यूपी: सीएचओ की हड़ताल के बीच लिया गया बड़ा फैसला, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की जिम्मेदारी संभालेंगी एएनएम
उत्तर प्रदेश में सीएचओ की हड़ताल के बीच उपकेंद्र स्तरीय आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की जिम्मेदारी एएनएम को सौंपी गई है, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं और दवा वितरण प्रभावित न हों। वहीं, राजकीय होम्योपैथी अस्पतालों में दवाओं की कमी पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। दवाओं की खरीद और दरों में अंतर की रिपोर्ट भी मांगी गई है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश में उपकेंद्र स्तर पर संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के संचालन की जिम्मेदारी अब एएनएम संभालेंगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने इस संबंध में आदेश जारी कर सभी जिलाधिकारियों (डीएम) और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को दिशा-निर्देश दिए हैं।
प्रदेश में करीब 29 हजार आयुष्मान आरोग्य मंदिर हैं, जिनमें लगभग 23 हजार उपकेंद्र स्तर पर संचालित होते हैं। इन केंद्रों पर तैनात कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) के हड़ताल पर होने के कारण स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन को लेकर नई व्यवस्था बनाई गई है।
सीएचओ की अनुपस्थिति में एएनएम संभालेंगी जिम्मेदारी
एनएचएम के निर्देश के मुताबिक, सीएचओ के अवकाश पर होने या बिना सूचना अनुपस्थित रहने की स्थिति में उपकेंद्र स्तरीय आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का संचालन एएनएम के माध्यम से कराया जाएगा। जिन केंद्रों पर सीएचओ और एएनएम दोनों तैनात नहीं हैं, वहां निकटतम एएनएम अथवा महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षक को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आरोग्य मंदिरों में निर्धारित स्वास्थ्य सेवाएं और दवा वितरण किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होने चाहिए।
अतिरिक्त जिम्मेदारी से एएनएम की बढ़ेंगी मुश्किलें
इस व्यवस्था के बाद एएनएम के सामने काम का दबाव बढ़ने की आशंका है। उनका कहना है कि टीकाकरण समेत कई अन्य जिम्मेदारियां पहले से उनके पास हैं। अब अपने केंद्र के काम के साथ आसपास के आरोग्य मंदिरों की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ सकती है। इससे उनके काम के घंटे बढ़ने और नियमित कार्य प्रभावित होने की चिंता है।
खरीददरों में अंतर के मामले में भी रिपोर्ट तलब
उत्तर प्रदेश के राजकीय होम्योपैथी अस्पतालों में दवाओं की कमी होने पर संबंधित जिला होम्योपैथी अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। होम्योपैथी विभाग के निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार सिंह ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। निदेशक ने सभी जिला होम्योपैथी अधिकारियों और राजकीय होम्योपैथी मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया है कि मरीजों की जरूरत के मुताबिक पर्याप्त मात्रा में दवाओं की खरीद सुनिश्चित की जाए। दवाओं की खरीद में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
दवाओं की खरीद दरों में अंतर की जांच
होम्योपैथी दवाओं की खरीद दरों में अंतर के मामले की भी जांच शुरू की गई है। निदेशक ने सभी राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों और जिला होम्योपैथी अधिकारियों से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है। निर्देशों के अनुसार, जिलों और मेडिकल कॉलेजों में दवाओं की खरीद जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से ही की जानी है। विभाग का जोर दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने और खरीद प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करने पर है।