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UP Cabinet: 30 मार्च से शुरू होगी गेहूं खरीद, नवयुग पालिका योजना को मिली मंजूरी; बनेंगे आधुनिक बिजनेस पार्क

डिजिटल डेस्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Mon, 23 Mar 2026 05:50 PM IST
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सार

सीएम योगी की अध्यक्षता में यूपी कैबिनेट ने गेहूं खरीद, नवयुग पालिका योजना, आधुनिक बिजनेस पार्क, मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क और प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक शेड्स परियोजनाओं को मंजूरी दी। योजनाओं से किसानों, नगरीय विकास और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार सृजन और डिजिटल सेवाएं सुनिश्चित होंगी।

UP Cabinet: Wheat Procurement to Begin on March 30; 'Navyug Palika Yojana' Approved—Modern Business Parks to b
कैबिनेट बैठक में मौजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व अन्य। - फोटो : amar ujala
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विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को लोकभवन में कैबिनेट की बैठक हुई। इसमें कुल 37 प्रस्ताव आए, जिसमें से कैबिनेट ने 35 को स्वीकृति प्रदान की। इसमें गेहूं खरीद पर भी निर्णय किया गया। कैबिनेट बैठक के बाद कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने पत्रकारों को इस संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी। 

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कृषि मंत्री ने बताया कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया है। केंद्र सरकार ने गत वर्ष की तुलना में 160 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि की है। रामनवमी के उपरांत 30 मार्च से गेहूं खरीद होगी, जो 15 जून तक चलेगी। 
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कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश में खाद्य विभाग की विपणन शाखा सहित कुल 8 एजेंसियों द्वारा 6500 क्रय केंद्र स्थापित होंगे। क्रय केंद्र सुबह 9 से शाम 6 बजे तक खुले रहेंगे। क्रय केंद्रों पर किसानों के लिए छाया, पानी व बैठने समेत सभी व्यवस्थाएं पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं।

किसानों को 20 रुपये प्रति कुंतल अलग से दिया जाएगा

कृषि मंत्री ने कहा कि उतराई, छनाई व सफाई के लिए किसानों को 20 रुपये प्रति कुंतल अलग से दिया जाएगा। किसानों ने इस साल प्रदेश के भीतर काफ़ी अच्छी फसल लगाई है। कृषि विभाग ने उन्हें पर्याप्त मात्रा में बीज भी उपलब्ध कराए हैं। पर्याप्त मात्रा में इसकी खरीद की जाए, जिससे किसानों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं उठाना पड़े। 

50 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य 

उन्होंने बताया कि खाद्य व रसद विभाग ने 30 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा था, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे 50 लाख मीट्रिक टन किए जाने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने 48 घंटे के भीतर डीबीटी के माध्यम से किसानों को भुगतान के भी निर्देश दिए हैं। बिचौलियों का हस्तक्षेप न रहे, इसलिए सारा सिस्टम ऑनलाइन कर दिया गया है। 

लगभग दो लाख किसानों ने करा लिया पंजीकरण

गेहूं की बिक्री के लिए अब तक लगभग दो लाख किसानों ने पंजीकरण करा लिया है। खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक 1,95,628 किसानों ने सोमवार दोपहर दो बजे तक पंजीकरण करा लिया है।


 

58 जिला मुख्यालयों के नगरीय निकायों का होगा समग्र विकास

प्रदेश में स्मार्ट सिटी मिशन के विस्तार और संतुलित शहरी विकास को गति देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में “नवयुग पालिका योजना” को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना के तहत 58 जिला मुख्यालयों के नगरीय निकायों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा।

राज्य सरकार ने पहली बार नगर निगमों से बाहर के नगरीय निकायों, विशेषकर जिला मुख्यालय स्थित नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों को प्राथमिकता देते हुए विकास की नई रूपरेखा तैयार की है। योजना के अंतर्गत 55 नगर पालिका परिषदों, 3 नगर पंचायतों तथा गौतमबुद्धनगर की दादरी नगर पालिका परिषद को शामिल किया गया है।

5 वर्षों में 2916 करोड़ रुपये का निवेश

योजना के तहत प्रत्येक वर्ष 583.20 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जाएगी, इस तरह 5 वर्षों (2025-26 से 2029-30) में कुल 2916 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। यह पूरी तरह राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित योजना है, जिसमें केंद्र सरकार की कोई भागीदारी नहीं होगी। नवयुग पालिका योजना के माध्यम से स्मार्ट सिटी की तर्ज पर डिजिटल गवर्नेन्स, ई-सेवाओं और तकनीकी समाधान को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे नागरिक सेवाएं अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी बनेंगी।

आधारभूत ढांचे का उन्नयन और जीवन स्तर में सुधार

योजना का मुख्य उद्देश्य नगरीय निकायों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराना तथा नागरिकों के जीवन स्तर (ईज ऑफ लिविंग) में सुधार लाना है। इसके तहत सड़कों, जल निकासी, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं का व्यापक विकास किया जाएगा। जिला मुख्यालयों को विकसित करने से विभिन्न मंडलों के बीच विकास असमानताओं को कम करने में मदद मिलेगी। इससे नगर निगमों से बाहर के क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और संतुलित शहरी विकास सुनिश्चित होगा।

चयन और क्रियान्वयन की स्पष्ट व्यवस्था

परियोजनाओं के चयन के लिए जनपद स्तर पर समितियों का गठन किया जाएगा, जबकि राज्य स्तरीय तकनीकी समिति द्वारा परीक्षण के बाद सक्षम स्तर से अनुमोदन दिया जाएगा। इसके बाद ही विकास कार्यों का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

 

UP Cabinet: Wheat Procurement to Begin on March 30; 'Navyug Palika Yojana' Approved—Modern Business Parks to b
यूपी सरकार के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना। - फोटो : amar ujala

जनसंख्या के आधार पर दो श्रेणियों में विभाजित किया निकाय

प्रदेश के नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार शहरों के समग्र और संतुलित विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार बड़े नगर निगमों में स्मार्ट सिटी योजना के तहत आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, उसी तर्ज पर अब जिला मुख्यालय स्तर के नगर पालिका क्षेत्रों को भी विकसित किया जाएगा।

“नवयुग पालिका योजना” इसी सोच का परिणाम है। इसके अंतर्गत उत्सव भवन, ऑडिटोरियम, प्रदर्शनी केंद्र, पार्कों का विकास तथा विद्युत व्यवस्था के आधुनिकीकरण जैसे कार्य कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि निकायों को उनकी जनसंख्या के आधार पर दो श्रेणियों (डेढ़ लाख से अधिक और डेढ़ लाख से कम आबादी) में विभाजित किया गया है, ताकि उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा सके।

प्रत्येक बिजनेस पार्क के लिए न्यूनतम 10 एकड़ भूमि का प्रावधान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में “उत्तर प्रदेश निजी बिजनेस पार्क विकास योजना-2025” को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना के तहत प्रदेश में विश्वस्तरीय प्लग-एंड-प्ले बिजनेस पार्क विकसित कर वैश्विक निवेश, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को नई गति दी जाएगी। 

योजना के अंतर्गत प्रदेश में ऐसे बिजनेस पार्क विकसित किए जाएंगे, जहां वैश्विक निगमों के कार्यालय, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) केंद्र, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) तथा संचालन केंद्र स्थापित किए जा सकेंगे। इन पार्कों में रेडी-टू-ऑपरेट और प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे सेवा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में तेजी से विस्तार होगा।

रेडी-टू-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर से घटेगी लागत और समय

अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने बताया कि अभी तैयार इंफ्रास्ट्रक्चकर के अभाव में परियोजनाओं में देरी और लागत वृद्धि होती है। यह योजना इस समस्या का समाधान करते हुए आधुनिक व रेडी-टू-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराएगी, जो प्रदेश की औद्योगिक निवेश नीतियों का पूरक बनेगा। 

विश्वस्तरीय बिजनेस पार्क्स की स्थापना से औद्योगिक सेटअप में तेजी आएगी, बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा, हजारों रोजगार के अवसर सृजित होंगे, राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और स्टार्टअप को समर्थन मिलेगा और औद्योगिक क्लस्टरिंग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही साझा जोखिम (रिस्क शेयरिंग) मॉडल को प्रोत्साहन मिलेगा।

डीबीएफओटी मॉडल पर होगा विकास

योजना को डिजाइन, बिल्ट, फाइनेंस, आपरेट एवं ट्रांसफर (डीबीएफओटी) मॉडल के तहत लागू किया जाएगा। इसके माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी और दक्षता को बढ़ावा मिलेगा, जिससे परियोजनाओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा। प्रत्येक बिजनेस पार्क को 45 वर्षों की रियायत अवधि पर विकसित किया जाएगा, जिसे आगे 45 वर्षों तक बढ़ाया जा सकेगा। 

इसके बाद विकसित संपत्तियां राज्य सरकार को हस्तांतरित कर दी जाएंगी। प्रत्येक बिजनेस पार्क के लिए न्यूनतम 10 एकड़ भूमि का प्रावधान किया गया है। हालांकि, स्थान विशेष की उपलब्धता और उपयुक्तता के आधार पर इसमें लचीलापन भी रखा गया है। योजना की वित्तीय संरचना में अपफ्रंट लैंड प्रीमियम और राजस्व भागीदारी शामिल होगी।

निजी डेवलपर पर पूरी जिम्मेदारी

चयनित डेवलपर को योजना के तहत डीबीएफओटी की पूरी जिम्मेदारी उठानी होगी। रियायत अवधि के दौरान डेवलपर को परियोजना के सभी पहलुओं का प्रबंधन करना होगा। योजना लागू होने के बाद संबंधित औद्योगिक विकास प्राधिकरण या सरकारी भूमि स्वामित्व एजेंसियां आवेदन और बोली प्रक्रिया संचालित करेंगी। 

इसमें प्रस्ताव आमंत्रण, प्रारंभिक जांच और तकनीकी मूल्यांकन शामिल होगा। प्रस्तावों के मूल्यांकन के लिए एक स्क्रीनिंग समिति गठित की जाएगी, जो शॉर्टलिस्ट आवेदकों की सिफारिश आवंटन समिति को करेगी। अंतिम भूमि आवंटन का निर्णय संबंधित प्राधिकरण द्वारा लिया जाएगा।

नियमित प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य

विकासकर्ता को अर्धवार्षिक आधार पर प्रगति एवं वित्तीय रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें भौतिक प्रगति, व्यय का विवरण और समय-सीमा के अनुपालन की जानकारी शामिल होगी। यह रिपोर्ट नामित प्राधिकरण को सौंपी जाएगी। इस योजना के अंतर्गत सभी निविदाएं राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) दिशा-निर्देशों के अनुसार जारी की जाएंगी।

प्रत्येक निविदा के लिए संबंधित प्राधिकरण को अपने प्रशासनिक विभाग से अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा। यह योजना कैबिनेट से अनुमोदित होने के बाद अधिसूचना जारी होने की तिथि से प्रभावी होगी। इसके बाद प्रदेश की विभिन्न भूमि स्वामित्व एजेंसियां बिजनेस पार्क विकास के लिए इस नीति को अपनाएंगी।

सम्भल में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर को मिली मंजूरी

कैबिनेट बैठक में अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत गंगा एक्सप्रेसवे के निकट जनपद सम्भल में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) की स्थापना हेतु अवस्थापना विकास कार्यों को मंजूरी दे दी गई है। 

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित एक्सप्रेस-वे नेटवर्क के अंतर्गत 29 स्थलों पर प्रस्तावित इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना के तहत यह क्लस्टर विकसित किया जाएगा, जिसमें सड़क, आरसीसी नालियां, कल्वर्ट, फायर स्टेशन, अवर जलाशय, जलापूर्ति लाइन, फेंसिंग, विद्युत सहित आधुनिक आधारभूत ढांचा तैयार किया जाएगा। 

परियोजना का निर्माण ईपीसी मॉडल पर किया जाएगा तथा प्रस्तावित 293.59 करोड़ रुपये की लागत के सापेक्ष वित्त समिति द्वारा अनुमोदित 245.42 करोड़ रुपये की धनराशि पर कैबिनेट ने अंतिम स्वीकृति प्रदान की है। इस परियोजना से सम्भल क्षेत्र में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स सुविधाएं सुदृढ़ होंगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

174 एकड़ में विकसित होगा मेगा प्रोजेक्ट

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में “उत्तर प्रदेश मल्टी मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क नीति-2024” के तहत ग्रेटर नोएडा में 174.12 एकड़ भूमि पर मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी) की स्थापना के लिए नियम, शर्तें और ब्रोशर को मंजूरी दे दी गई है। 

राज्य सरकार की नीति के तहत न्यूनतम 1000 करोड़ रुपये के निवेश वाली मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क परियोजनाओं को प्रोत्साहन दिया जाएगा। ऐसी परियोजनाओं को 30% फ्रंट-एंड लैंड सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जो केवल सरकारी या औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा लीज पर आवंटित भूमि पर ही अनुमन्य होगी। 

उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति (एचएलईसी) ने ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) बोर्ड, मूल्यांकन समिति और औद्योगिक विकास विभाग की संस्तुति के आधार पर चयनित बिडर को 30% लैंड सब्सिडी देने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसी के अनुरूप कैबिनेट ने अंतिम अनुमोदन प्रदान किया।

ग्रेटर नोएडा में 174.12 एकड़ भूमि पर विकसित होगा पार्क

ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा सेक्टर कप्पा-02 (पूर्व में कप्पा-11) में स्थित लगभग 174.12 एकड़ (7,04,664 वर्ग मीटर) भूखंड पर इस मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क की स्थापना की जाएगी। इसके लिए तैयार योजना के नियम और शर्तों को उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति द्वारा भी अनुमोदित किया जा चुका है। भूखंड के आवंटन के लिए ई-नीलामी मॉडल अपनाया जाएगा। भारत में पंजीकृत साझेदारी फर्म, एलएलपी, निजी या सार्वजनिक लिमिटेड कंपनियां इसमें भाग ले सकेंगी, जबकि कंसोर्टियम या ज्वाइंट वेंचर को निविदा में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी।

11,000 रुपये प्रति वर्गमीटर तय हुआ रिजर्व प्राइस

भूखंड का आरक्षित मूल्य 11,000 रुपये प्रति वर्गमीटर निर्धारित किया गया है। 30% फ्रंट-एंड लैंड सब्सिडी की गणना इसी रिजर्व प्राइस के आधार पर की जाएगी, जैसा कि नीति में प्रावधानित है। सफल बोलीदाता को परियोजना 7 वर्षों में पूर्ण करनी होगी, जिसमें पहले 3 वर्षों में कम से कम 40% कार्य पूरा करना अनिवार्य होगा।

विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 2 वर्षों का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। परियोजना के पूर्ण संचालन और निर्धारित निवेश प्रतिबद्धताओं की पूर्ति से पहले आवंटी को परियोजना से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे परियोजना की गंभीरता और समयबद्धता सुनिश्चित होगी।

प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक शेड्स योजना-2026 को कैबिनेट की मंजूरी

योगी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत डिजाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर (DBFOT) मॉडल पर आधारित “प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक शेड्स योजना-2026” को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य 1 ट्रिलियन डॉलर जीएसडीपी लक्ष्य के अनुरूप औद्योगीकरण को गति देना, विनिर्माण क्षमता बढ़ाना और उद्योगों की शीघ्र स्थापना सुनिश्चित करना है।

वर्तमान लीज-एंड-बिल्ड मॉडल में उद्यमियों को भूमि लेने के बाद भवन, आंतरिक सड़क, ड्रेनेज, एसटीपी/ईटीपी और अग्निशमन जैसी सुविधाओं पर भारी निवेश करना पड़ता है, जिससे उत्पादन शुरू होने में 18-36 माह लग जाते हैं, जबकि इस योजना के तहत पूर्व-निर्मित, उपयोगिताओं से युक्त औद्योगिक शेड्स उपलब्ध कराकर एमएसएमई सहित उद्योगों को तुरंत संचालन योग्य इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा, जिससे लागत घटेगी, उत्पादन तेजी से शुरू होगा और रोजगार सृजन बढ़ेगा। 

योजना में माइल्ड इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल-इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी कंपोनेंट्स, ऑटो सहायक उद्योग, टेक्सटाइल-गारमेंट, फूड प्रोसेसिंग, प्लास्टिक पैकेजिंग, डिफेंस-एयरोस्पेस और ईएसडीएम जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है, जबकि औद्योगिक विकास प्राधिकरण आवश्यकता अनुसार क्षेत्र-विशिष्ट सुविधाएं भी प्रदान करेंगे। इसके तहत भूमि का स्वामित्व प्राधिकरण के पास रहेगा और निजी डेवलपर (कन्सेशनायर) 45 वर्ष (अधिकतम 15 वर्ष विस्तार योग्य) के लिए डिजाइन, वित्तपोषण, निर्माण, संचालन और अनुरक्षण करेगा तथा उद्योगों को सब-लीज पर शेड्स उपलब्ध कराएगा। 

न्यूनतम 10 एकड़ भूमि (पायलट हेतु 15-20 एकड़ वरीयता) निर्धारित की गई है और न्यूनतम विकास दायित्व (MDO) तय कर भूमि के अनावश्यक संचयन को रोका जाएगा। योजना पूरी तरह वित्तीय अनुशासन पर आधारित है, जिसमें कोई बजटीय सहायता, वीजीएफ या सरकारी गारंटी नहीं होगी, जबकि प्राधिकरण को प्रीमियम, वार्षिक शुल्क और रेवेन्यू शेयर के माध्यम से आय प्राप्त होगी तथा परियोजना अवधि पूर्ण होने पर सभी परिसंपत्तियां उपयोग योग्य स्थिति में वापस प्राधिकरण को हस्तांतरित कर दी जाएंगी।
 

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