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UP: इन्द्रदेव सिंह हत्याकांड में लखनऊ कोर्ट का बड़ा फैसला, तीनों दोषियों को आजीवन कारावास

Tue, 07 Jul 2026 05:37 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ
डिजिटल डेस्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Tue, 07 Jul 2026 05:37 PM IST
सार

बहुचर्चित हत्या मामले में अदालत ने तीनों दोषियों को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। फैसला सुनाए जाने के समय पीड़ित परिवार अदालत में मौजूद रहा, लेकिन उन्होंने मीडिया से बातचीत नहीं की। निर्णय के बाद अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं।

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UP: Major verdict by Lucknow court in the Indra Dev Singh murder case; all three convicts sentenced to life im
इन्द्रदेव सिंह हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

इन्द्रदेव सिंह हत्याकांड में अदालत ने तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषियों पर जुर्माना भी लगाया है। फैसला सुनाए जाने के दौरान लक्ष्मी सिंह अपनी मां के साथ अदालत में मौजूद रहीं। निर्णय के बाद परिवार के सदस्यों ने मीडिया से बातचीत करने से इनकार कर दिया।

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लंबे समय से चर्चित इस मामले में अदालत के फैसले को पीड़ित पक्ष के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फैसला सुनने के बाद अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और पुलिस की निगरानी में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं।

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8 अगस्त 2002 को दिनदहाड़े हुई थी हत्या

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 8 अगस्त 2002 को शाम करीब 4 से 4:30 बजे के बीच कैसरबाग टेलीफोन एक्सचेंज के पीछे बक्शी दीदी के घर के पास अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद उनकी पत्नी नयनतारा सिंह ने थाना कैसरबाग में कई नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।

राज्य सरकार की सिफारिश पर सीबीआई को सौंपी गई थी जांच

उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी। विवेचना के दौरान सीबीआई ने मन्नालाल गुप्ता, वेद प्रकाश उर्फ नेता, विक्रम यादव उर्फ कालिया, छोटेलाल, छोटू, बृजेश यादव उर्फ मुन्ना और पन्ना सिंह के नाम सामने लाए। जांच में यह भी सामने आया कि विक्रम यादव उर्फ कालिया ने 12 बोर के तमंचे से इंद्रदेव सिंह को गोली मारी थी।

 

22 साल चली कानूनी लड़ाई के बाद आया फैसला

सीबीआई ने वर्ष 2004 में आरोप पत्र दाखिल किया था और उसी वर्ष आरोप भी तय हुए थे। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने विक्रम यादव उर्फ कालिया, पन्ना सिंह और बृजेश यादव उर्फ मुन्ना को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/120-बी के तहत दोषी ठहराया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अन्य तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है।

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