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यूपी: सीनियर टेक्नीशियन दो दिन तक डिजिटल अरेस्ट, ठग बोले-तुम पुलवामा हमले की आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हो

Thu, 10 Sep 2026 06:54 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला, लखनऊ
अमर उजाला, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Thu, 10 Sep 2026 06:54 PM IST
सार

लखनऊ में साइबर ठगों ने रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी को डिजिटल अरेस्ट कर पुलवामा हमले से जुड़ी आतंकी गतिविधियों में आरोपी बताया। फर्जी दस्तावेज और धमकियां देकर उनसे नौ लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। ठगों ने तीन लाख रुपये और मांगने का दबाव बनाया। साइबर क्राइम पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की है।

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UP Senior technician under 'digital arrest' fraudsters claimed involved terrorist act
डिजिटल अरेस्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साइबर जालसाजों ने रेलवे के सेवानिवृत्त सीनियर टेक्नीशियन इंदिरानगर के बेगम पूर्वा निवासी 60 वर्षीय वीरेंद्र कुमार को दो घंटे डिजिटल अरेस्ट रख कर उनसे नौ लाख रुपये वसूल लिए। पीड़ित ने बृहस्पतिवार को दो आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।

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वीरेंद्र ने बताया कि एक सितंबर की सुबह उनके पास अनजान नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई थी। फोन उठाने पर एक ने अपना नाम प्रेम कुमार गौतम और दूसरे ने शिवकुमार बताया। दोनों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और उन्हें अर्दब में लेने लगे। 
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आरोपियों ने उन्हें पुलवामा हमले की आतंकवादियों गतिविधियों में शामिल होने का आरोपी बनाते हुए उन पर एफआईआर दर्ज होने की बात कहने लगे। उन्हें इस मामले में 14 साल तक जेल भेजने की धमकी भी दी। यह सब सुनते ही वीरेंद्र घबरा गए। आरोपियों ने पीड़ित से बताया कि उनके मामले की जांच सीबीआई कर रही है।

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फर्जी कोर्ट से जारी वारंट भेजा

पीड़ित ने बताया कि ठगों ने उन्हें फर्जी हाईकोर्ट से जारी हुआ गिरफ्तारी वारंट और संपत्ति जब्त करने के आदेश संबंधी दस्तावेज भी भेज दिए। आरोपियों ने दबाव बनाने के लिए उनसे पूछताछ की मांग की और कॉल काट ली। पीड़ित का कहना है कि कुछ बाद उनके पास वीडियो कॉल आई। 

आरोपियों ने उन्होंने डिजिटल अरेस्ट कर लिया। आरोपी उन्हें मानसिक रूप से परेशान करने के लिए उल्टे-सीधे सवाल पूछने लगे। यह खेल अगले दिन दोपहर दो बजे तक चला। इसके बाद आरबीआई में रुपयों की जांच के नाम पर उनसे उनके खाते में जमा नकदी मांगी। घबराए पीड़ित ने ठगों की बात मान ली और अपने खाते में पड़े नौ लाख उन्हें ट्रांसफर कर दिए।

 

रकम ऐंठने पर भी ठग बना रहे दबाव

पीड़ित का कहना है कि आरोपियों जांच के नाम जो रकम ली थी वह नहीं लौटाई।आरोपी उन पर अभी भी जमानत के लिए सरकारी वकील करने और उसकी फीस के तीन लाख रुपये देने का दबाव बना रहे हैं। इतनी बड़ी पूंजी गंवाने पर वीरेंद्र काफी डर गए। कुछ दिन बाद बृहस्पतिवार को हिम्मत दिखाते हुए उन्होंने साइबर क्राइम थाने मं शिकायत की। इंस्पेक्टर आलोक राय ने बताया कि मामले की तफ्तीश की जा रही है।पीड़ित की रकम फ्रीज कराने के लिए बैंक से संपर्क किया जा रहा है।

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