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बीयू का बड़ा एक्शन प्लान: अब नहीं चलेगा फर्जी स्टाफ और संसाधनों का खेल, सभी कोर्सों की होगी एक साथ जांच

Sat, 16 May 2026 07:14 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sat, 16 May 2026 07:14 PM IST
सार

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय ने संबद्ध कॉलेजों में फर्जी स्टाफ और कागजी संसाधनों के खेल पर रोक लगाने के लिए निरीक्षण प्रक्रिया बदल दी है। अब एक ही कॉलेज में संचालित सभी कोर्सों का संयुक्त निरीक्षण होगा। नई व्यवस्था से वास्तविक संसाधनों और दावों का अंतर सामने आने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की उम्मीद जताई जा रही।

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BU's Major Action Plan: The Ruse of Bogus Staff and Resources Ends Now; All Courses to Undergo Simultaneous In
बीयू भोपाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय ने संबद्ध कॉलेजों में लंबे समय से चल रही कागजी व्यवस्थाओं पर लगाम कसने की तैयारी शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय ने निरीक्षण प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए ऐसा सिस्टम लागू किया है, जिसमें अब किसी कॉलेज में संचालित सभी कोर्सों का एक साथ परीक्षण किया जाएगा। नई व्यवस्था का मकसद उन संस्थानों की वास्तविक स्थिति सामने लाना है, जो अब तक अलग-अलग निरीक्षण के दौरान सीमित संसाधनों को कई कोर्सों के नाम पर दिखाते रहे हैं। विश्वविद्यालय ने इसके लिए नया फॉर्मेट-ए जारी किया है। इसके तहत कॉलेजों को निरीक्षण से पहले ही अपने यहां उपलब्ध भवन, लैब, लाइब्रेरी, फैकल्टी और अन्य संसाधनों की पूरी जानकारी देनी होगी। इसके बाद निरीक्षण दल उसी जानकारी के आधार पर मौके पर वास्तविक स्थिति का मिलान करेगा।
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अब नहीं चलेगा एक संसाधन- कई कोर्स मॉडल
अब तक कई कॉलेजों में एक ही क्लासरूम, लैब और फैकल्टी को अलग-अलग समय पर अलग कोर्सों के लिए प्रस्तुत कर संबद्धता और निरंतरता हासिल कर ली जाती थी। निरीक्षण की तारीख और समय अलग होने के कारण यह खेल आसानी से चलता रहा। कई संस्थानों में सीमित संसाधनों के बावजूद बीएड, एमबीए, लॉ, बीपीएड और पारंपरिक कोर्स एक साथ संचालित होते रहे, लेकिन जांच में पूरी तस्वीर सामने नहीं आ पाती थी। नई प्रणाली में संयुक्त निरीक्षण होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कॉलेज के पास वास्तव में सभी कोर्स संचालित करने लायक संसाधन और स्टाफ मौजूद हैं या नहीं।
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देनी होगी हर जानकारी
विश्वविद्यालय ने फॉर्मेट-ए में कॉलेजों से भवन, कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, लाइब्रेरी, उपकरणों और अन्य सुविधाओं का विस्तृत ब्यौरा मांगा है। साथ ही प्राचार्य, विषयवार फैकल्टी, शिक्षकों की योग्यता और नियुक्ति संबंधी जानकारी भी देना अनिवार्य किया गया है। निरीक्षण दल मौके पर इन्हीं दावों का सत्यापन करेगा और रिपोर्ट तैयार करेगा। यदि जानकारी और वास्तविकता में अंतर मिला तो संबंधित कॉलेजों पर कार्रवाई की जा सकती है।


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छात्रों की गुणवत्ता पर भी रहेगा फोकस
विश्वविद्यालय का मानना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी संख्या में कोर्स चलाने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। कई छात्रों को केवल डिग्री मिली, लेकिन व्यावहारिक ज्ञान और कौशल का अभाव बना रहा। नई व्यवस्था से शिक्षण गुणवत्ता सुधारने और जवाबदेही तय करने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

 
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