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UP: गंगा एक्सप्रेसवे पर गाड़ियां ही नहीं, दौड़ेंगे सपने और अवसर; मेरठ से प्रयागराज महज 6-7 घंटे में पहुंचेंगे

डिजिटल डेस्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Wed, 29 Apr 2026 03:16 PM IST
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सार

गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक विकास की नई रफ्तार देगा। इससे यात्रा समय घटेगा, व्यापार और निवेश बढ़ेगा, उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और लाखों रोजगार के अवसर बनेंगे। यह परियोजना उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर वन ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

UP: On the Ganga Expressway, not just vehicles—dreams and opportunities will race ahead; travel from Meerut to
सीएम योगी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

सुबह का समय है… मेरठ के बिजौली गांव से एक गाड़ी हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे पर उतरती है। 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हुई यह गाड़ी खेतों, कस्बों और कई शहरों को पार करती है। रास्ते में आधुनिक टोल प्लाजा, फ्यूल स्टेशन, वे-साइड सुविधाएं और औद्योगिक नोड्स दिखाई देते हैं।

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शाम होते-होते यही गाड़ी प्रयागराज पहुंच जाती है, वह सफर जो कभी 10-12 घंटे का समय लेता था, अब 6-7 घंटे में पूरा हो जाता है। यह सिर्फ एक सड़क नहीं… यह उत्तर प्रदेश की वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर दौड़ता हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर है।
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नवनिर्मित गंगा एक्सप्रेसवे पर सिर्फ गाड़ियां ही नहीं फर्राटा भरेंगी, उद्योग, निवेश, सपने और अवसर भी दौड़ेंगे। मेरठ से प्रयागराज तक विस्तारित यह सड़क वास्तव में एक नई आर्थिक धारा है, जो उत्तर प्रदेश को विकास की उस गति तक ले जाने जा रही है, जहां “वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी” का लक्ष्य हकीकत बनता दिखाई देगा।

पूर्व और पश्चिम यूपी को जोड़ता विकास कॉरिडोर

गंगा एक्सप्रेसवे 594 किमी लंबा ग्रीनफील्ड, एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे है, जो मेरठ से प्रयागराज तक 12 जिलों को एक सशक्त आर्थिक धुरी में पिरोता है। 6 लेन (भविष्य में 8 लेन तक विस्तार योग्य) वाला यह मेगा प्रोजेक्ट लगभग 36-37 हजार करोड़ रुपये की लागत से पीपीपी मॉडल पर विकसित किया गया है। 


यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की विकसित औद्योगिक बेल्ट को पूर्वांचल के कृषि और श्रम-आधारित क्षेत्रों से सीधे जोड़ते हुए उत्पादन, आपूर्ति और बाजार के बीच दूरी को कम करता है। परिणामस्वरूप, यह केवल यातायात का मार्ग नहीं, बल्कि निवेश, उद्योग और रोजगार को गति देने वाला वह कनेक्टिविटी इंजन है, जो प्रदेश की आर्थिक ताकत को नई ऊंचाई देने की क्षमता रखता है।

यात्रा से व्यापार तक समय की बचत, लागत में कमी

गंगा एक्सप्रेसवे के संचालन में आने के साथ मेरठ से प्रयागराज की यात्रा अब महज 6-7 घंटे में पूरी हो सकेगी, जबकि पहले यही दूरी तय करने में 10-12 घंटे लगते थे। यह समय की बचत सीधे तौर पर लॉजिस्टिक्स लागत में कमी का आधार बनेगी। तेज और निर्बाध आवागमन से सप्लाई चेन अधिक प्रभावी होगी, जिससे कृषि उत्पादों को खेत से बाजार तक पहुंचने में कम समय लगेगा और उनकी गुणवत्ता व मूल्य दोनों सुरक्षित रहेंगे। साथ ही, ई-कॉमर्स, वेयरहाउसिंग और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को नई गति मिलेगी। दरअसल, समय की यह बचत ही आर्थिक दक्षता में बदलती है और यही दक्षता किसी भी राज्य की विकास गति को कई गुना बढ़ा देती है।

12 जिलों में ‘इकोनॉमिक रेवोल्यूशन’

गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 जिलों को जोड़ते हुए एक व्यापक आर्थिक परिवर्तन की नींव रखता है। इन जिलों की भौगोलिक और आर्थिक विशेषताओं के अनुरूप विकास की नई संभावनाएं उभर रही हैं। मेरठ-हापुड़ में मैन्युफैक्चरिंग और स्पोर्ट्स गुड्स, बुलंदशहर-अमरोहा में फूड प्रोसेसिंग और डेयरी, शाहजहांपुर-हरदोई में एग्री-बेस्ड इंडस्ट्री, उन्नाव-रायबरेली में टेक्सटाइल और एमएसएमई, जबकि प्रयागराज लॉजिस्टिक्स और टूरिज्म हब के रूप में विकसित हो सकता है। इस तरह, यह एक्सप्रेसवे अलग-अलग आर्थिक क्षमताओं वाले इन जिलों को एकीकृत करते हुए उन्हें एक सिंगल, इंटरकनेक्टेड इकोनॉमिक नेटवर्क में बदल देता है, जहां उत्पादन, प्रसंस्करण और वितरण एक ही विकास धारा में प्रवाहित होते हैं।

 

इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, पूरा इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम

गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि एक इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट कॉरिडोर के रूप में तैयार किया गया है, जो परिवहन के साथ-साथ औद्योगिक विकास की मजबूत आधारशिला रखता है। इसमें 2 मुख्य टोल प्लाजा और 19 रैंप टोल के साथ सुगम प्रवेश-निकास व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जबकि 9 आधुनिक जन-सुविधा परिसरों में फूड कोर्ट, फ्यूल स्टेशन और रेस्ट एरिया जैसी सुविधाएं यात्रियों और लॉजिस्टिक्स ऑपरेशंस को सपोर्ट करेंगी।

इसके अलावा, 960 मीटर लंबा गंगा ब्रिज और 720 मीटर का रामगंगा ब्रिज जैसी इंजीनियरिंग संरचनाएं इसकी क्षमता को और मजबूत बनाती हैं। 120 मीटर का राइट ऑफ वे भविष्य में विस्तार और अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराता है। समग्र रूप से यह एक्सप्रेसवे एक ऐसी सुविचारित संरचना है, जिसे लॉन्ग-टर्म इंडस्ट्रियल ग्रोथ, तेज ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और सतत आर्थिक विकास को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।

 

निवेश का हाईवे: रोजगार का इंजन, यूपी बनेगा ‘नेशनल लीडर’

गंगा एक्सप्रेसवे के दोनों ओर विकसित हो रहे इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स हब इसे निवेश का सशक्त केंद्र बना रहे हैं, जहां वेयरहाउसिंग और कोल्ड स्टोरेज, एमएसएमई क्लस्टर, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और डिफेंस-मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े उद्योग तेजी से आकार ले रहे हैं।

यह पूरा इकोसिस्टम न केवल सप्लाई चेन को मजबूत करेगा, बल्कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के लाखों अवसर भी सृजित करेगा, जिससे स्थानीय युवाओं को अपने ही जिले में काम मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी। वहीं, इस मेगा प्रोजेक्ट के संचालन में आते ही उत्तर प्रदेश देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में अग्रणी भूमिका में पहुंच जाएगा।

इसकी हिस्सेदारी लगभग 60% तक हो सकती है। यह स्पष्ट संकेत है कि राज्य अब इंफ्रास्ट्रक्चर-ड्रिवन ग्रोथ मॉडल पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, जहां सड़कें सिर्फ रास्ते नहीं, बल्कि आर्थिक नेतृत्व का माध्यम बन रही हैं।

वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी का आधार

उत्तर प्रदेश ने 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का जो लक्ष्य निर्धारित किया है, उसमें गंगा एक्सप्रेसवे एक मजबूत आधार स्तंभ की भूमिका निभाने जा रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी निवेश को आकर्षित करती है, निवेश से उद्योग स्थापित होते हैं, उद्योग रोजगार पैदा करते हैं, रोजगार से लोगों की आय बढ़ती है और बढ़ी हुई आय व्यापक आर्थिक विस्तार का मार्ग प्रशस्त करती है।

इसी क्रम में गंगा एक्सप्रेसवे एक ‘इकोनॉमिक मल्टीप्लायर’ के रूप में कार्य करेगा, जो विकास की इस पूरी श्रृंखला को गति देता हुआ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है।

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