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MP News: केरल कैडर की एमपी मूल की IPS अधिकारी EWS प्रमाणपत्र विवाद में फंसी, डिमोशन का खतरा मंडराया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Mon, 30 Mar 2026 08:05 AM IST
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सार

EWS प्रमाणपत्र विवाद में केरल कैडर की IPS अधिकारी निमिषी त्रिपाठी जांच के घेरे में आ गई हैं। केंद्र और राज्य में ईडब्ल्यूएस की पात्रता के नियमों में  अंतर के कारण मामला उलझा है। 
 

MP News: Kerala cadre IPS officer of MP origin embroiled in EWS certificate controversy, faces threat of demot
आईपीएस निमिषी त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

देश की प्रशासनिक व्यवस्था में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने ईडब्ल्यूएस पात्रता की शर्तों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के सनावद की रहने वाली और केरल कैडर की 2023 बैच की आईपीएस अधिकारी निमिषी त्रिपाठी ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट को लेकर जांच के दायरे में हैं। मामला इसलिए अहम हो गया है क्योंकि यदि जांच में सर्टिफिकेट उपयोग में तकनीकी त्रुटि पाई जाती है, तो उनकी सेवा में बदलाव तक हो सकता है।
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शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
निमिषी त्रिपाठी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा 2023 में 368वीं रैंक हासिल की थी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के तहत उन्हें आईपीएस सेवा मिली। अब नियुक्ति के बाद उनके ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर केंद्र सरकार ने जांच शुरू कर दी। फिलहाल मध्यप्रदेश का गृह विभाग इस पूरे मामले की पड़ताल कर रहा है। इस मामले में खरगोन कलेक्टर ने जिले से जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। 

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केंद्र और राज्य के नियमों में फर्क बना वजह
इस मामले की जड़ में ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र के नियमों में अंतर बताया जा रहा है। केंद्र सरकार के नियम के अनुसार 1000 वर्ग फीट या उससे अधिक के प्लॉट वाले परिवार ईडब्ल्यूएस श्रेणी में नहीं आते, जबकि मध्य प्रदेश के नियम के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में 1500 वर्ग फीट तक, नगर पालिका क्षेत्र में 1200 वर्ग फीट तक और नगर पंचायत क्षेत्र में 1000 वर्ग फीट तक पात्रता का नियम है। यही अंतर अब विवाद का कारण बन गया है।

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कहां उलझा मामला?
जानकारी के मुताबिक, निमिषी त्रिपाठी का परिवार नगर पालिका क्षेत्र में रहता है और उनकी मां के नाम करीब 1000 वर्ग फीट का प्लॉट है, जो राज्य के नियमों के अनुसार ईडब्ल्यूएस श्रेणी में आता है। लेकिन केंद्रीय सेवाओं के लिए आवेदन करते समय केंद्र सरकार के निर्धारित प्रारूप का प्रमाण पत्र जरूरी होता है, यहीं से पूरा विवाद खड़ा हुआ। मामले में जांच एजेंसियां दो मुख्य पहलुओं पर फोकस कर रही हैं। क्या प्रमाण पत्र फर्जी है? क्या गलत प्रारूप का उपयोग किया गया? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रमाण पत्र वैध तरीके से जारी हुआ है, लेकिन इसके उपयोग को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि ईडब्ल्यूएस श्रेणी अमान्य पाई जाती है, तो नौकरी समाप्त होने की संभावना कम है। हालांकि, सेवा में बदलाव संभव है। ऐसी स्थिति में उन्हें उनकी रैंक के अनुसार अन्य सेवा, जैसे इंडियन रेवेन्यू सर्विस में भेजा जा सकता है।
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