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Bhopal News: भोपाल मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट पर फैसला टला, वक्फ बोर्ड में अब 23 जून को होगी सुनवाई
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 14 May 2026 06:35 PM IST
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सार
भोपाल में कब्रिस्तान और वक्फ जमीन से जुड़े मेट्रो विवाद पर वक्फ बोर्ड में गुरुवार को सुनवाई नहीं हो सकी। न्यायाधीश के अवकाश के चलते अब मामले की अगली सुनवाई 23 जून को होगी। कमेटी इंतेजामियां औकाफ-ए-अम्मा ने भोपाल टॉकीज स्थित कब्रिस्तान के नीचे प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन और नारियलखेड़ा की वक्फ जमीन पर निर्माण को चुनौती दी है।
भोपाल मेट्रो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भोपाल में कब्रिस्तान और वक्फ जमीन से जुड़े मेट्रो प्रोजेक्ट विवाद पर गुरुवार को होने वाली अहम सुनवाई टल गई। न्यायाधीश के अवकाश पर होने के कारण मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में मामले की सुनवाई नहीं हो सकी। अब दोनों पक्ष 23 जून को अपना पक्ष रखेंगे। मामला भोपाल टॉकीज इलाके के प्राचीन कब्रिस्तान के नीचे से प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन और नारियलखेड़ा स्थित वक्फ भूमि पर निर्माण कार्य से जुड़ा है। इन दोनों मामलों को लेकर कमेटी इंतेजामियां औकाफ-ए-अम्मा ने वक्फ अधिकरण में अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। वादी पक्ष ने मेट्रो निर्माण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। अधिवक्ता के मुताबिक, अब तक दो बार सुनवाई हो चुकी है और इस बार स्टे पर बहस प्रस्तावित थी, लेकिन सुनवाई आगे बढ़ा दी गई।
कब्रिस्तान के नीचे मेट्रो लाइन पर आपत्ति
पहले प्रकरण में हमीदिया रोड स्थित मासूमा तकिया अम्मनशाह, मस्जिद नूरानी, मुल्लाशाह समेत पंजीकृत वक्फ कब्रिस्तान क्षेत्रों के नीचे से मेट्रो सुरंग निकालने के प्रस्ताव को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि यह शहर के सबसे पुराने और ऐतिहासिक कब्रिस्तानों में शामिल है, जहां हजारों कब्रें मौजूद हैं। कमेटी का दावा है कि प्रस्तावित अंडरग्राउंड रूट से करीब एक एकड़ क्षेत्र प्रभावित हो सकता है।वादी पक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि मेट्रो प्रबंधन की ओर से अब तक विस्तृत नक्शा, सुरक्षा रिपोर्ट और तकनीकी आकलन सार्वजनिक नहीं किया गया है। उनका कहना है कि सुरंग निर्माण, खुदाई और कंपन से कब्रों व धार्मिक ढांचों को नुकसान पहुंच सकता है। अधिवक्ता इब्राहिम सरवत शरीफ खान ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के फैसलों में कब्रिस्तान की मूल प्रकृति को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है।
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नारियलखेड़ा की वक्फ जमीन पर भी विवाद
दूसरा मामला नारियलखेड़ा स्थित वक्फ निशात अफजा (वाके बाग) की जमीन से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मेट्रो कंपनी ने बिना अनुमति वक्फ भूमि पर निर्माण शुरू कर दिया। कमेटी के अनुसार खसरा नंबर 88 की करीब 11.93 हेक्टेयर जमीन वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज है। आरोप है कि लगभग 1.40 एकड़ भूमि पर गड्ढे खोदकर पिलर निर्माण का काम किया जा रहा है और भारी मशीनरी लगाई गई है। वादी पक्ष का कहना है कि निर्माण संबंधी स्वीकृति, नक्शे और अधिग्रहण की जानकारी कई बार मांगे जाने के बावजूद उपलब्ध नहीं कराई गई।
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वक्फ अधिकरण से रोक लगाने की मांग
दोनों मामलों में वक्फ अधिकरण से विवादित स्थलों पर निर्माण कार्य रोकने, यथास्थिति बनाए रखने और कथित अवैध निर्माण हटाने की मांग की गई है। अब इस पूरे विवाद पर अगली सुनवाई 23 जून को होगी।
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कब्रिस्तान के नीचे मेट्रो लाइन पर आपत्ति
पहले प्रकरण में हमीदिया रोड स्थित मासूमा तकिया अम्मनशाह, मस्जिद नूरानी, मुल्लाशाह समेत पंजीकृत वक्फ कब्रिस्तान क्षेत्रों के नीचे से मेट्रो सुरंग निकालने के प्रस्ताव को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि यह शहर के सबसे पुराने और ऐतिहासिक कब्रिस्तानों में शामिल है, जहां हजारों कब्रें मौजूद हैं। कमेटी का दावा है कि प्रस्तावित अंडरग्राउंड रूट से करीब एक एकड़ क्षेत्र प्रभावित हो सकता है।वादी पक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि मेट्रो प्रबंधन की ओर से अब तक विस्तृत नक्शा, सुरक्षा रिपोर्ट और तकनीकी आकलन सार्वजनिक नहीं किया गया है। उनका कहना है कि सुरंग निर्माण, खुदाई और कंपन से कब्रों व धार्मिक ढांचों को नुकसान पहुंच सकता है। अधिवक्ता इब्राहिम सरवत शरीफ खान ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के फैसलों में कब्रिस्तान की मूल प्रकृति को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है।
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नारियलखेड़ा की वक्फ जमीन पर भी विवाद
दूसरा मामला नारियलखेड़ा स्थित वक्फ निशात अफजा (वाके बाग) की जमीन से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मेट्रो कंपनी ने बिना अनुमति वक्फ भूमि पर निर्माण शुरू कर दिया। कमेटी के अनुसार खसरा नंबर 88 की करीब 11.93 हेक्टेयर जमीन वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज है। आरोप है कि लगभग 1.40 एकड़ भूमि पर गड्ढे खोदकर पिलर निर्माण का काम किया जा रहा है और भारी मशीनरी लगाई गई है। वादी पक्ष का कहना है कि निर्माण संबंधी स्वीकृति, नक्शे और अधिग्रहण की जानकारी कई बार मांगे जाने के बावजूद उपलब्ध नहीं कराई गई।
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वक्फ अधिकरण से रोक लगाने की मांग
दोनों मामलों में वक्फ अधिकरण से विवादित स्थलों पर निर्माण कार्य रोकने, यथास्थिति बनाए रखने और कथित अवैध निर्माण हटाने की मांग की गई है। अब इस पूरे विवाद पर अगली सुनवाई 23 जून को होगी।

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