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Bhopal News: इंदौर मौतों को कांग्रेस ने बताया सरकारी हत्या, 1 करोड़ मुआवजे की मांग, कल इंदौर में पैदल मार्च
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sat, 10 Jan 2026 08:49 PM IST
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सार
इंदौर में दूषित पानी से 20 मौतों के मामले में कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर सरकारी हत्या का आरोप लगाया है। महापौर के इस्तीफे, दोषियों पर गैर-इरादतन हत्या का केस और मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ मुआवजे की मांग की गई है। कांग्रेस ने 11 जनवरी को इंदौर में पैदल मार्च का ऐलान किया है।
पीसीसी में प्रेसवार्ता
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 20 लोगों की मौत के मामले को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। जिला कांग्रेस कमेटी भोपाल शहर एवं ग्रामीण की संयुक्त पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने इस घटना को सरकारी हत्या करार देते हुए महापौर के इस्तीफे, दोषियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने और मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की।कांग्रेस ने ऐलान किया कि इस मुद्दे को लेकर 11 जनवरी को इंदौर में बड़ा गणपति मंदिर से राजवाड़ा चौक तक प्रदेश स्तरीय पैदल मार्च किया जाएगा, जिसमें वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल होंगे।
भाजपा सरकार पर आपराधिक लापरवाही का आरोप
भोपाल शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना ने कहा कि जहरीला पानी पीने से 20 मौतें और एक हजार से ज्यादा लोगों का बीमार होना भाजपा सरकार की प्रशासनिक विफलता और आपराधिक लापरवाही का नतीजा है। उन्होंने कहा कि सरकार जिम्मेदारी तय करने के बजाय संवेदनहीन बयानबाजी कर रही है।
यह भी पढ़ें-बीएमएचआरसी को बड़ी सौगात, संक्रमित रक्त पर लगेगी लगाम, फेफड़ों की जांच और कैंसर टेस्ट होंगे सरल
कांग्रेस की चार बड़ी मांगें
- महापौर को तत्काल हटाया जाए।
- मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से असंवेदनशील बयान पर इस्तीफा लिया जाए।
- मृतकों के परिजनों को 2 लाख नहीं, 1 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए।
- पूरे मामले की न्यायिक जांच कर दोषियों पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया जाए।
- कांग्रेस ने चेतावनी दी कि पीड़ितों को न्याय मिलने तक सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रहेगा।
यह भी पढ़ें-इंदौर त्रासदी के बाद सवालों के घेरे में PHE, 155 लैब सिर्फ तीन नियमित केमिस्ट, चीफ केमिस्ट का पद खाली
मनरेगा पर हमला बताया, गांधी के विचारों की हत्या
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि मनरेगा को कमजोर करना महात्मा गांधी के विचारों की हत्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में प्रदेश पहले ही भारी कर्ज में डूब चुका है और अब 60:40 के नए अनुपात से राज्य पर हर साल 5 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।उन्होंने बताया कि प्रदेश में 90.5 प्रतिशत मनरेगा मजदूरों की ई-केवाईसी लंबित है, जो मजदूर-विरोधी नीति का प्रमाण है।प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता राहुल राज ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा मनरेगा की जगह VB-GRAM G कानून लागू करना गरीबों के काम के अधिकार पर सीधा हमला है। उन्होंने शिवराज सिंह चौहान को इसका मुख्य शिल्पकार बताते हुए कहा कि यह महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने का अपमान है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब फसल बीमा में किसानों का भुगतान वर्षों तक लटका रहता है, तो क्या अब मनरेगा मजदूरों की मजदूरी भी वर्षों बाद मिलेगी?
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भाजपा सरकार पर आपराधिक लापरवाही का आरोप
भोपाल शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना ने कहा कि जहरीला पानी पीने से 20 मौतें और एक हजार से ज्यादा लोगों का बीमार होना भाजपा सरकार की प्रशासनिक विफलता और आपराधिक लापरवाही का नतीजा है। उन्होंने कहा कि सरकार जिम्मेदारी तय करने के बजाय संवेदनहीन बयानबाजी कर रही है।
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कांग्रेस की चार बड़ी मांगें
- महापौर को तत्काल हटाया जाए।
- मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से असंवेदनशील बयान पर इस्तीफा लिया जाए।
- मृतकों के परिजनों को 2 लाख नहीं, 1 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए।
- पूरे मामले की न्यायिक जांच कर दोषियों पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया जाए।
- कांग्रेस ने चेतावनी दी कि पीड़ितों को न्याय मिलने तक सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रहेगा।
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मनरेगा पर हमला बताया, गांधी के विचारों की हत्या
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि मनरेगा को कमजोर करना महात्मा गांधी के विचारों की हत्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में प्रदेश पहले ही भारी कर्ज में डूब चुका है और अब 60:40 के नए अनुपात से राज्य पर हर साल 5 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।उन्होंने बताया कि प्रदेश में 90.5 प्रतिशत मनरेगा मजदूरों की ई-केवाईसी लंबित है, जो मजदूर-विरोधी नीति का प्रमाण है।प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता राहुल राज ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा मनरेगा की जगह VB-GRAM G कानून लागू करना गरीबों के काम के अधिकार पर सीधा हमला है। उन्होंने शिवराज सिंह चौहान को इसका मुख्य शिल्पकार बताते हुए कहा कि यह महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने का अपमान है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब फसल बीमा में किसानों का भुगतान वर्षों तक लटका रहता है, तो क्या अब मनरेगा मजदूरों की मजदूरी भी वर्षों बाद मिलेगी?

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