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Bhopal News: भोपाल निगम की गोशाला में 6 गोवंशों की मौत से बवाल, स्लॉटर हाउस विवाद के बीच सड़क पर उतरे संगठन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sat, 10 Jan 2026 08:51 PM IST
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सार
भोपाल नगर निगम की अरवलिया गोशाला में 6 गोवंश मृत मिलने से हड़कंप मच गया। हिंदूवादी संगठनों ने गोशाला पहुंचकर प्रदर्शन किया और निगम पर लापरवाही का आरोप लगाया। गेट पर ताला मिलने के बाद पुलिस की मौजूदगी में अंदर जाकर शव मिले, जबकि 4 गोवंश गंभीर हालत में पाए गए।
गोशाला
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी भोपाल में नगर निगम की गोशाला से 6 गोवंशों के मृत मिलने के बाद माहौल गरमा गया है। घटना ऐसे समय सामने आई है, जब नगर निगम का मॉडर्न स्लॉटर हाउस पहले से ही अवैध गतिविधियों के आरोपों में घिरा हुआ है। गोवंश मौत के बाद हिंदूवादी संगठनों ने गोशाला पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और निगम प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए।
ताले में बंद गोशाला, अंदर मिले शव
हिंदू संगठनों को सूचना मिलने पर पदाधिकारी देर रात अरवलिया स्थित गोशाला पहुंचे। यहां मुख्य गेट पर ताला लगा मिला। पुलिस को बुलाने के बाद निगम कर्मचारियों की मौजूदगी में ताला खुलवाया गया। अंदर प्रवेश करते ही 6 गोवंश मृत मिले, जबकि 4 अन्य की हालत गंभीर बताई गई।संगठनों का आरोप है कि गोशाला में पर्याप्त चारा-पानी की व्यवस्था नहीं थी और गायें भूख के कारण गोबर मिला चारा खाने को मजबूर थीं।
शव दफनाने की तैयारी का आरोप
घटना स्थल पर गोशाला परिसर में एक बड़ा गड्ढा भी मिला। संगठनों का कहना है कि मृत गोवंश को बिना सूचना और पोस्टमार्टम के दफनाने की तैयारी थी। विरोध में मौके पर हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। इसके बाद देर रात निगम के वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे और जांच का आश्वासन दिया।
यह भी पढ़ें-इंदौर त्रासदी के बाद सवालों के घेरे में PHE, 155 लैब सिर्फ तीन नियमित केमिस्ट, चीफ केमिस्ट का पद खाली
थाने में शिकायत, पोस्टमार्टम के आदेश
हिंदूवादी संगठनों ने ईंटखेड़ी थाने में आवेदन देकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने मृत गोवंशों के शवों को पशु अस्पताल भेजकर पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।इसी बीच, नगर निगम के स्लॉटर हाउस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि सरकारी पैसे से बने स्लॉटर हाउस में गोहत्या और गोमांस पैकिंग की पुष्टि बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा नेटवर्क संगठित रूप से संचालित हो रहा था और इसकी जड़ें काफी गहरी हैं।कानूनगो ने यह भी कहा कि मृत पशुओं के निष्पादन के लिए बनाए गए सरकारी संयंत्रों के दुरुपयोग की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
यह भी पढ़ें-बीएमएचआरसी को बड़ी सौगात, संक्रमित रक्त पर लगेगी लगाम, फेफड़ों की जांच और कैंसर टेस्ट होंगे सरल
निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल
गोशाला में गोवंशों की मौत और स्लॉटर हाउस प्रकरण के एक साथ सामने आने से नगर निगम की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विपक्ष और संगठनों का आरोप है कि निगम अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े स्तर पर अनियमितताएं संभव नहीं हैं।
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ताले में बंद गोशाला, अंदर मिले शव
हिंदू संगठनों को सूचना मिलने पर पदाधिकारी देर रात अरवलिया स्थित गोशाला पहुंचे। यहां मुख्य गेट पर ताला लगा मिला। पुलिस को बुलाने के बाद निगम कर्मचारियों की मौजूदगी में ताला खुलवाया गया। अंदर प्रवेश करते ही 6 गोवंश मृत मिले, जबकि 4 अन्य की हालत गंभीर बताई गई।संगठनों का आरोप है कि गोशाला में पर्याप्त चारा-पानी की व्यवस्था नहीं थी और गायें भूख के कारण गोबर मिला चारा खाने को मजबूर थीं।
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शव दफनाने की तैयारी का आरोप
घटना स्थल पर गोशाला परिसर में एक बड़ा गड्ढा भी मिला। संगठनों का कहना है कि मृत गोवंश को बिना सूचना और पोस्टमार्टम के दफनाने की तैयारी थी। विरोध में मौके पर हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। इसके बाद देर रात निगम के वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे और जांच का आश्वासन दिया।
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हिंदूवादी संगठनों ने ईंटखेड़ी थाने में आवेदन देकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने मृत गोवंशों के शवों को पशु अस्पताल भेजकर पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।इसी बीच, नगर निगम के स्लॉटर हाउस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि सरकारी पैसे से बने स्लॉटर हाउस में गोहत्या और गोमांस पैकिंग की पुष्टि बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा नेटवर्क संगठित रूप से संचालित हो रहा था और इसकी जड़ें काफी गहरी हैं।कानूनगो ने यह भी कहा कि मृत पशुओं के निष्पादन के लिए बनाए गए सरकारी संयंत्रों के दुरुपयोग की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
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गोशाला में गोवंशों की मौत और स्लॉटर हाउस प्रकरण के एक साथ सामने आने से नगर निगम की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विपक्ष और संगठनों का आरोप है कि निगम अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े स्तर पर अनियमितताएं संभव नहीं हैं।

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