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Bhopal News: अब गांव-गांव पहुंचेगी बेहतर मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवा, एम्स भोपाल ने तैयार किया नया हेल्थ मॉडल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Mon, 18 May 2026 06:18 PM IST
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सार
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल ने ‘प्रकाश’ प्रोजेक्ट के तहत सीहोर में नया हेल्थ मॉडल तैयार करने की दिशा में पहल की है। इसका उद्देश्य गांव-गांव तक मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना, लोगों को सही स्वास्थ्य जानकारी देना और समय पर इलाज उपलब्ध कराना है।
सिहोर पहुंची एम्स भोपाल की टीम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल ने ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ी पहल शुरू की है। आईसीएमआर वित्तपोषित प्रकाश प्रोजेक्ट के तहत सीहोर में आयोजित विशेष कार्यशाला में ऐसा हेल्थ मॉडल तैयार करने पर मंथन हुआ, जिससे गांवों तक बेहतर इलाज, सही स्वास्थ्य सलाह और समय पर जांच की सुविधा पहुंचाई जा सके।
माताओं और बच्चों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर फोकस
इसका मुख्य उद्देश्य ऐसा सिस्टम विकसित करना था, जिससे गर्भवती महिलाओं, नवजात बच्चों और ग्रामीण परिवारों को समय रहते स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके। अधिकारियों ने माना कि कई बार जानकारी और जागरूकता की कमी के कारण लोग सरकारी योजनाओं का पूरा फायदा नहीं ले पाते। इसी को ध्यान में रखते हुए व्यवहार परिवर्तन संचार को इस मॉडल का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है, ताकि लोगों तक सही स्वास्थ्य जानकारी पहुंच सके और वे समय पर इलाज व जांच करा सकें।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताईं जमीनी समस्याएं
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की टीम, जिला स्वास्थ्य अधिकारी, आरबीएसके अधिकारी और ब्लॉक स्तर के स्वास्थ्य कर्मियों ने हिस्सा लिया। बैठक में गांव स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि कई ग्रामीण इलाकों में मातृ और बाल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए स्थानीय स्तर पर मजबूत समन्वय और जागरूकता की जरूरत है।
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सरकारी योजनाओं को जोड़कर मजबूत होगी व्यवस्था
बैठक में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम सहित अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के साथ बेहतर तालमेल बनाकर उपलब्ध संसाधनों और उपकरणों का प्रभावी उपयोग करने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि विभिन्न योजनाओं को एक साथ जोड़ने से स्वास्थ्य सेवाएं ज्यादा प्रभावी और उपयोगी बन सकेंगी।
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गांवों तक स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत पहुंच बनाने की तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल होता है तो भविष्य में इसे दूसरे जिलों में भी लागू किया जा सकता है। इससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं और बच्चों को समय पर जांच, इलाज और स्वास्थ्य सलाह मिल सकेगी। कार्यक्रम का संचालन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल की अनुसंधान टीम ने किया। मुख्य अन्वेषक डॉ पंकज प्रसाद, सह-मुख्य अन्वेषक डॉ दीप्ति डाबर, डॉ पूर्वा मदनानी और अनुषा एबेनेजर अल्फ्यूस सहित विशेषज्ञों ने मॉडल की रूपरेखा और फील्ड स्तर पर लागू करने की कार्ययोजना पर चर्चा की।
माताओं और बच्चों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर फोकस
इसका मुख्य उद्देश्य ऐसा सिस्टम विकसित करना था, जिससे गर्भवती महिलाओं, नवजात बच्चों और ग्रामीण परिवारों को समय रहते स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके। अधिकारियों ने माना कि कई बार जानकारी और जागरूकता की कमी के कारण लोग सरकारी योजनाओं का पूरा फायदा नहीं ले पाते। इसी को ध्यान में रखते हुए व्यवहार परिवर्तन संचार को इस मॉडल का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है, ताकि लोगों तक सही स्वास्थ्य जानकारी पहुंच सके और वे समय पर इलाज व जांच करा सकें।
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स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताईं जमीनी समस्याएं
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की टीम, जिला स्वास्थ्य अधिकारी, आरबीएसके अधिकारी और ब्लॉक स्तर के स्वास्थ्य कर्मियों ने हिस्सा लिया। बैठक में गांव स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि कई ग्रामीण इलाकों में मातृ और बाल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए स्थानीय स्तर पर मजबूत समन्वय और जागरूकता की जरूरत है।
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गांवों तक स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत पहुंच बनाने की तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल होता है तो भविष्य में इसे दूसरे जिलों में भी लागू किया जा सकता है। इससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं और बच्चों को समय पर जांच, इलाज और स्वास्थ्य सलाह मिल सकेगी। कार्यक्रम का संचालन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल की अनुसंधान टीम ने किया। मुख्य अन्वेषक डॉ पंकज प्रसाद, सह-मुख्य अन्वेषक डॉ दीप्ति डाबर, डॉ पूर्वा मदनानी और अनुषा एबेनेजर अल्फ्यूस सहित विशेषज्ञों ने मॉडल की रूपरेखा और फील्ड स्तर पर लागू करने की कार्ययोजना पर चर्चा की।

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