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MP News: केंद्रीय मंत्री शिवराज बोले- क्लाइमेट चेंज की चुनौतियों के बीच हर गांव तक आधुनिक कृषि मशीनरी पहुंचाए
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sat, 11 Apr 2026 06:41 PM IST
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सार
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बदलते मौसम को देखते हुए किसानों को आधुनिक तकनीक और मशीनों से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान कृषि के आधुनिक उपकरण की जानकारी लेते हुए
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उन्नत कृषि महोत्सव के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए किसानों को उन्नत बीज, सही फसल सलाह और आधुनिक कृषि यंत्र एक साथ उपलब्ध कराना जरूरी है। इससे किसान कम लागत में अधिक उत्पादन कर सकेंगे और खेती को टिकाऊ बना पाएंगे। उन्होंने कहा कि क्लाइमेट चेंज अब खेती के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। अनियमित बारिश, वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण फसलों पर सीधा असर पड़ रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक संस्थान ऐसी फसल किस्में विकसित कर रहे हैं, जो हर प्रकार की जलवायु परिस्थितियों में बेहतर उत्पादन दे सकें। इन किस्मों को तेजी से किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
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कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए गांव स्तर पर कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक स्थापित कर रही है। पंचायतों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को किराये पर आधुनिक कृषि उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकनाइजेशन (एसएमएएम) के तहत 40 से 80 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता दी जा रही है, जिससे लाखों रुपये की परियोजनाएं भी स्थापित हो सकें।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि कस्टम हायरिंग सेंटर को एमपीएलएडीएस निधि से नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि यह संचालन आधारित मॉडल है। इसके लिए कृषि मशीनीकरण योजनाओं के तहत ही सहायता दी जा रही है। हालांकि सांसद और विधायक इन योजनाओं के क्रियान्वयन, जागरूकता और निगरानी में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कस्टम हायरिंग मॉडल में निजी क्षेत्र की भागीदारी पर उन्होंने कहा कि जहां स्पष्ट नीति और मांग होती है, वहां यह मॉडल सफल हो रहा है। सरकार एफपीओ, पंचायत और निजी क्षेत्र की साझेदारी से इस व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यह पूरी पहल किसान-केंद्रित और वैज्ञानिक सोच पर आधारित है, जिसका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना और किसानों की आय को स्थिर व सुरक्षित बनाना है।
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कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए गांव स्तर पर कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक स्थापित कर रही है। पंचायतों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को किराये पर आधुनिक कृषि उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकनाइजेशन (एसएमएएम) के तहत 40 से 80 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता दी जा रही है, जिससे लाखों रुपये की परियोजनाएं भी स्थापित हो सकें।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि कस्टम हायरिंग सेंटर को एमपीएलएडीएस निधि से नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि यह संचालन आधारित मॉडल है। इसके लिए कृषि मशीनीकरण योजनाओं के तहत ही सहायता दी जा रही है। हालांकि सांसद और विधायक इन योजनाओं के क्रियान्वयन, जागरूकता और निगरानी में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कस्टम हायरिंग मॉडल में निजी क्षेत्र की भागीदारी पर उन्होंने कहा कि जहां स्पष्ट नीति और मांग होती है, वहां यह मॉडल सफल हो रहा है। सरकार एफपीओ, पंचायत और निजी क्षेत्र की साझेदारी से इस व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यह पूरी पहल किसान-केंद्रित और वैज्ञानिक सोच पर आधारित है, जिसका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना और किसानों की आय को स्थिर व सुरक्षित बनाना है।
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