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Bhopal: नामांकन रद्द होने पर मीनाक्षी नटराजन का चुनाव आयोग पर हमला, बोलीं-आयोग को बचाने पार्टी पर मढ़ा गया दोष
Mon, 06 Jul 2026 04:39 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Mon, 06 Jul 2026 04:39 PM IST
सार
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन ने राज्यसभा चुनाव में नामांकन रद्द होने के मामले में पहली बार खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि नामांकन निरस्त होने के लिए कांग्रेस या उसके नेताओं की कोई गलती नहीं थी। चुनाव आयोग को बचाने के लिए पार्टी पर लापरवाही का आरोप लगाया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जल्द ही हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल करेगी।
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पीसीसी में प्रेसवार्ता
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राज्यसभा चुनाव में नामांकन रद्द होने के विवाद पर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन ने पहली बार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि नामांकन निरस्त होने के लिए कांग्रेस नेताओं, वकीलों या नामांकन प्रक्रिया से जुड़े किसी भी व्यक्ति की कोई गलती नहीं थी। यह धारणा जानबूझकर बनाई गई कि पार्टी की लापरवाही के कारण नामांकन खारिज हुआ, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जल्द ही हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल करेगी।
नामांकन रद्द करने का आधार ही गलत था
मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि रिटर्निंग अधिकारी ने उनके खिलाफ लंबित प्रकरण की जानकारी नहीं देने को आधार बनाकर नामांकन खारिज किया, जबकि नामांकन के साथ जमा किए जाने वाले फॉर्म-26 में ऐसी जानकारी देने का कोई प्रावधान ही नहीं है। उन्होंने कहा कि बाद में संबंधित अदालत ने भी स्पष्ट कर दिया कि उस मामले में न्यायालय ने संज्ञान तक नहीं लिया था। ऐसे में नामांकन निरस्त करने का आधार ही टिकाऊ नहीं था।
कांग्रेस की लापरवाही वाली कहानी गढ़ी गई
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं और विधि विशेषज्ञों पर लापरवाही का आरोप पूरी तरह निराधार है। पार्टी के वरिष्ठ अधिवक्ता वर्षों से चुनावी प्रक्रिया संभालते रहे हैं और ऐसी सामान्य त्रुटि की संभावना नहीं थी। उनके मुताबिक चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल न उठें, इसलिए पूरी कहानी कांग्रेस की गलती बताकर पेश की गई।
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दो राज्यों में अलग-अलग रवैया अपनाने का आरोप
मीनाक्षी ने आरोप लगाया कि समान परिस्थितियों में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियम अपनाए गए। उन्होंने कहा कि झारखंड में राज्यसभा उम्मीदवार को नामांकन में त्रुटि सुधारने के लिए समय दिया गया, जबकि मध्य प्रदेश में ऐसा अवसर नहीं दिया गया। इससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।उन्होंने बताया कि कांग्रेस तय समय-सीमा के भीतर हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करेगी। पार्टी का विधि प्रकोष्ठ इस मामले की तैयारी कर रहा है और पूरे विवाद को कानूनी रूप से चुनौती दी जाएगी।
यह भी पढ़ें-साइकिल पर सीहोर पहुंचे जीतू पटवारी, भ्रष्टाचार को लेकर सरकार पर साधा निशाना, जनअभियान का ऐलान
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल
मीनाक्षी नटराजन ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने पूरे मामले में निष्पक्ष संस्था की भूमिका नहीं निभाई। उनका कहना था कि कांग्रेस नेताओं और वकीलों ने समय पर अपना पक्ष रखा, लेकिन आयोग ने राहत देने के बजाय रिटर्निंग अधिकारी के फैसले को बरकरार रखा।
नीट, पेपर लीक और किसानों के मुद्दे भी उठाए
मीनाक्षी ने कहा कि नीट समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं और पेपर लीक से युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर प्रदेशव्यापी अभियान चलाएगी। उन्होंने कृषि और व्यापार नीति पर भी सरकार को घेरते हुए कहा कि आयात संबंधी फैसलों से किसानों को नुकसान हो रहा है और सरकार को उनकी हितों की रक्षा करनी चाहिए।
यह भी पढ़ें-वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों की नियुक्ति: आरिफ मसूद बोले- सुप्रीम कोर्ट जाएंगे, हिंदू संगठन ने किया स्वागत
मुख्यमंत्री परिवार की जमीनों की जांच की मांग
उन्होंने मुख्यमंत्री और उनके परिवार की जमीनों में हुई वृद्धि का जिक्र करते हुए पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने की मांग की। उनका कहना था कि सरकार को इस विषय पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।vदिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या यात्रा के सवाल पर मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि यह उनका निजी और गैर-राजनीतिक कार्यक्रम है। इसलिए इस पर राजनीतिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
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नामांकन रद्द करने का आधार ही गलत था
मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि रिटर्निंग अधिकारी ने उनके खिलाफ लंबित प्रकरण की जानकारी नहीं देने को आधार बनाकर नामांकन खारिज किया, जबकि नामांकन के साथ जमा किए जाने वाले फॉर्म-26 में ऐसी जानकारी देने का कोई प्रावधान ही नहीं है। उन्होंने कहा कि बाद में संबंधित अदालत ने भी स्पष्ट कर दिया कि उस मामले में न्यायालय ने संज्ञान तक नहीं लिया था। ऐसे में नामांकन निरस्त करने का आधार ही टिकाऊ नहीं था।
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कांग्रेस की लापरवाही वाली कहानी गढ़ी गई
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं और विधि विशेषज्ञों पर लापरवाही का आरोप पूरी तरह निराधार है। पार्टी के वरिष्ठ अधिवक्ता वर्षों से चुनावी प्रक्रिया संभालते रहे हैं और ऐसी सामान्य त्रुटि की संभावना नहीं थी। उनके मुताबिक चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल न उठें, इसलिए पूरी कहानी कांग्रेस की गलती बताकर पेश की गई।
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दो राज्यों में अलग-अलग रवैया अपनाने का आरोप
मीनाक्षी ने आरोप लगाया कि समान परिस्थितियों में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियम अपनाए गए। उन्होंने कहा कि झारखंड में राज्यसभा उम्मीदवार को नामांकन में त्रुटि सुधारने के लिए समय दिया गया, जबकि मध्य प्रदेश में ऐसा अवसर नहीं दिया गया। इससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।उन्होंने बताया कि कांग्रेस तय समय-सीमा के भीतर हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करेगी। पार्टी का विधि प्रकोष्ठ इस मामले की तैयारी कर रहा है और पूरे विवाद को कानूनी रूप से चुनौती दी जाएगी।
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चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल
मीनाक्षी नटराजन ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने पूरे मामले में निष्पक्ष संस्था की भूमिका नहीं निभाई। उनका कहना था कि कांग्रेस नेताओं और वकीलों ने समय पर अपना पक्ष रखा, लेकिन आयोग ने राहत देने के बजाय रिटर्निंग अधिकारी के फैसले को बरकरार रखा।
नीट, पेपर लीक और किसानों के मुद्दे भी उठाए
मीनाक्षी ने कहा कि नीट समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं और पेपर लीक से युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर प्रदेशव्यापी अभियान चलाएगी। उन्होंने कृषि और व्यापार नीति पर भी सरकार को घेरते हुए कहा कि आयात संबंधी फैसलों से किसानों को नुकसान हो रहा है और सरकार को उनकी हितों की रक्षा करनी चाहिए।
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मुख्यमंत्री परिवार की जमीनों की जांच की मांग
उन्होंने मुख्यमंत्री और उनके परिवार की जमीनों में हुई वृद्धि का जिक्र करते हुए पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने की मांग की। उनका कहना था कि सरकार को इस विषय पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।vदिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या यात्रा के सवाल पर मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि यह उनका निजी और गैर-राजनीतिक कार्यक्रम है। इसलिए इस पर राजनीतिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
