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भोपाल के 78 स्कूल हाईटेक: अब स्क्रीन पर पढ़ाई, नए सत्र से डिजिटल टीचिंग, यू-ट्यूब से समझाए जाएंगे कठिन चैप्टर
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 26 Mar 2026 07:09 PM IST
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सार
भोपाल के सरकारी स्कूलों में अब पारंपरिक पढ़ाई की जगह डिजिटल स्मार्ट क्लास ले रही है। 78 स्कूलों से शुरू हो रहा यह प्रयोग शिक्षा को आसान और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
स्कूल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी भोपाल के सरकारी स्कूल अब डिजिटल युग में कदम रखने जा रहे हैं। नए शैक्षणिक सत्र से 78 स्कूलों में स्मार्ट क्लास शुरू की जा रही हैं, जहां बच्चों को किताबों के बजाय स्क्रीन के जरिए पढ़ाया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। सभी स्कूलों से दो दो लोगों को इसके लिए तैयार किया गया है।
बैरसिया और फंदा के स्कूल शामिल
शिक्षा विभाग ने बैरसिया और फंदा क्षेत्र के 78 स्कूलों को इस प्रोजेक्ट के लिए चुना है। इन स्कूलों में स्क्रीन, डिजिटल कंटेंट और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि पढ़ाई को इंटरैक्टिव और आसान बनाया जा सके।
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9वीं से 12वीं तक स्मार्ट पढ़ाई
अधिकारियों के मुताबिक, कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को इस नई तकनीक से पढ़ाया जाएगा। विषयों के कठिन चैप्टर अब स्क्रीन पर विजुअल तरीके से समझाए जाएंगे, जिससे बच्चों की समझ बेहतर होगी। स्मार्ट क्लास को प्रभावी बनाने के लिए विषय शिक्षकों को ट्रेनिंग दी गई है। तकनीकी विशेषज्ञ शिक्षकों को स्क्रीन ऑपरेट करने और डिजिटल कंटेंट के उपयोग की पूरी जानकारी दी गई है।
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यू-ट्यूब से भी पढ़ाई होगी आसान
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को बताया गया कि वे यू-ट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़कर कठिन विषयों को सरल तरीके से समझा सकते हैं। जरूरत के अनुसार वीडियो सर्च कर बच्चों को स्क्रीन पर विस्तार से पढ़ाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि अभी तक राजधानी के करीब 85 परसेंट स्कूलों को कर कर लिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार के अनुसार कई स्कूलों में तो पहले से इसकी शुरुआत की गई है लेकिन वृहद स्तर पर पहली बार नए सत्र से शुरुआत की जाएगी। उन्होंने बताया कि अगले सत्र में जिले की सभी स्कूलों में भी स्मार्ट क्लास लागू की जाएंगी।
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बैरसिया और फंदा के स्कूल शामिल
शिक्षा विभाग ने बैरसिया और फंदा क्षेत्र के 78 स्कूलों को इस प्रोजेक्ट के लिए चुना है। इन स्कूलों में स्क्रीन, डिजिटल कंटेंट और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि पढ़ाई को इंटरैक्टिव और आसान बनाया जा सके।
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9वीं से 12वीं तक स्मार्ट पढ़ाई
अधिकारियों के मुताबिक, कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को इस नई तकनीक से पढ़ाया जाएगा। विषयों के कठिन चैप्टर अब स्क्रीन पर विजुअल तरीके से समझाए जाएंगे, जिससे बच्चों की समझ बेहतर होगी। स्मार्ट क्लास को प्रभावी बनाने के लिए विषय शिक्षकों को ट्रेनिंग दी गई है। तकनीकी विशेषज्ञ शिक्षकों को स्क्रीन ऑपरेट करने और डिजिटल कंटेंट के उपयोग की पूरी जानकारी दी गई है।
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प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को बताया गया कि वे यू-ट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़कर कठिन विषयों को सरल तरीके से समझा सकते हैं। जरूरत के अनुसार वीडियो सर्च कर बच्चों को स्क्रीन पर विस्तार से पढ़ाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि अभी तक राजधानी के करीब 85 परसेंट स्कूलों को कर कर लिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार के अनुसार कई स्कूलों में तो पहले से इसकी शुरुआत की गई है लेकिन वृहद स्तर पर पहली बार नए सत्र से शुरुआत की जाएगी। उन्होंने बताया कि अगले सत्र में जिले की सभी स्कूलों में भी स्मार्ट क्लास लागू की जाएंगी।

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