UP: प्रदेश में तकनीक के दम पर अवैध खनन पर शिकंजा, 2.41 लाख ई-नोटिस जारी, 756 करोड़ रुपये की वसूली
तकनीकी निगरानी प्रणाली लागू होने के बाद अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है। ई-नोटिस जारी कर बड़ी राशि की वसूली की गई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आरएफआईडी, कैमरों और कमांड सेंटर के माध्यम से खनन गतिविधियों की ऑनलाइन निगरानी कर राजस्व बढ़ाने और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।
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राज्य सरकार ने तकनीक का इस्तेमाल करके अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई की है। इसकी वजह से जहां दोषियों पर कार्रवाई भी हुई तो विभाग का राजस्व भी बढ़ा। एकीकृत खनन निगरानी तंत्र (आईएमएसएस) लागू होने के बाद से खनन विभाग ने अब तक 2.41 लाख से ज्यादा को ई-नोटिस जारी की और 756 करोड़ रुपये जुर्माने के तौर पर वसूले।
खनन विभाग की सचिव और निदेशक माला श्रीवास्तव ने बताया कि आईएमएसएस से खनन क्षेत्रों की जियो-फेंसिंग, कैमरा युक्त वे-ब्रिज, खनिज परिवहन करने वाले वाहनों पर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) माइन टैग, विभिन्न राजमार्गों पर आईओटी व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मानव रहित स्वचालित चेकगेट स्थापित किए गए हैं।
यह सब कुछ लखनऊ स्थित कमांड सेंटर से एकीकृत किया गया है, जहां से पूरे प्रदेश की गतिविधियों की निगरानी की जाती है। जिलों में चिह्नित अवैध गतिविधियों के खिलाफ तत्काल ई-नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 62 चेकगेट संचालित हैं, जबकि दो नए चेकगेट निर्माणाधीन हैं।
75 आरएफआईडी रीडर और एम-चेक एप की सहायता से निगरानी व्यवस्था को और सुदृढ़ किया गया है। अब तक 1.53 लाख से अधिक वाहनों पर आरएफआईडी माइन टैग लगाए जा चुके हैं, जिससे खनिज परिवहन की ऑनलाइन ट्रैकिंग संभव हो रही है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश खनन नीति 2017 के तहत एकीकृत खनन निगरानी तंत्र को लागू किया गया था। 16 जुलाई 2026 तक आईएमएसएस से 2.41 लाख से अधिक ई-नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इन ई-नोटिसों से 998 करोड़ रुपये से अधिक राशि वसूली जानी है, जिसमें से 756 करोड़ रुपये से ज्यादा वसूले जा चुके हैं।