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Anuppur News: वकील बनकर बेटे ने हाईकोर्ट में लड़ा पिता का केस, 11 साल बाद वापस मिली पुलिस आरक्षक की नौकरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अनूपपुर
Published by: अनूपपुर ब्यूरो
Updated Sun, 06 Apr 2025 12:49 PM IST
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सार
आरक्षक मिथिलेश पांडे को नौकरी पर पुनः बहाल करने के लिए हाईकोर्ट ने आदेश दिया, जिसके बाद अनूपपुर पुलिस अधीक्षक ने उन्हें पुनः सेवा में बहाल किया। 5 अप्रैल को आरक्षक ने अनूपपुर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
जबलपुर हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
अनूपपुर जिले में नौकरी से बर्खास्त पिता को वकील बनकर बेटे ने न्याय दिलाते हुए फिर से नौकरी वापस दिला दी। 11 साल से पहले पिता पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्रवाई करते हुए उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था।
दरअसल, 2013 में उमरिया थाना में आरक्षक पद पर पदस्थ अनूपपुर जिले के जमुना कॉलरी निवासी मिथिलेश पांडे को आय से अधिक संपत्ति के मामले में विभागीय जांच के बाद पुलिस विभाग ने सेवा से पृथक कर दिया था। नौकरी जाने के बाद आरक्षक मिथिलेश पांडे ने पुलिस विभाग के आला अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखा, लेकिन उनके पक्ष को दरकिनार कर दिया गया। दिसंबर 2013 में आरक्षक मिथिलेश पांडे ने पद से पृथक किए जाने के मामले को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और याचिका दायर करते हुए न्याय की मांग की।
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हाई कोर्ट में मामला लगने के बाद पुलिस विभाग को हाई कोर्ट से आदेश भी जारी किए गए, लेकिन उस आदेश से विभाग संतुष्ट नहीं हुआ और मामला निरंतर चलता रहा। वर्ष 2024 में पुलिस आरक्षक मिथिलेश पांडे के बेटे अभिषेक पांडे ने वकालत की डिग्री हासिल करने के पश्चात जबलपुर हाई कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। इसके साथ ही उन्होंने सर्वप्रथम अपने पिता मिथिलेश पांडे का केस हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसे न्यायमूर्ति ने स्वीकार किया। अधिवक्ता अभिषेक पांडे ने अपने पिता के खिलाफ लगे तमाम आरोपों को हाई कोर्ट के समक्ष जिरह के माध्यम से खारिज करवाया और आदेश को निरस्त करने में सफलता प्राप्त की।
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आरक्षक मिथिलेश पांडे को नौकरी पर पुनः बहाल करने के लिए न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की बेंच ने आदेश दिया, जिसके बाद अनूपपुर पुलिस अधीक्षक ने उन्हें पुनः सेवा में बहाल किया। 5 अप्रैल को आरक्षक मिथिलेश पांडे ने अनूपपुर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 11 साल की लंबी लड़ाई के बाद बेटे ने अपने पिता को न्याय दिलाया और पांडे परिवार में एक बार फिर खुशियां लौट आईं। इस अवसर पर आरक्षक मिथिलेश पांडे के निवास पर स्थानीय लोगों ने उन्हें बधाई दी।
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दरअसल, 2013 में उमरिया थाना में आरक्षक पद पर पदस्थ अनूपपुर जिले के जमुना कॉलरी निवासी मिथिलेश पांडे को आय से अधिक संपत्ति के मामले में विभागीय जांच के बाद पुलिस विभाग ने सेवा से पृथक कर दिया था। नौकरी जाने के बाद आरक्षक मिथिलेश पांडे ने पुलिस विभाग के आला अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखा, लेकिन उनके पक्ष को दरकिनार कर दिया गया। दिसंबर 2013 में आरक्षक मिथिलेश पांडे ने पद से पृथक किए जाने के मामले को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और याचिका दायर करते हुए न्याय की मांग की।
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हाई कोर्ट में मामला लगने के बाद पुलिस विभाग को हाई कोर्ट से आदेश भी जारी किए गए, लेकिन उस आदेश से विभाग संतुष्ट नहीं हुआ और मामला निरंतर चलता रहा। वर्ष 2024 में पुलिस आरक्षक मिथिलेश पांडे के बेटे अभिषेक पांडे ने वकालत की डिग्री हासिल करने के पश्चात जबलपुर हाई कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। इसके साथ ही उन्होंने सर्वप्रथम अपने पिता मिथिलेश पांडे का केस हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसे न्यायमूर्ति ने स्वीकार किया। अधिवक्ता अभिषेक पांडे ने अपने पिता के खिलाफ लगे तमाम आरोपों को हाई कोर्ट के समक्ष जिरह के माध्यम से खारिज करवाया और आदेश को निरस्त करने में सफलता प्राप्त की।
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आरक्षक मिथिलेश पांडे को नौकरी पर पुनः बहाल करने के लिए न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की बेंच ने आदेश दिया, जिसके बाद अनूपपुर पुलिस अधीक्षक ने उन्हें पुनः सेवा में बहाल किया। 5 अप्रैल को आरक्षक मिथिलेश पांडे ने अनूपपुर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 11 साल की लंबी लड़ाई के बाद बेटे ने अपने पिता को न्याय दिलाया और पांडे परिवार में एक बार फिर खुशियां लौट आईं। इस अवसर पर आरक्षक मिथिलेश पांडे के निवास पर स्थानीय लोगों ने उन्हें बधाई दी।
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