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Bhopal: झुर्रियां होंगी कम, त्वचा में आएगा कसाव और बालों का भी आधुनिक इलाज, एम्स में डॉक्टरों ने सीखी नई तकनीक
Wed, 15 Jul 2026 06:37 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Wed, 15 Jul 2026 06:37 PM IST
सार
चेहरे की झुर्रियां कम करने, त्वचा में कसाव लाने और बालों की समस्याओं के आधुनिक इलाज की नई तकनीकें अब डॉक्टर सीख रहे हैं। एम्स भोपाल में देशभर से आए विशेषज्ञों और डॉक्टरों को प्रत्यक्ष प्रक्रिया दिखाकर प्रशिक्षण दिया गया। कम चीरे और सुरक्षित इलाज पर खास जोर रहा।
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एम्स में स्किन रीबूट लाइव प्रशिक्षण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चेहरे पर बढ़ती उम्र का असर कम करना हो, ढीली त्वचा में कसाव लाना हो या बालों से जुड़ी परेशानी का आधुनिक इलाज, चिकित्सा के क्षेत्र में तेजी से नई तकनीकें आ रही हैं। इन तकनीकों को सुरक्षित तरीके से मरीजों तक पहुंचाने के लिए एम्स भोपाल ने देशभर के डॉक्टरों को एक मंच पर जुटाया। विश्व प्लास्टिक सर्जरी दिवस पर एम्स भोपाल के बर्न एवं प्लास्टिक शल्य चिकित्सा विभाग ने स्किन रीबूट लाइव 2026 प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की। इसमें प्लास्टिक सर्जन, त्वचा रोग विशेषज्ञ और स्नातकोत्तर प्रशिक्षणार्थी शामिल हुए।
किताबों से नहीं, सामने इलाज करके सिखाया
कार्यशाला की खास बात यह रही कि डॉक्टरों को केवल व्याख्यान देकर नई तकनीकों की जानकारी नहीं दी गई। विशेषज्ञों ने उपचार की प्रक्रियाएं सामने करके दिखाईं। इसके बाद डॉक्टरों को विशेषज्ञों की निगरानी में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। चेहरे की झुर्रियां कम करने के लिए दी जाने वाली विशेष औषधि, धागों की मदद से त्वचा में कसाव लाने और त्वचा तथा बालों से जुड़ी आधुनिक उपचार तकनीकों की बारीकियां समझाई गईं।
किस मरीज को कौन सा इलाज, यह भी समझाया
विशेषज्ञों ने मरीजों के उदाहरणों के जरिए डॉक्टरों को बताया कि हर व्यक्ति के लिए एक जैसा सौंदर्य उपचार सही नहीं होता। मरीज की उम्र, त्वचा और परेशानी को समझने के बाद ही सही उपचार चुनना जरूरी है। उपचार के दौरान होने वाली परेशानियों से बचाव और मरीज की सुरक्षा पर भी खास जोर दिया गया। वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर ही उपचार करने की सलाह दी गई।
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यह भी पढ़ें-दिग्विजय पर कार्रवाई क्यों नहीं: सिर्फ मुझे नोटिस क्यों? निधि ने कांग्रेस संगठन को घेरा, 7 दिन का अल्टीमेटम
कम चीरा, तेजी से बदल रही सौंदर्य चिकित्सा
कार्यशाला में कम चीरा लगने वाली आधुनिक सौंदर्य प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। एम्स के विशेषज्ञों के अनुसार, सौंदर्य उपचार की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में डॉक्टरों का नई तकनीकों में प्रशिक्षित होना जरूरी है। कार्यक्रम में डॉ. सुखबीर सिंह, डॉ. रोहिणी चौहान और डॉ. अरुण भटनागर ने आधुनिक उपचार तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया और अपने अनुभव साझा किए।
यह भी पढ़ें-मोहन सरकार का बड़ा फेरबदल, लखन पटेल से पशुपालन विभाग वापस, आनंद विभाग की जिम्मेदारी सौंपी
नई तकनीक सीखेंगे डॉक्टर, मरीजों को मिलेगा सुरक्षित इलाज
एम्स भोपाल के अकादमिक अधिष्ठाता प्रो. डॉ. रजनीश जोशी ने कहा कि सौंदर्य और पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इस तरह की कार्यशालाएं डॉक्टरों को नई और वैज्ञानिक उपचार पद्धतियों से जोड़ती हैं। इसका सीधा लाभ मरीजों को सुरक्षित, नैतिक और बेहतर इलाज के रूप में मिलता है। कार्यशाला में प्रो. डॉ. विकास गुप्ता, प्रो. डॉ. रेहान उल हक, डॉ. आर. बी. सिंह और ब्रिगेडियर डॉ. राजकुमार मेहता भी मौजूद रहे। आयोजन की अध्यक्षता जला एवं प्लास्टिक शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. मनाल एम. खान ने की। डॉ. अभिनव सिंह ने आयोजन सचिव के रूप में कार्यक्रम के संचालन और समन्वय की जिम्मेदारी संभाली।
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किताबों से नहीं, सामने इलाज करके सिखाया
कार्यशाला की खास बात यह रही कि डॉक्टरों को केवल व्याख्यान देकर नई तकनीकों की जानकारी नहीं दी गई। विशेषज्ञों ने उपचार की प्रक्रियाएं सामने करके दिखाईं। इसके बाद डॉक्टरों को विशेषज्ञों की निगरानी में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। चेहरे की झुर्रियां कम करने के लिए दी जाने वाली विशेष औषधि, धागों की मदद से त्वचा में कसाव लाने और त्वचा तथा बालों से जुड़ी आधुनिक उपचार तकनीकों की बारीकियां समझाई गईं।
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किस मरीज को कौन सा इलाज, यह भी समझाया
विशेषज्ञों ने मरीजों के उदाहरणों के जरिए डॉक्टरों को बताया कि हर व्यक्ति के लिए एक जैसा सौंदर्य उपचार सही नहीं होता। मरीज की उम्र, त्वचा और परेशानी को समझने के बाद ही सही उपचार चुनना जरूरी है। उपचार के दौरान होने वाली परेशानियों से बचाव और मरीज की सुरक्षा पर भी खास जोर दिया गया। वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर ही उपचार करने की सलाह दी गई।
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कम चीरा, तेजी से बदल रही सौंदर्य चिकित्सा
कार्यशाला में कम चीरा लगने वाली आधुनिक सौंदर्य प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। एम्स के विशेषज्ञों के अनुसार, सौंदर्य उपचार की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में डॉक्टरों का नई तकनीकों में प्रशिक्षित होना जरूरी है। कार्यक्रम में डॉ. सुखबीर सिंह, डॉ. रोहिणी चौहान और डॉ. अरुण भटनागर ने आधुनिक उपचार तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया और अपने अनुभव साझा किए।
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नई तकनीक सीखेंगे डॉक्टर, मरीजों को मिलेगा सुरक्षित इलाज
एम्स भोपाल के अकादमिक अधिष्ठाता प्रो. डॉ. रजनीश जोशी ने कहा कि सौंदर्य और पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इस तरह की कार्यशालाएं डॉक्टरों को नई और वैज्ञानिक उपचार पद्धतियों से जोड़ती हैं। इसका सीधा लाभ मरीजों को सुरक्षित, नैतिक और बेहतर इलाज के रूप में मिलता है। कार्यशाला में प्रो. डॉ. विकास गुप्ता, प्रो. डॉ. रेहान उल हक, डॉ. आर. बी. सिंह और ब्रिगेडियर डॉ. राजकुमार मेहता भी मौजूद रहे। आयोजन की अध्यक्षता जला एवं प्लास्टिक शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. मनाल एम. खान ने की। डॉ. अभिनव सिंह ने आयोजन सचिव के रूप में कार्यक्रम के संचालन और समन्वय की जिम्मेदारी संभाली।
