतरों से निपटने की क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी।
स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट से होगी व्यवस्था की समीक्षा
UP-CSOC की सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित सेवा एवं सुरक्षा मानकों के अनुपालन की समीक्षा के लिए थर्ड-पार्टी सिक्योरिटी ऑडिटर की व्यवस्था की जाएगी। इसके माध्यम से प्रत्येक तिमाही में सुरक्षा ऑडिट और अनुपालन की समीक्षा कराई जाएगी। इससे केंद्र की कार्यप्रणाली, सुरक्षा प्रोटोकॉल और निर्धारित मानकों के पालन का स्वतंत्र मूल्यांकन संभव होगा।