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Bhopal News: एम्स भोपाल की रिसर्च का बड़ा खुलासा, आम वायरस भी बन सकता है जानलेवा दिमागी संक्रमण की वजह

न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Sat, 24 Jan 2026 06:12 PM IST
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सार


एम्स भोपाल की नई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि पार्वोवायरस B19 जैसा आम वायरस कुछ दुर्लभ मामलों में दिमाग की गंभीर बीमारी एन्सेफलाइटिस का कारण बन सकता है। अध्ययन में 30 वर्षों की 14 अंतरराष्ट्रीय स्टडी और 3,000 से अधिक मरीजों का विश्लेषण किया गया, जिसमें करीब 100 में से 3 मरीजों में यह वायरस पाया गया।

Bhopal News: AIIMS Bhopal research reveals a major finding: common viruses can also cause deadly brain infecti
एम्स भोपाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सामान्य समझा जाने वाला एक वायरस भी जानलेवा दिमागी बीमारी का कारण बन सकता है। एम्स भोपाल के शोधकर्ताओं की नई रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पार्वोवायरस B19, जो आमतौर पर हल्का संक्रमण करता है, कुछ दुर्लभ मामलों में दिमाग की गंभीर बीमारी एन्सेफलाइटिस पैदा कर सकता है। एन्सेफलाइटिस दिमाग में सूजन की खतरनाक बीमारी है, जिसमें तेज बुखार, सिरदर्द, भ्रम, दौरे पड़ना और कई मामलों में स्थायी दिमागी नुकसान या मौत तक हो सकती है।
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30 साल की स्टडी, 3 हजार मरीजों का डेटा
इस अध्ययन में पिछले 30 वर्षों में हुई 14 अंतरराष्ट्रीय रिसर्च स्टडीज़ का विश्लेषण किया गया, जिनमें 3,000 से अधिक एन्सेफलाइटिस मरीज शामिल थे। रिसर्च में सामने आया कि करीब 100 में से 3 मरीजों में पार्वोवायरस B19 पाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार यह संख्या भले कम लगे, लेकिन ऐसे मामलों की अक्सर पहचान नहीं हो पाती।
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बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर इम्यूनिटी वाले ज्यादा खतरे में
पार्वोवायरस B19 एक आम वायरस है, जिससे अधिकांश लोग जीवन में कभी न कभी संक्रमित होते हैं। हालांकि, बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में यह वायरस दिमाग को प्रभावित कर सकता है। कई बार डॉक्टरों को एन्सेफलाइटिस की असली वजह पता नहीं चल पाती, जिससे इलाज में देरी हो जाती है।

अब जांच की सूची में जुड़ सकता है यह वायरस
एम्स भोपाल के शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन मरीजों में एन्सेफलाइटिस का कारण स्पष्ट नहीं होता, वहां पार्वोवायरस B19 की जांच पर भी विचार किया जाना चाहिए। समय पर सही पहचान होने से इलाज बेहतर हो सकता है, मरीज के ठीक होने की संभावना बढ़ेगी और अनावश्यक जांच व लंबे अस्पताल प्रवास से भी बचाव होगा।

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एम्स भोपाल की टीम का अहम योगदान
यह शोध डॉ. मेघा के. पांडे (वैज्ञानिक, ट्रांसलेशनल मेडिसिन विभाग, एम्स भोपाल) के नेतृत्व में किया गया। वरिष्ठ मार्गदर्शक डॉ. अमित अग्रवाल (प्रोफेसर, न्यूरोसर्जरी विभाग, एम्स भोपाल) ने क्लिनिकल विश्लेषण और निष्कर्षों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।इसके अलावा देश-विदेश के कई वैज्ञानिकों ने इस रिसर्च में भाग लिया और भारत, यूरोप, अमेरिका व एशिया के आंकड़ों का अध्ययन किया गया।

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जान बचाने में मददगार हो सकती है पहचान
शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि भले ही पार्वोवायरस B19 एन्सेफलाइटिस का सबसे आम कारण नहीं है, लेकिन कुछ मामलों में इसकी पहचान मरीज की जान बचा सकती है। अध्ययन में अस्पतालों में उन्नत जांच सुविधाएं और एन्सेफलाइटिस के लिए मानक जांच प्रोटोकॉल अपनाने की भी सिफारिश की गई है।
 
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