UP: मायावती का अखिलेश यादव के 'ब्राह्मण प्रेम' पर हमला, बोलीं- ‘पीडीए’ में अब ‘पी’ से पंडित करना राजनीतिक छल
बसपा प्रमुख मायावती ने अखिलेश यादव के पीडीए में ‘पी’ को ‘पंडित’ बताए जाने पर सपा पर निशाना साधा। उन्होंने इसे राजनीतिक छल और चुनावी स्वार्थ बताया। मायावती ने कहा कि सपा संकीर्ण जातिवादी राजनीति करती है, जबकि बसपा सर्वसमाज हित की नीति पर चलती है और लोगों को ऐसी राजनीति से सावधान रहना चाहिए।
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बसपा प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी के ‘पीडीए’ फॉर्मूले को लेकर सपा पर तीखा हमला बोला है। शनिवार को सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि बसपा ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति पर चलने वाली सर्वसमाज हितैषी अंबेडकरवादी पार्टी है और उत्तर प्रदेश में चार बार इसी आधार पर सरकार चला चुकी है।
मायावती ने आरोप लगाया कि सपा अपनी संकीर्ण जातिवादी राजनीति और चुनावी स्वार्थ के कारण समय-समय पर अपना रंग बदलती रहती है। उन्होंने कहा कि सपा पहले पीडीए में ‘पी’ से पिछड़ा प्रचारित करती थी, लेकिन अब अपरकास्ट, खासकर ब्राह्मण समाज के बसपा से तेजी से जुड़ने और पार्टी द्वारा उन्हें उम्मीदवार बनाए जाने से विचलित होकर ‘पी’ से ‘पंडित’ करने लगी है।
1.जैसाकि सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति व सिद्धान्त पर अमल करने वाली सर्वसमाज-हितैषी अम्बेडकरवादी पार्टी है और यूपी में चार बार रही सरकार भी इसी के आधार पर चलायी है, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) अपनी संकीर्ण जातिवादी राजनीति व…
विज्ञापन विज्ञापन— Mayawati (@Mayawati) August 8, 2026
उन्होंने इसे सपा के राजनीतिक छल और छलावे का प्रमाण बताया। मायावती ने कहा कि ऐसी राजनीति से किसी व्यक्ति को कुछ समय के लिए लाभ मिल सकता है, लेकिन पूरे समाज का भला नहीं हो सकता।बसपा प्रमुख ने सर्वसमाज के लोगों से ऐसी राजनीति से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि संकीर्ण जातिवादी राजनीति से सतर्क रहना समय की मांग और सर्वसमाज के हित में है।
पढ़िए मायावती ने क्या कहा
1. जैसाकि सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' की नीति व सिद्धान्त पर अमल करने वाली सर्वसमाज हितैषी अम्बेडकरवादी पार्टी है और यूपी में चार बार रही सरकार भी इसी के आधार पर चलायी है, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) अपनी संकीर्ण जातिवादी राजनीति व चुनावी स्वार्थ आदि की ख़ातिर जग ज़ाहिर तौर पर गिरगिट की तरह ही रंग बदलती रहती है।
2. इसी क्रम में सपा द्वारा प्रचारित इनका कथित 'पीडीए' अर्थात् (पिछड़ा, दलित, अक्लियत) में पहले 'पी' से 'पिछड़े' प्रचारित करने के बाद अब, अपरकास्ट समाज में ख़ासकर ब्राह्मण समाज को बी.एस.पी. से तेज़ी से जुड़ता हुआ देख व उसी के आधार पर ही पार्टी उम्मीदवार भी बनाये जाने से विचलित होकर, सपा ने अब 'पी' से 'पण्डित' कर दिया है, जो इनके राजनीतिक छल व छलावे का एक और जीता-जागता प्रमाण नहीं तो और क्या है?
3. ऐसे राजनीतिक छल व छलावे कि राजनीति से किसी व्यक्ति विशेष का कुछ समय के लिए वक़्ती तौर पर थोड़ा भला तो हो सकता है, किन्तु इससे उस सम्पूर्ण समाज का भला कभी नहीं हो सकता है। इसलिए सर्वसमाज के लोगों को ऐसी छलावापूर्ण समाजवादी पार्टी (सपा) व उसकी ऐसी संकीर्ण जातिवादी राजनीति से ज़रूर सावधान रहना चाहिये, यह समय की मांग व सर्वसमाज के हित में भी है।