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UP: 59 बोगस फर्मों के जरिये 500 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी, एक फर्म से 100 करोड़ का हुआ था खेल

सूरज शुक्ला, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Tue, 24 Mar 2026 12:05 PM IST
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सार

एसटीएफ जांच में 59 फर्जी फर्मों के जरिए 500 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी का खुलासा हुआ। आरोपी ने कई राज्यों में फर्में बनाकर धोखाधड़ी की। गरीब लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया। मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं और जांच जारी है।

UP: GST Evasion Exceeding ₹500 Crore Through 59 Bogus Firms; Single Firm Involved in Fraud Worth ₹100 Crore
GST चोरी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

एसटीएफ ने जीएसटी चोरी के मामले में गिरफ्तार आरोपी केशवानी अब्बास हुसैन रमजान अली को लेकर बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि उसने 59 और बोगस फर्में बना रखी थीं, जिनके जरिये 500 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी की गई।

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एसटीएफ ने इंदिरानगर में दर्ज जीएसटी चोरी के मामले में गुजरात के भावनगर निवासी केशवानी को पुणे से गिरफ्तार किया था। शुरुआती जांच में पता चला था कि आराध्या इंटरप्राइजेज नामक फर्म के जरिये आरोपी ने अपने साथी रईस के साथ मिलकर करीब 100 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की। गहन जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी कुल 59 फर्मों का संचालन कर रहा था, जिनमें से सभी फर्जी हैं।
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इन फर्मों के माध्यम से 500 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी की गई। इन सभी फर्मों का एक्सेस केशवानी और रईस के पास था। ये फर्में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, मुंबई और कर्नाटक समेत कई राज्यों के पतों पर रजिस्टर थीं। इनमें से आराध्या इंटरप्राइजेज समेत चार फर्में लखनऊ के पते पर दर्ज थीं, जिन पर कार्रवाई की गई है।

फर्म लखनऊ पते पर, खाता भावनगर में

जिस आराध्या इंटरप्राइजेज के जरिये 100 करोड़ रुपये का हेरफेर हुआ, वह इंदिरानगर के पते पर रजिस्टर है, जबकि उसका बैंक खाता भावनगर (गुजरात) में संचालित हो रहा था। इसी तरह लखनऊ के पते पर रजिस्टर अन्य तीन फर्में, एसएम ट्रेडर्स, राठौर इंटरप्राइजेज और गौड़ ट्रेडिंग में भी यही गड़बड़ी पाई गई। 


जिन पतों पर इन फर्मों के कार्यालय दर्ज हैं, वहां वास्तविकता में कुछ भी मौजूद नहीं है। एसटीएफ के अनुसार, आरोपी गरीब और जरूरतमंद लोगों को पैसों का लालच देकर उनके दस्तावेजों के आधार पर फर्में रजिस्टर कराते थे और उनके बैंक खातों व अन्य एक्सेस अपने पास रखते थे।

विभागीय अफसरों पर भी सवाल

फर्जी पतों पर फर्मों के पंजीकरण के इस पूरे मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। एसटीएफ की जांच और पहले सामने आए मामलों से स्पष्ट है कि कई स्तरों पर फर्जीवाड़ा होता रहा है। यदि पंजीकरण से पहले नियमों के अनुसार सत्यापन ठीक से किया जाए, तो ऐसे मामलों पर रोक लगाई जा सकती है।

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