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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   A multi-crore DMF scam! Highway potholes are labeled 'ponds,' and payments are also made for old reservoirs.

MP News: डीएमएफ में करोड़ों का घोटाला! हाईवे के गड्ढों को बताया 'तालाब', पुराने जलाशयों पर भी भुगतान

Wed, 08 Jul 2026 10:09 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शहडोल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शहडोल Published by: दिनेश शर्मा Updated Wed, 08 Jul 2026 10:09 PM IST
सार

शहडोल में डीएमएफ योजनाओं में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि पुराने तालाब, नाले और गड्ढों को नया तालाब बताकर करोड़ों रुपये स्वीकृत किए गए। कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने जांच के आदेश देते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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A multi-crore DMF scam! Highway potholes are labeled 'ponds,' and payments are also made for old reservoirs.
शहडोल में हाईवे के गड्ढों को भी तालाब बताकर भुगतान लेने का मामला सामने आया है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आदिवासी बाहुल्य शहडोल जिले में जल संरक्षण और ग्रामीण विकास के नाम पर डीएमएफ (जिला खनिज प्रतिष्ठान) की योजनाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि जहां नए तालाब बनने थे, वहां पहले से मौजूद तालाब, पुराने नाले और यहां तक कि हाईवे निर्माण के दौरान मुरूम निकालने से बने गड्ढों को ही सरकारी रिकॉर्ड में "नवीन तालाब" बताकर लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया।
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जानकारी के अनुसार, जनपद पंचायत जयसिंहनगर की जोरा ग्राम पंचायत में रीवा-शहडोल हाईवे निर्माण के दौरान सड़क किनारे मुरूम निकालने से करीब दो से ढाई एकड़ का बड़ा गड्ढा बन गया था। आरोप है कि इसी गड्ढे को नवीन तालाब दर्शाकर लगभग 25 लाख रुपये की राशि स्वीकृत कर भुगतान कर दिया गया।
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इसी तरह बरना पंचायत के झिरिया गांव में करीब 20 वर्ष पुराना तालाब मौजूद है, जिसकी पाल तीन वर्ष पहले टूट गई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार इसकी मरम्मत कराई जानी चाहिए थी, लेकिन विभाग ने उसी स्थान पर 20.56 लाख रुपये की लागत से "नवीन तालाब निर्माण" की स्वीकृति जारी कर दी। ब्यौहारी जनपद के तेंदुआ गांव में बाणसागर डैम के समीप दर्री नाले पर पुलिया और पिचिंग का कार्य पहले ही डीएमएफ मद से लगभग 12 लाख रुपये की लागत से कराया जा चुका था। बाद में उसी स्थान को सांसद मद के प्रस्ताव पर करीब 25 लाख रुपये की लागत से नवीन तालाब निर्माण दर्शाकर स्वीकृत कर दिया गया। मौके पर नया तालाब नहीं मिला, जबकि भुगतान होने की बात सामने आई है।


रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2022-23 की कार्ययोजना में डीएमएफ मद से तालाब निर्माण, घाट निर्माण और सौंदर्यीकरण के 43 कार्य स्वीकृत किए गए थे। इन पर 7.48 करोड़ रुपये की स्वीकृति और 5.75 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित था। पड़ताल में दावा किया गया है कि आधे से अधिक परियोजनाएं पहले से मौजूद जलाशयों या अन्य संरचनाओं पर स्वीकृत की गईं।

इस मामले में कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने कहा कि डीएमएफ से पुराने तालाबों को नया दिखाकर कार्य कराने का प्रावधान नहीं है। यदि ऐसे मामले सामने आए हैं तो जिला स्तर पर टीम गठित कर जांच कराई जाएगी। जांच में अनियमितता मिलने पर संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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