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Bhopal News: अब एम्स में नहीं भटकेंगे मरीज, QR कोड और ऐप से मिलेगा सीधा रास्ता, आईआईटी इंदौर का मिला सहयोग
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Fri, 20 Feb 2026 06:20 PM IST
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सार
एम्स भोपाल में मरीजों और आगंतुकों को अब परिसर में रास्ता ढूंढने में परेशानी नहीं होगी। आईआईटी इंदौर के सहयोग से स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली विकसित की जा रही है, जिसमें QR कोड, इंटरैक्टिव मैप, GPS और रिले डिवाइस के जरिए सटीक दिशा-निर्देशन मिलेगा। पहले इसे एक महीने के पायलट रूप में लागू किया जाएगा।
एम्स भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एम्स भोपाल ने मरीजों और उनके परिजनों की बड़ी परेशानी दूर करने की पहल की है। अब अस्पताल के विशाल परिसर में विभाग, वार्ड या कक्ष ढूंढना आसान होगा। इसके लिए एम्स ने आईआईटी इंदौर की ‘दृष्टि’ टीम के साथ मिलकर स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली तैयार करने की शुरुआत की है।एम्स का परिसर बड़ा और कई इमारतें एक जैसी होने के कारण लोग अक्सर रास्ता भटक जाते हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए दो तरह की डिजिटल सुविधा लाई जा रही है।
कैसे काम करेगी नई व्यवस्था?
परिसर के मुख्य स्थानों पर QR कोड लगाए जाएंगे।
QR कोड स्कैन करते ही मोबाइल पर इंटरैक्टिव मैप खुलेगा।
यह मैप चरणबद्ध तरीके से सही विभाग तक पहुंचने का रास्ता बताएगा।
भवनों के बीच GPS तकनीक से मार्गदर्शन मिलेगा।
इमारतों के अंदर हर 15 मीटर पर रिले डिवाइस लगेंगे, जो सटीक दिशा दिखाएंगे।
मोबाइल ऐप के जरिए भी यह सुविधा उपलब्ध होगी।
यह भी पढ़ें-नेता प्रतिपक्ष बोले-अभी तक नहीं उतरा भागीरथपुरा का भूत, विधानसभा में औकात वाले बयान पर विवाद जारी
पहले पायलट, फिर पूरे परिसर में लागू
इस व्यवस्था को पहले एक महीने के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। परिणाम अच्छे रहे तो इसे पूरे परिसर में लागू कर दिया जाएगा। इस पहल से मरीजों का समय बचेगा, बार-बार रास्ता पूछने की जरूरत कम होगी और बड़े अस्पताल में आने की झिझक भी खत्म होगी। डिजिटल और स्मार्ट सुविधा के साथ एम्स भोपाल अब मरीजों को और बेहतर अनुभव देने की तैयारी में है।
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कैसे काम करेगी नई व्यवस्था?
परिसर के मुख्य स्थानों पर QR कोड लगाए जाएंगे।
QR कोड स्कैन करते ही मोबाइल पर इंटरैक्टिव मैप खुलेगा।
यह मैप चरणबद्ध तरीके से सही विभाग तक पहुंचने का रास्ता बताएगा।
भवनों के बीच GPS तकनीक से मार्गदर्शन मिलेगा।
इमारतों के अंदर हर 15 मीटर पर रिले डिवाइस लगेंगे, जो सटीक दिशा दिखाएंगे।
मोबाइल ऐप के जरिए भी यह सुविधा उपलब्ध होगी।
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पहले पायलट, फिर पूरे परिसर में लागू
इस व्यवस्था को पहले एक महीने के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। परिणाम अच्छे रहे तो इसे पूरे परिसर में लागू कर दिया जाएगा। इस पहल से मरीजों का समय बचेगा, बार-बार रास्ता पूछने की जरूरत कम होगी और बड़े अस्पताल में आने की झिझक भी खत्म होगी। डिजिटल और स्मार्ट सुविधा के साथ एम्स भोपाल अब मरीजों को और बेहतर अनुभव देने की तैयारी में है।

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