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गंगा दशहरा पर सीएम मोहन यादव का संदेश: जल संरक्षण बने जन आंदोलन, तभी सुरक्षित होगा भविष्य

Sun, 24 May 2026 09:47 PM IST
Sabahat Husain न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Sabahat Husain Updated Sun, 24 May 2026 09:47 PM IST
सार

गंगा दशहरा पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जल संरक्षण को राष्ट्र निर्माण का आधार बताते हुए इसे जनभागीदारी का पर्व बताया। उन्होंने “जल गंगा संवर्धन अभियान” की उपलब्धियां गिनाईं और प्रदेशवासियों से जल बचाने को सामाजिक जिम्मेदारी बनाकर आगे आने का आह्वान किया।

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CM Mohan Yadav Message on Ganga Dussehra Water Conservation Must Become a Mass Movement
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गंगा दशहरा के अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जल संरक्षण को राष्ट्र निर्माण का आधार बताते हुए कहा कि यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि जल के प्रति कृतज्ञता और जनभागीदारी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नदियों को देवी स्वरूप माना गया है और गंगा का स्थान सर्वोच्च है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण देशव्यापी जन आंदोलन बना है। जल शक्ति मंत्रालय, जल जीवन मिशन, नमामि गंगे, अमृत सरोवर मिशन और जल शक्ति अभियान जैसी योजनाओं ने देश की जल सुरक्षा को नई दिशा दी है। उन्होंने बताया कि अमृत सरोवर योजना के तहत देशभर में 70 हजार से अधिक जलाशयों का निर्माण और पुनरुद्धार किया जा चुका है, जिससे वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और सिंचाई सुविधाओं को मजबूती मिली है।

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डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जरिए “प्रति बूंद अधिक फसल” का संदेश किसानों तक पहुंचा है। वहीं “कैच द रेन” अभियान ने वर्षा जल संचयन को जनभागीदारी से जोड़ दिया है। अब जल संरक्षण केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी बन चुका है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में चल रहा “जल गंगा संवर्धन अभियान” राज्यव्यापी जन आंदोलन का रूप ले चुका है। इसके तहत नदियों, तालाबों, कुओं, बावड़ियों, चेकडैम और अन्य जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार, गहरीकरण और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है।


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उन्होंने बताया कि प्रदेश में 10 हजार से अधिक चेकडैम और स्टॉपडैम के संधारण, हजारों तालाबों के गहरीकरण और नई जल संरचनाओं के निर्माण पर लगभग 2,500 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों, महिलाओं, युवाओं और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि प्रधान राज्य है और इसकी समृद्धि जल संसाधनों पर निर्भर है। अनियमित वर्षा, गिरते भूजल स्तर और जल प्रदूषण जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए जल संरक्षण बेहद जरूरी है। खेत तालाब, रिज-टू-वैली मॉडल और जल संरचनाओं के विकास से किसानों की आय बढ़ रही है और सूखाग्रस्त क्षेत्रों में भी खेती संभव हो रही है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की प्राचीन बावड़ियां, तालाब और जल संरचनाएं हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। इनके संरक्षण और पुनरुद्धार से सांस्कृतिक गौरव के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल-संपन्न मध्यप्रदेश के निर्माण में सहभागी बनने का आह्वान किया।

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