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भोपाल में ठंडी राहत के नाम पर सेहत से खिलवाड़ः लस्सी-आमरस में मिलावट, सड़क किनारे गन्ने का रस भी खतरे की घंटी

न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Mon, 18 May 2026 06:37 PM IST
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सार

राजधानी भोपाल में भीषण गर्मी के बीच ठंडे पेय पदार्थों की मांग बढ़ने के साथ मिलावट का खतरा भी बढ़ गया है। आमरस, लस्सी और गन्ने के रस में केमिकल रंग और अस्वच्छ सामग्री मिलाने की शिकायतें सामने आई हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि ऐसे पेय पदार्थ पेट की गंभीर बीमारियों, फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकते हैं।

Health Jeopardized in Bhopal Under the Guise of Cooling Relief: Adulteration in Lassi and Aamras; Roadside Sug
जूस की दूकान में भीड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

भीषण गर्मी झेल रही राजधानी भोपाल में तापमान 44 डिग्री के करीब पहुंच गया है। गर्मी से राहत पाने के लिए लोग बड़ी संख्या में लस्सी, आमरस, जूस और गन्ने का रस पी रहे हैं, लेकिन इसी बीच मिलावट और नकली रंगों का खेल भी तेज हो गया है। शहर में कई जगह आमरस और लस्सी में केमिकल रंग मिलाने की शिकायतें सामने आने के बाद खाद्य विभाग ने सैंपलिंग शुरू कर दी है।

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एमडी मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. एके द्विवेदी

सैंपल लिए जा रहे, लेकिन रिपोर्ट में हो रही देरी

खाद्य विभाग लगातार दुकानों और ठेलों से सैंपल ले रहा है, लेकिन जांच रिपोर्ट आने में काफी समय लग रहा है। यही वजह है कि मिलावट करने वालों पर तुरंत सख्त कार्रवाई नहीं हो पा रही। गर्मी के मौसम में ठंडे पेय की बढ़ती मांग के बीच मिलावटखोर इसका फायदा उठा रहे हैं।
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डॉक्टर बोले- आर्टिफिशियल रंग बना सकते हैं गंभीर मरीज
एमडी मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. एके द्विवेदी ने बताया कि ड्रिंक्स को आकर्षक दिखाने के लिए उनमें आर्टिफिशियल कलर और केमिकल मिलाए जाते हैं। ये केमिकल पेट में गैस्ट्राइटिस, संक्रमण, उल्टी-दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार जूस और लस्सी साफ-सफाई के बिना तैयार किए जाते हैं, जिससे बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। कुछ मामलों में मरीजों की हालत इतनी गंभीर हो जाती है कि जान बचाना मुश्किल हो जाता है।

सड़क किनारे गन्ने का रस सबसे ज्यादा खतरनाक
डॉ द्विवेदी के मुताबिक सड़क किनारे बिकने वाला गन्ने का रस सबसे ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकता है। खुले में रखी बर्फ, गंदा पानी और अस्वच्छ मशीनों से संक्रमण तेजी से फैल सकता है। उन्होंने सलाह दी कि अगर गन्ने का रस पीना हो तो घर पर निकालकर पिएं या सीधे गन्ना चबाकर सेवन करें।

आमरस और लस्सी में मिल रहे खतरनाक केमिकल
विशेषज्ञों के अनुसार कई दुकानों में आमरस और लस्सी को ज्यादा पीला और आकर्षक दिखाने के लिए मेटानिल येलो जैसे प्रतिबंधित रंग मिलाए जाते हैं। ये केमिकल शरीर के लिए बेहद खतरनाक माने जाते हैं। इनके सेवन से एलर्जी, पेट दर्द, उल्टी-दस्त, अस्थमा की परेशानी, लिवर-किडनी डैमेज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों में ऐसे केमिकल मानसिक विकास और एकाग्रता पर भी असर डाल सकते हैं।

आमरस में रंग मिलाने की सबसे ज्यादा शिकायत
खाद्य सुरक्षा अधिकारी पंकज श्रीवास्तव के मुताबिक शहर के अलग-अलग इलाकों से आमरस में केमिकल कलर मिलाने की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद टीम ने करीब एक दर्जन दुकानों से आमरस और लस्सी के सैंपल लिए और उन्हें जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा है। अधिकारियों का कहना है कि कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर लगातार कार्रवाई जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने पर संबंधित दुकानदारों के खिलाफ न्यायालय में प्रकरण दर्ज किए जाएंगे।

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बिना पंजीयन दुकान मिली तो होगी सील
खाद्य विभाग ने साफ किया है कि जिन दुकानों के पास लाइसेंस या पंजीयन नहीं मिलेगा, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर दुकानें सील भी कराई जा सकती हैं। फिलहाल अधिकांश दुकानों में पंजीयन मिला है, लेकिन जांच अभियान लगातार जारी है।

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ऐसे करें बचाव
डॉक्टरों ने सलाह दी है कि बहुत ज्यादा चमकदार और अस्वाभाविक रंग वाले आमरस, लस्सी और जूस से बचें। सड़क किनारे खुले में बिकने वाले पेय पदार्थों की बजाय घर पर ताजे फल और शुद्ध दही से बने ड्रिंक का सेवन ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।


 
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