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देवास विस्फोट पर सियासत तेज: नेता प्रतिपक्ष बोले-मौत की फैक्ट्री को किसका संरक्षण था? प्रशासनिक लापरवाही
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 14 May 2026 05:13 PM IST
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सार
देवास की पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट को लेकर सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष ने हादसे को प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्ट सिस्टम की नाकामी बताते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद अवैध रूप से फैक्ट्री चलती रही और गरीब मजदूर जान जोखिम में डालकर काम करते रहे।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देवास की पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस हादसे को प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्ट सिस्टम की नाकामी बताते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है।उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था की भयावह सच्चाई है। उन्होंने लिखा कि फैक्ट्री विस्फोट में 3 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जबकि महिलाओं के लापता होने की खबरें भी सामने आ रही हैं। धमाका इतना जबरदस्त था कि शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक बिखर गए।
शिकायतों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
सिंघार ने दावा किया कि ग्रामीण लगातार फैक्ट्री के अवैध संचालन की शिकायत करते रहे, लेकिन प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने सवाल किया कि आखिर किसके संरक्षण में यह “मौत का कारोबार” चल रहा था। उन्होंने कहा कि गरीब मजदूर 250 से 400 रुपए की दिहाड़ी के लिए अपनी जान जोखिम में डालते रहे और सत्ता-प्रशासन आंखें बंद कर बैठा रहा।
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मुख्यमंत्री से सख्त कार्रवाई की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा कि केवल जांच और मुआवजे की घोषणा से जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी। फैक्ट्री संचालकों के साथ-साथ उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, जिन्होंने लापरवाही बरती या संरक्षण दिया। सिंघार ने हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
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सिंघार ने दावा किया कि ग्रामीण लगातार फैक्ट्री के अवैध संचालन की शिकायत करते रहे, लेकिन प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने सवाल किया कि आखिर किसके संरक्षण में यह “मौत का कारोबार” चल रहा था। उन्होंने कहा कि गरीब मजदूर 250 से 400 रुपए की दिहाड़ी के लिए अपनी जान जोखिम में डालते रहे और सत्ता-प्रशासन आंखें बंद कर बैठा रहा।
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मुख्यमंत्री से सख्त कार्रवाई की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा कि केवल जांच और मुआवजे की घोषणा से जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी। फैक्ट्री संचालकों के साथ-साथ उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, जिन्होंने लापरवाही बरती या संरक्षण दिया। सिंघार ने हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
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