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Lucknow News: लापता किशोरियों के मामलों में इतना खराब रवैया क्यों
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Thu, 11 Jun 2026 02:48 AM IST
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लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने नाबालिग लड़कियों के लापता होने की बढ़ती घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को न्यायालय ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को ऐसे मामलों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही, संबंधित न्यायिक अधिकारियों को भी एफआईआर के बाद जांचों की निगरानी करने के लिए कहा। अदालत ने पुलिस आयुक्त अमरेंद्र सेंगर से शहर के विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज 34 लापता लड़कियों की घटनाओं के संबंध में व्यक्तिगत हलफनामे पर तीन जुलाई को प्रगति रिपोर्ट भी मांगी।
न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की अवकाश कालीन पीठ ने एक नाबालिग लड़की के पिता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर यह आदेश दिया। न्यायालय ने लखनऊ में सभी लापता व्यक्तियों, विशेषकर नाबालिगों के मामलों का संज्ञान लिया। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की कि डीजीपी स्तर से लेकर शीर्ष आईपीएस अधिकारियों की तैनाती के बावजूद पुलिस का रवैया इतना खराब क्यों है।
अदालत के पूर्व आदेश पर पुलिस आयुक्त अमरेंद्र सेंगर और पुलिस उपायुक्त दीक्षा शर्मा ने हलफनामे दाखिल किए। पुलिस उपायुक्त दीक्षा शर्मा अन्य अधिकारियों के साथ अदालत में उपस्थित थीं। हलफनामों में खुलासा हुआ कि छह महीने में 261 नाबालिग लड़कियां लापता हुईं। इनमें से 227 को पुलिस ने बरामद कर लिया है। हालांकि, 34 नाबालिग लड़कियां अभी भी लापता हैं। इनमें पश्चिम जोन से 6, पूर्वी जोन से 10, उत्तरी जोन से 6, दक्षिणी जोन से 7 और मध्य जोन से 5 नाबालिग लड़कियां शामिल हैं।
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पुलिस उपायुक्त दीक्षा शर्मा ने न्यायालय को मामलों की निगरानी का आश्वासन दिया। लखनऊ के सभी जोन के पुलिस उपायुक्त भी अपने-अपने जोन के मामलों की प्राथमिकता से निगरानी करेंगे। जांच संतोषजनक नहीं पाई जाती है, तो जांच अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। यह कार्रवाई समाज के सदस्यों और नाबालिग लड़कियों की रक्षा के लिए होगी। इसकी रिपोर्ट सात दिनों के भीतर संबंधित न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी।
पुलिस अफसरों को निगरानी के निर्देश
अदालत ने न्यायिक अधिकारियों को एफआईआर के बाद प्रस्तुत जांचों की निगरानी करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने चेतावनी दी कि वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से नरमी पाए जाने पर उचित आदेश पारित किए जाएंगे। बुधवार को उपस्थित सभी पुलिस अधिकारियों को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी गई। यह छूट इस आश्वासन पर मिली कि वे 34 लड़कियों को बरामद करेंगे और शामिल व्यक्तियों का पता लगाएंगे। न्यायालय ने मामले को 3 जुलाई को सूचीबद्ध किया है। कोर्ट ने कहा कि सभी जोन के पुलिस उपायुक्त जांच की प्रगति की लिखित सूचना संबंधित न्यायिक अधिकारी/मजिस्ट्रेट को नहीं देते, तो यह न्यायालय की अवमानना होगी।
न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की अवकाश कालीन पीठ ने एक नाबालिग लड़की के पिता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर यह आदेश दिया। न्यायालय ने लखनऊ में सभी लापता व्यक्तियों, विशेषकर नाबालिगों के मामलों का संज्ञान लिया। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की कि डीजीपी स्तर से लेकर शीर्ष आईपीएस अधिकारियों की तैनाती के बावजूद पुलिस का रवैया इतना खराब क्यों है।
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अदालत के पूर्व आदेश पर पुलिस आयुक्त अमरेंद्र सेंगर और पुलिस उपायुक्त दीक्षा शर्मा ने हलफनामे दाखिल किए। पुलिस उपायुक्त दीक्षा शर्मा अन्य अधिकारियों के साथ अदालत में उपस्थित थीं। हलफनामों में खुलासा हुआ कि छह महीने में 261 नाबालिग लड़कियां लापता हुईं। इनमें से 227 को पुलिस ने बरामद कर लिया है। हालांकि, 34 नाबालिग लड़कियां अभी भी लापता हैं। इनमें पश्चिम जोन से 6, पूर्वी जोन से 10, उत्तरी जोन से 6, दक्षिणी जोन से 7 और मध्य जोन से 5 नाबालिग लड़कियां शामिल हैं।
पुलिस उपायुक्त दीक्षा शर्मा ने न्यायालय को मामलों की निगरानी का आश्वासन दिया। लखनऊ के सभी जोन के पुलिस उपायुक्त भी अपने-अपने जोन के मामलों की प्राथमिकता से निगरानी करेंगे। जांच संतोषजनक नहीं पाई जाती है, तो जांच अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। यह कार्रवाई समाज के सदस्यों और नाबालिग लड़कियों की रक्षा के लिए होगी। इसकी रिपोर्ट सात दिनों के भीतर संबंधित न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी।
पुलिस अफसरों को निगरानी के निर्देश
अदालत ने न्यायिक अधिकारियों को एफआईआर के बाद प्रस्तुत जांचों की निगरानी करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने चेतावनी दी कि वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से नरमी पाए जाने पर उचित आदेश पारित किए जाएंगे। बुधवार को उपस्थित सभी पुलिस अधिकारियों को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी गई। यह छूट इस आश्वासन पर मिली कि वे 34 लड़कियों को बरामद करेंगे और शामिल व्यक्तियों का पता लगाएंगे। न्यायालय ने मामले को 3 जुलाई को सूचीबद्ध किया है। कोर्ट ने कहा कि सभी जोन के पुलिस उपायुक्त जांच की प्रगति की लिखित सूचना संबंधित न्यायिक अधिकारी/मजिस्ट्रेट को नहीं देते, तो यह न्यायालय की अवमानना होगी।