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Bhopal News: सियाचिन से रणभूमि तक जवानों की ढाल बनेगा एम्स भोपाल, डीआरडीओ के साथ मिलकर तैयार करेगा नई तकनीक

Tue, 21 Jul 2026 06:21 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Tue, 21 Jul 2026 06:21 PM IST
सार

एम्स भोपाल और डीआरडीओ की साझेदारी से भारतीय सैनिकों के लिए स्वदेशी चिकित्सा तकनीक, स्मार्ट स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली और कठिन परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन के वैज्ञानिक समाधान विकसित होंगे। इसका लाभ भविष्य में आम मरीजों और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मिलेगा।

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Bhopal News: AIIMS Bhopal to serve as a shield for soldiers—from Siachen to the battlefield—and develop new te
एम्स पहुंची डीआरडीओ की टीम के बीच समझौता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों को कठिन परिस्थितियों में अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाने के लिए एम्स भोपाल और डीआरडीओ की प्रमुख प्रयोगशाला डीआईपीएएस ने हाथ मिलाया है। यह समझौता केवल शोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऐसी स्वदेशी तकनीकों और चिकित्सा समाधानों के विकास का रास्ता खोलेगा, जिनसे सियाचिन, लद्दाख, ऊंचे पहाड़ों, रेगिस्तान और युद्ध क्षेत्र में तैनात जवानों को सीधा लाभ मिलेगा।
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क्या बदल जाएगा इस समझौते से?
अब वैज्ञानिक यह पता लगाएंगे कि अत्यधिक ठंड, कम ऑक्सीजन, लंबी ड्यूटी और लगातार तनाव का सैनिकों के शरीर और दिमाग पर क्या असर पड़ता है। इसके आधार पर ऐसे चिकित्सा उपाय और तकनीक विकसित की जाएंगी, जिससे जवान लंबे समय तक फिट रहें और उनकी कार्यक्षमता बढ़े।
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पहनने योग्य उपकरण करेंगे निगरानी
इस परियोजना के तहत ऐसे पहनने योग्य स्मार्ट उपकरण विकसित करने पर भी काम होगा, जो जवानों की हृदय गति, सांस, थकान और शरीर की अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों पर लगातार नजर रख सकें। इससे किसी भी स्वास्थ्य जोखिम का समय रहते पता लगाया जा सकेगा।
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विदेशी तकनीक पर निर्भरता होगी कम

समझौते का एक बड़ा उद्देश्य रक्षा क्षेत्र के लिए स्वदेशी चिकित्सा उपकरण और तकनीक विकसित करना है। इससे विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी और भारतीय सेना को देश में विकसित आधुनिक समाधान उपलब्ध होंगे।


आम मरीजों को भी मिलेगा फायदा
इस शोध से विकसित तकनीकें केवल सैनिकों तक सीमित नहीं रहेंगी। हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी, तंत्रिका संबंधी विकार, मानसिक तनाव और पुनर्वास चिकित्सा में भी इनका उपयोग हो सकेगा। यानी रक्षा अनुसंधान से निकले कई समाधान भविष्य में आम मरीजों के इलाज में भी मददगार बन सकते हैं।

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मध्य प्रदेश के लिए भी बड़ी उपलब्धि
एम्स भोपाल पहली बार रक्षा चिकित्सा अनुसंधान के इतने बड़े राष्ट्रीय सहयोग का हिस्सा बना है। इससे प्रदेश में उच्च स्तरीय चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा और राष्ट्रीय स्तर पर एम्स भोपाल की अनुसंधान क्षमता को नई पहचान मिलेगी।

 
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