यूपी: चुनावी तेवर में लौटीं मायावती, एक महीने में ही पार्टी तय कर देगी टिकट; जेन जी पर होगा खास फोकस
UP assembly elections: बसपा सुप्रीमो ने बैठक में कहा कि यूपी की जनता विरोधी पार्टियों के ऐसे खुल्लमखुल्ला छलावों व विश्वासघात आदि से बचें और चुनाव में अपनी मर्जी के हिसाब से निष्पक्ष होकर वोट करें।
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बहुजन समाज पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सितंबर माह में अपने अधिकांश टिकट फाइनल करने की तैयारी में है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को यूपी के सभी पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों के साथ चुनावी तैयारियों पर मंथन किया। इस दौरान उन्होंने अन्य दलों की चुनावी रेवड़ियों से सावधान रहने को कहा। खासकर महिलाओं को भाजपा और सपा द्वारा हर साल हजारों रुपये देने के प्रलोभन से आगाह किया। वहीं दूसरी ओर उन्होंने जेन जी की समस्याओं का समर्थन करते हुए सरकारों से उनका निस्तारण करने को कहा।
बसपा सुप्रीमो ने बैठक में कहा कि यूपी की जनता विरोधी पार्टियों के ऐसे खुल्लमखुल्ला छलावों व विश्वासघात आदि से बचें और चुनाव में अपनी मर्जी के हिसाब से निष्पक्ष होकर वोट करें। देश के विभिन्न राज्यों में चुनाव के बाद सरकार बन जाने पर ऐसी ही लगातार वादाखिलाफी और विश्वासघात जारी है। बसपा के संघर्ष के साथ 'जेन-जी और जेन-अल्फा' तक को ऐसे जनविरोधी रवैयों के कारण संघर्ष करना पड़ा जिसके बाद उन्हें पुलिस के मुकदमे आदि जैसे सरकारी दमन का सामना करना पड़ा है। वर्तमान में प्रदेश के लोगों को महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी व पिछड़ेपन की वजह से मजबूरी में पलायन करना पड़ रहा है। सरकार जो भी घोषणाएं कर रही है वह ऊंट के मुंह में जीरा के समान हैं।
कांशीराम की पुण्यतिथि पर होगा कार्यक्रम
उन्होंने कहा कि बसपा संस्थापक कांशीराम की 9 अक्तूबर को पुण्यतिथि का कार्यक्रम राजधानी स्थित कांशीराम स्मारक स्थल में होगा, जहां पश्चिम यूपी सहित पूरे प्रदेश भर के लोग जुटेंगे। यूपी-दिल्ली सीमा पर बसपा सरकार द्वारा स्थापित 'बहुजन प्रेरणा केंद्र' में रखरखाव का सरकारी कार्य जारी होने की वजह से कार्यक्रम नहीं होगा।
बाढ़ पीड़ितों की करें मदद
उन्होंने नेपाल में बाढ़ की प्रलय में भारतीयों आदि की जान-माल की क्षति पर पीड़ित परिवारों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि यूपी में भी बाढ़ पीड़ितों की केंद्र व राज्य सरकारों को मदद करनी चाहिए। वरना खासकर पूर्वांचल के लोगों का जीवन गरीबी, भूख और कर्ज के शोषण आदि की मार से और भी अधिक कठिन होता जाएगा। बाढ़ के प्रकोप से बचने के लिए इसका स्थायाी समाधान तलाशने की जरूरत भी है।