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UP: सारथी पोर्टल पर कमियों का अंबार, दलाल उठा रहे फायदा, मृतकों का बन रहा लर्नर लाइसेंस, अफसर मौन
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Mon, 04 May 2026 09:30 AM IST
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सार
एनआईसी के सारथी पोर्टल की कमियों को लगातार उजागर किया जाता रहा है। लेकिन परिवहन विभाग व एनआईसी प्रशासन के बीच सिर्फ पत्राचार ही हुआ है। कोई ठोस कार्रवाई आज तक नहीं हो सकी है।
- फोटो : freepik
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विस्तार
एनआईसी का सारथी पोर्टल खामियों से भरा हुआ है। लर्नर लाइसेंस से लेकर बैकलॉग एंट्री और आधार की दिक्कतें बरकरार हैं, जिसका फायदा अफसरों की शह पर दलाल उठा रहे हैं। खास बात यह है कि इन लूपहोलों पर कार्रवाई के लिए परिवहन विभाग की ओर से एनआईसी को चिट्ठियां लिखी जाती हैं, लेकिन कोई कारगर हल नहीं निकल सका है।
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दरअसल, बीते हफ्ते अमर उजाला की ओर से बस्ती में 4500 से अधिक फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस दलालों द्वारा बनवाने के मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। इसमें दलालों ने अरुणाचल प्रदेश के सेप्पा व सियांग जिलों में बैकलॉग एंट्री करवाई और बस्ती में आवेदकों से मोटी रकम लेकर डीएल बनवा दिए। इसमें हेवी डीएल भी शामिल हैं।
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इसके बाद जांच-पड़ताल शुरू हुई तो एनआईसी की खामियां भी उजागर हुईं। हालांकि एनआईसी के सारथी पोर्टल की कमियों को लगातार उजागर किया जाता रहा है। लेकिन परिवहन विभाग व एनआईसी प्रशासन के बीच सिर्फ पत्राचार ही हुआ है। कोई ठोस कार्रवाई आज तक नहीं हो सकी है। ऐसे में एनआईसी पोर्टल की कमियां बरकरार हैं और इसका फायदा दलाल खुलेआम उठा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि पिछले तीन साल में दो दर्जन से अधिक पत्र एनआईसी को लिखे गए हैं, लेकिन सभी पत्रों के नतीजे सिफर ही रहे।
आधार की समस्या से 6500 आवेदक परेशान
गत वर्ष अक्तूबर में आधार ने पिता व पति का नाम कार्ड से हटाने का निर्णय लिया। जबकि पोर्टल पर लर्नर लाइसेंस बनवाने के दौरान आधार से पूरा विवरण लिया जाता है। पिता का नाम नहीं होने से 6500 आवेदकों के लर्नर नहीं बन सके हैं। इस समस्या को लेकर एनआईसी से पत्राचार हुआ। नई व्यवस्था का दावा भी किया गया, लेकिन समस्या अभी भी बरकरार है
प्रयागराज में न्यूड फोटो लगाकर आवेदक ने लर्नर लाइसेंस बनवा लिया
लर्नर लाइसेंस बनवाने में कई कमियां अभी बनी हुई हैं। हाल ही में प्रयागराज में न्यूड फोटो लगाकर आवेदक ने लर्नर लाइसेंस बनवा लिया। इससे पूर्व लखनऊ स्थित ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ में मृतक का लर्नर डीएल बनवाया गया। इतना ही नहीं देवारोड एआरटीओ में वीडियो के जरिए आवेदक का फर्जी लर्नर डीएल बनवा लिया गया। इन कमियों को दूर करने के लिए भी एनआईसी ने संजीदगी नहीं दिखाई। लर्नर लाइसेंस बनवाने के दौरान टेस्ट देने पर चेहरे की पहचान में भी दिक्कतें आती हैं।
स्मार्ट लॉक एप नहीं होता है डाउनलोड
लर्नर लाइसेंस ऑनलाइन बनता है। इसे बनवाने के दौरान आवेदकों को स्मार्ट लॉक एप डाउनलोड करना पड़ता है। लेकिन यह एप डाउनलोड ही नहीं होता। ऐसे में आवेदकों को दलालों का सहारा लेना पड़ता है। यह समस्या भी अधिकारियों ने एनआईसी को बताई, लेकिन सारथी पर दिक्कत बनी है। एप डालनलोड नहीं होता, जिससे लर्नर डीएल बनवाने में मुश्किलें हो रही हैं।
बैकलॉग एंट्री पर रोक नहीं
वर्ष 2013 में सारथी पोर्टल आने के बाद सभी लाइसेंस ऑनलाइन बनाए जाने लगे। लेकिन एनआईसी ने पोर्टल पर बैकलॉग एंट्री बंद नहीं की। हाल यह हुआ कि बस्ती के डीएल के लिए बैकलॉग एंट्री अरुणाचल संहित देश के कई राज्यों से दलालों ने करवाई। परिवहन विभाग को पत्र लिखना पड़ा कि जिस जिले का डीएल हो, बैकलॉग एंट्री वहीं पर होनी चाहिए। लेकिन एनआईसी ने इसे समस्या को भी दूर नहीं किया।
बैकलॉग एंट्री पर रोक नहीं
वर्ष 2013 में सारथी पोर्टल आने के बाद सभी लाइसेंस ऑनलाइन बनाए जाने लगे। लेकिन एनआईसी ने पोर्टल पर बैकलॉग एंट्री बंद नहीं की। हाल यह हुआ कि बस्ती के डीएल के लिए बैकलॉग एंट्री अरुणाचल संहित देश के कई राज्यों से दलालों ने करवाई। परिवहन विभाग को पत्र लिखना पड़ा कि जिस जिले का डीएल हो, बैकलॉग एंट्री वहीं पर होनी चाहिए। लेकिन एनआईसी ने इसे समस्या को भी दूर नहीं किया।
