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Bhopal News: UP से सस्ता गेहूं लाकर MP में बेचने का आरोप, पूर्व नेता प्रतिपक्ष बोले-खरीदी से पहले ही भरे गोदाम

न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sat, 18 Apr 2026 05:56 PM IST
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सार

पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने भिंड में गेहूं खरीदी में एमपी-यूपी सिंडिकेट के जरिए बड़े घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा कि सस्ता गेहूं सीमा पार से लाकर MSP पर बेचा जा रहा है, जिससे सरकार को करोड़ों का नुकसान और किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है।

Bhopal News: Allegations of Importing Cheaper Wheat from UP to Sell in MP; Former Leader of Opposition Claims
पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी अब गंभीर विवादों में घिर गई है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने भिंड जिले के लहार और रौन क्षेत्र को केंद्र में रखकर बड़ा आरोप लगाया है कि यहां एमपी-यूपी सिंडिकेट के जरिए करोड़ों का खेल चल रहा है। उन्होंने वीडियो के जरिए रिश्वतखोरी और फर्जी खरीदी के दावे भी पेश किए।
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2100 का गेहूं, 2625 में खपाने का आरोप
डॉ. सिंह के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में गेहूं करीब 2100 रुपए प्रति क्विंटल में खरीदा जा रहा है, जबकि मध्य प्रदेश में बोनस मिलाकर MSP 2625 रुपए तक पहुंच रहा है। इसी अंतर का फायदा उठाकर सस्ता गेहूं सीमा पार से लाकर एमपी के खरीदी केंद्रों पर बेचा जा रहा है, जिससे हर क्विंटल पर 500 रुपए से ज्यादा का सीधा नुकसान शासन को हो रहा है।
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खरीदी शुरू होने से पहले ही स्टॉक तैयार
सबसे चौंकाने वाला मामला यह बताया गया कि कई केंद्रों पर आधिकारिक खरीदी शुरू होने से पहले ही 4 से 5 हजार क्विंटल गेहूं जमा मिला। किसानों के स्लॉट बुक होने से पहले ही बोरियां उपलब्ध करा दी गईं और माल भरना शुरू हो गया। प्रशासन की छापेमारी में हजारों क्विंटल गेहूं खुले और भरे बोरे में मिला।

5 लाख में सेट’ होते केंद्र, दुर्गम जगहों का खेल
डॉ. गोविंद सिंह ने आरोप लगाया कि खरीदी केंद्रों का चयन सुविधा के लिए नहीं, बल्कि ‘कमाई’ के लिए किया गया। एक-एक केंद्र के बदले 5-5 लाख रुपए तक वसूले गए और कई केंद्र ऐसे इलाकों में बना दिए गए जहां पहुंचना भी मुश्किल है, ताकि बाहरी गेहूं आसानी से खपाया जा सके।


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नेता-अफसर गठजोड़ पर सीधा आरोप
उन्होंने कहा कि इस पूरे खेल में खाद्य विभाग के अधिकारी और स्थानीय भाजपा नेता मिलकर काम कर रहे हैं। ईमानदार और बेहतर प्रदर्शन करने वाली सोसायटियों को किनारे कर संदिग्ध और पहले से विवादित संस्थाओं को जिम्मेदारी दी गई है।

किसान परेशान, माफिया फायदे में
डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि इस कथित घोटाले का असर सीधे किसानों पर पड़ रहा है। पोर्टल और स्लॉट बुकिंग की दिक्कतों के कारण असली किसान अपनी उपज नहीं बेच पा रहे, जबकि माफिया सिस्टम पर कब्जा कर MSP का फायदा उठा रहे हैं। मजबूरी में किसानों को मंडियों में कम दाम पर गेहूं बेचना पड़ रहा है।

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जांच नहीं तो आंदोलन की चेतावनी
डॉ. गोविंद सिंह ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने साफ कहा कि अगर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे।

 
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