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Bhopal News: फिजियोथैरेपी क्लीनिकों में कचरा नहीं, फिर भी प्रमाणपत्र जरूरी, परिषद से नियम खत्म करने की मांग
Sun, 16 Aug 2026 01:18 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sun, 16 Aug 2026 01:18 PM IST
सार
मध्यप्रदेश में फिजियोथैरेपी क्लीनिकों के लिए बायोमेडिकल वेस्ट प्रमाणपत्र की अनिवार्यता खत्म कराने की पहल तेज हुई है। भौतिक चिकित्सक कल्याण संघ ने एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशनल काउंसिल के अध्यक्ष से नियम की समीक्षा की मांग की। संघ का तर्क है कि सामान्य फिजियोथैरेपी उपचार में बायोमेडिकल वेस्ट पैदा नहीं होता, फिर भी प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य किया जा रहा है।
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अध्यक्ष से शिकायत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश में फिजियोथैरेपी क्लीनिकों के लिए लागू बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन प्रमाणपत्र की अनिवार्यता को खत्म कराने की पहल शुरू हुई है। भौतिक चिकित्सक कल्याण संघ ने मध्यप्रदेश स्टेट एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशनल काउंसिल के नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. डी. विजय कुमार से मुलाकात कर इस संबंध में ज्ञापन सौंपा है। संघ का तर्क है कि फिजियोथैरेपी की सामान्य उपचार प्रक्रियाओं में बायोमेडिकल वेस्ट पैदा ही नहीं होता, इसके बावजूद क्लीनिकों को प्रमाणपत्र और प्राधिकरण लेने के लिए बाध्य किया जा रहा है।
प्रमाणपत्र की अनिवार्यता की समीक्षा की मांग
संघ ने बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन नियम, 2016 का हवाला देते हुए कहा है कि इन नियमों का उद्देश्य वास्तव में उत्पन्न होने वाले बायोमेडिकल वेस्ट के पृथक्करण, संग्रहण, भंडारण, परिवहन, उपचार और निपटान को नियंत्रित करना है। ऐसे में केवल किसी प्रतिष्ठान को क्लीनिक कहे जाने के आधार पर यह मान लेना कि वहां बायोमेडिकल वेस्ट पैदा होता है, उचित नहीं होना चाहिए। मामले की असली बात यह है कि फिजियोथैरेपी क्लीनिकों में वास्तव में बायोमेडिकल वेस्ट पैदा होता है या नहीं, पहले इसका निर्धारण होना चाहिए। संघ ने इसी आधार पर प्रमाणपत्र की अनिवार्यता की समीक्षा की मांग की है।
पहले भी उठ चुका है मामला
संघ के अनुसार इस विषय को लेकर स्वास्थ्य विभाग को आवेदन दिया जा चुका है। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी यह जानकारी मांगी गई कि फिजियोथैरेपी क्लीनिकों से कौन-सा बायोमेडिकल वेस्ट उत्पन्न होता है, लेकिन अपेक्षित स्पष्ट जवाब नहीं मिला। विधानसभा में भी स्वास्थ्य विभाग से इस संबंध में प्रश्न किया जा चुका है, हालांकि संघ के अनुसार नियम लागू करने का स्पष्ट आधार सामने नहीं आया। अब मामला मध्यप्रदेश स्टेट एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशनल काउंसिल के नवनियुक्त अध्यक्ष के सामने रखा गया है। संघ ने उम्मीद जताई है कि परिषद अपने नियामकीय दायित्वों के तहत इस मुद्दे का शीघ्र समाधान कराने में भूमिका निभाएगी।
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यह भी पढ़ें-पूर्वी MP में बारिश का दौर,जबलपुर-रीवा-शहडोल समेत 18 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट,3 दिन रहेगा असर
संघ बोला- किसी संस्था के खिलाफ नहीं है लड़ाई
भौतिक चिकित्सक कल्याण संघ के अध्यक्ष डॉ. सुनील पाण्डेय ने कहा कि यह किसी व्यक्ति, विभाग या संस्था के खिलाफ संघर्ष नहीं है। उद्देश्य फिजियोथैरेपी पेशेवरों के सामने लंबे समय से चली आ रही समस्या का नियमसम्मत समाधान कराना है। उनका कहना है कि व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें वास्तविक बायोमेडिकल वेस्ट उत्पन्न करने वाले संस्थानों पर जरूरी नियम लागू हों, लेकिन जहां ऐसा कचरा उत्पन्न ही नहीं होता, वहां अनावश्यक प्रमाणपत्र की बाध्यता पर पुनर्विचार किया जाए। संघ ने कहा कि वह सकारात्मक संवाद के जरिए इस मुद्दे को समाधान तक पहुंचाने का प्रयास जारी रखेगा।
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प्रमाणपत्र की अनिवार्यता की समीक्षा की मांग
संघ ने बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन नियम, 2016 का हवाला देते हुए कहा है कि इन नियमों का उद्देश्य वास्तव में उत्पन्न होने वाले बायोमेडिकल वेस्ट के पृथक्करण, संग्रहण, भंडारण, परिवहन, उपचार और निपटान को नियंत्रित करना है। ऐसे में केवल किसी प्रतिष्ठान को क्लीनिक कहे जाने के आधार पर यह मान लेना कि वहां बायोमेडिकल वेस्ट पैदा होता है, उचित नहीं होना चाहिए। मामले की असली बात यह है कि फिजियोथैरेपी क्लीनिकों में वास्तव में बायोमेडिकल वेस्ट पैदा होता है या नहीं, पहले इसका निर्धारण होना चाहिए। संघ ने इसी आधार पर प्रमाणपत्र की अनिवार्यता की समीक्षा की मांग की है।
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पहले भी उठ चुका है मामला
संघ के अनुसार इस विषय को लेकर स्वास्थ्य विभाग को आवेदन दिया जा चुका है। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी यह जानकारी मांगी गई कि फिजियोथैरेपी क्लीनिकों से कौन-सा बायोमेडिकल वेस्ट उत्पन्न होता है, लेकिन अपेक्षित स्पष्ट जवाब नहीं मिला। विधानसभा में भी स्वास्थ्य विभाग से इस संबंध में प्रश्न किया जा चुका है, हालांकि संघ के अनुसार नियम लागू करने का स्पष्ट आधार सामने नहीं आया। अब मामला मध्यप्रदेश स्टेट एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशनल काउंसिल के नवनियुक्त अध्यक्ष के सामने रखा गया है। संघ ने उम्मीद जताई है कि परिषद अपने नियामकीय दायित्वों के तहत इस मुद्दे का शीघ्र समाधान कराने में भूमिका निभाएगी।
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संघ बोला- किसी संस्था के खिलाफ नहीं है लड़ाई
भौतिक चिकित्सक कल्याण संघ के अध्यक्ष डॉ. सुनील पाण्डेय ने कहा कि यह किसी व्यक्ति, विभाग या संस्था के खिलाफ संघर्ष नहीं है। उद्देश्य फिजियोथैरेपी पेशेवरों के सामने लंबे समय से चली आ रही समस्या का नियमसम्मत समाधान कराना है। उनका कहना है कि व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें वास्तविक बायोमेडिकल वेस्ट उत्पन्न करने वाले संस्थानों पर जरूरी नियम लागू हों, लेकिन जहां ऐसा कचरा उत्पन्न ही नहीं होता, वहां अनावश्यक प्रमाणपत्र की बाध्यता पर पुनर्विचार किया जाए। संघ ने कहा कि वह सकारात्मक संवाद के जरिए इस मुद्दे को समाधान तक पहुंचाने का प्रयास जारी रखेगा।
