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जेपी में मेडिकल वेस्ट घोटाला: लाखों का अतिरिक्त भुगतान, अफसरों की भूमिका सवालों में, CMHO ने दिए जांच के आदेश
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sat, 24 Jan 2026 07:22 PM IST
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सार
भोपाल के जेपी अस्पताल में मेडिकल वेस्ट निस्तारण के नाम पर 3 साल में 16.42 लाख रुपए का अतिरिक्त भुगतान सामने आया है। बेड घटने के बावजूद 400 बेड के हिसाब से भुगतान होता रहा। मामले में सीएमएचओ ने जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है।
जेपी अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी भोपाल के मॉडल माने जाने वाले जेपी अस्पताल में मेडिकल वेस्ट निस्तारण के नाम पर सरकारी धन की बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच के आदेश दिए हैं। शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि अस्पताल में बेड घटने के बावजूद तीन साल तक गलत भुगतान किया गया, जिससे 16.42 लाख रुपए का अतिरिक्त खर्च हो गया।
वर्ष 2023 में काटजू अस्पताल शुरू होने के बाद जेपी अस्पताल में 150 बिस्तर कम कर दिए गए, लेकिन मेडिकल वेस्ट निस्तारण करने वाली एजेंसी को आज भी 400 बेड के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। जबकि वास्तविक संख्या 250 बेड की ही है।
रोज 1,500 रुपए की अतिरिक्त चपत
मेडिकल वेस्ट निस्तारण का भुगतान प्रति बेड 10 रुपए प्रतिदिन की दर से किया जा रहा था। इस तरह 150 बेड के नाम पर रोज 1,500 रुपए अतिरिक्त दिए गए, जो तीन साल में बढ़कर 16.42 लाख रुपए तक पहुंच गए।
एक ही बेड का दो जगह भुगतान
जिन 150 बिस्तरों को काटजू अस्पताल में शिफ्ट किया गया, वहां भी मेडिकल वेस्ट निस्तारण का भुगतान किया जा रहा है। यानी एक ही बेड के नाम पर दो अस्पतालों से भुगतान, जिससे सरकारी खजाने को सीधा नुकसान हुआ।
अनुबंध में संशोधन नहीं, कंपनी को फायदा
मेडिकल वेस्ट निस्तारण का ठेका इंडिया वेस्ट मैनेजमेंट प्रा. लि. को दिया गया है। बेड कम होने के बाद अनुबंध और भुगतान शर्तों में बदलाव जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि यह केवल लापरवाही है या किसी स्तर पर मिलीभगत।
यह भी पढ़ें-मध्यप्रदेश में ठंड का ग्राफ नीचे, बादलों की एंट्री, 26 के बाद फिर बदलेगा मिजाज
अधीक्षक बोले मेरे पास शिकायत नहीं आई
जेपी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संजय जैन ने कहा कि उन्हें इस मामले में अब तक कोई शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में भुगतान नहीं हुआ है। यदि पूर्व में गलत भुगतान हुआ है तो जांच करवाई जाएगी।
यह भी पढ़ें-विदेश तक फैला असलम का नेटवर्क, निगम की भूमिका पर सवाल, सड़क से सदन तक हो रहा विरोध
सीएमएचओ बोले दोषियों पर होगी कार्रवाई
सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि मामले की जानकारी मिल चुकी है और जांच करवाई जा रही है। संबंधित कंपनी की जानकारी भी सामने आ गई है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।बड़ा सवाल यह है कि बेड घटने की जानकारी होने के बावजूद तीन साल तक भुगतान कैसे चलता रहा। जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते सुधार क्यों नहीं किया।अब इसकी पड़ताल जांच में होगी।
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वर्ष 2023 में काटजू अस्पताल शुरू होने के बाद जेपी अस्पताल में 150 बिस्तर कम कर दिए गए, लेकिन मेडिकल वेस्ट निस्तारण करने वाली एजेंसी को आज भी 400 बेड के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। जबकि वास्तविक संख्या 250 बेड की ही है।
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रोज 1,500 रुपए की अतिरिक्त चपत
मेडिकल वेस्ट निस्तारण का भुगतान प्रति बेड 10 रुपए प्रतिदिन की दर से किया जा रहा था। इस तरह 150 बेड के नाम पर रोज 1,500 रुपए अतिरिक्त दिए गए, जो तीन साल में बढ़कर 16.42 लाख रुपए तक पहुंच गए।
एक ही बेड का दो जगह भुगतान
जिन 150 बिस्तरों को काटजू अस्पताल में शिफ्ट किया गया, वहां भी मेडिकल वेस्ट निस्तारण का भुगतान किया जा रहा है। यानी एक ही बेड के नाम पर दो अस्पतालों से भुगतान, जिससे सरकारी खजाने को सीधा नुकसान हुआ।
अनुबंध में संशोधन नहीं, कंपनी को फायदा
मेडिकल वेस्ट निस्तारण का ठेका इंडिया वेस्ट मैनेजमेंट प्रा. लि. को दिया गया है। बेड कम होने के बाद अनुबंध और भुगतान शर्तों में बदलाव जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि यह केवल लापरवाही है या किसी स्तर पर मिलीभगत।
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अधीक्षक बोले मेरे पास शिकायत नहीं आई
जेपी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संजय जैन ने कहा कि उन्हें इस मामले में अब तक कोई शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में भुगतान नहीं हुआ है। यदि पूर्व में गलत भुगतान हुआ है तो जांच करवाई जाएगी।
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सीएमएचओ बोले दोषियों पर होगी कार्रवाई
सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि मामले की जानकारी मिल चुकी है और जांच करवाई जा रही है। संबंधित कंपनी की जानकारी भी सामने आ गई है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।बड़ा सवाल यह है कि बेड घटने की जानकारी होने के बावजूद तीन साल तक भुगतान कैसे चलता रहा। जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते सुधार क्यों नहीं किया।अब इसकी पड़ताल जांच में होगी।

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